Tags

LPG सिलेंडर की टेंशन खत्म! इंफ्रारेड चूल्हा (Infrared Stove) खरीदते समय रखें इन 2 बातों का ध्यान, होगी बड़ी बचत

एलपीजी संकट और बढ़ती कीमतों के बीच लोग गैस सिलेंडर पर निर्भरता कम करने के लिए तेजी से इंफ्रारेड चूल्हे की ओर रुख कर रहे हैं, जो सभी तरह के बर्तनों में तेजी से, कम तेल में और किफायती तरीके से खाना पकाने का सुविधाजनक विकल्प बन रहा है।

By Pinki Negi

lpg crisis what is an infrared stove which one should you buy one with one plate or two

देश में LPG सिलेंडर की किल्लत और बढ़ती कीमतों के बीच अब किचन का चेहरा तेजी से बदल रहा है। कई शहरों में सिलेंडर मिलने में देरी, बुकिंग गैप बढ़ने और सप्लाई अनिश्चित होने के कारण लोग गैस चूल्हे के विकल्प ढूंढ रहे हैं। इंडक्शन चूल्हों की डिमांड ज़रूर बढ़ी है, लेकिन खास इंडक्शन-सेफ बर्तनों की जरूरत और उनकी कमी की वजह से आम परिवारों को दिक्कत हो रही है। ऐसे माहौल में इंफ्रारेड चूल्हा एक आसान, किफायती और प्रैक्टिकल विकल्प के तौर पर तेजी से चर्चा में आ गया है।

LPG संकट के बीच किचन का बदलता ट्रेंड

मिडिल ईस्ट में तनाव और ग्लोबल गैस सप्लाई पर दबाव की खबरों के बीच भारत में भी घरेलू LPG को लेकर चिंता बढ़ी है। कई जगह सिलेंडर की डिलेवरी में समय लग रहा है, तो कहीं बुकिंग के बीच का अंतराल बढ़ने से लोग बैकअप विकल्प तलाशने को मजबूर हैं। नतीजा यह है कि शहरों से लेकर कस्बों तक, बिजली से चलने वाले कुकटॉप- खासकर इंडक्शन और इंफ्रारेड- की बिक्री बढ़ रही है। इंडक्शन ने शुरुआती दौर में बढ़त बनाई, लेकिन हर घर में इंडक्शन-कम्पेटिबल बर्तन न होने की वजह से कई उपभोक्ताओं की नजर अब इंफ्रारेड चूल्हे पर टिक गई है, जो लगभग हर तरह के बर्तन स्वीकार कर लेता है।

क्या है इंफ्रारेड चूल्हा और कैसे काम करता है?

इंफ्रारेड चूल्हा बिजली से चलने वाला ऐसा कुकटॉप है, जिसकी ग्लास या सिरेमिक सतह के नीचे हीटिंग एलिमेंट से इंफ्रारेड रेडिएशन पैदा होती है। यह रेडिएशन सतह को गर्म करती है और वही गर्मी बर्तन के पूरे तल में समान रूप से फैलती है, जिससे कुकिंग अपेक्षाकृत बराबर और स्थिर तापमान पर होती है।

पारंपरिक इंडक्शन के उलट, इसमें किसी मैग्नेटिक बेस वाले स्पेशल कुकर की जरूरत नहीं होती; सामान्य एल्यूमीनियम, स्टील, कॉपर, आयरन और कई मामलों में मिट्टी या ग्लास के बर्तन भी इस्तेमाल किए जा सकते हैं। यही “यूनिवर्सल कुकवेयर कम्पैटिबिलिटी” इसे भारतीय रसोई के लिए खासतौर पर आकर्षक बनाती है, जहां पहले से ही तरह-तरह के बर्तन मौजूद होते हैं।

कम तेल में कुकिंग और हेल्थ फैक्टर

इंफ्रारेड चूल्हे की सतह पर तापमान कंट्रोल अपेक्षाकृत स्मूद और स्टेबल रहता है, इसलिए मध्यम या लो फ्लेम जैसी सेटिंग पर भी खाना आसानी से पकाया जा सकता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि ऐसे कुकटॉप पर कम तेल में भी सब्जी, दाल या हल्की फ्राईिंग आराम से की जा सकती है, जिससे फैट इनटेक कम करने वाले परिवारों के लिए यह बेहतर विकल्प बन कर उभर रहा है। धीरे और नियंत्रित हीट की वजह से खाना जलने की आशंका भी कम होती है, जो हेल्दी कुकिंग की दिशा में एक और पॉजिटिव पहलू है।

एक प्लेट बनाम दो प्लेट

इंफ्रारेड चूल्हा खरीदते समय सबसे आम सवाल होता है- एक प्लेट लें या दो प्लेट वाला मॉडल? छोटे परिवार, बैचलर या ऐसे घर जहां ज्यादातर हल्की कुकिंग होती है, उनके लिए सिंगल प्लेट इंफ्रारेड स्टोव बेहतर माना जा रहा है। यह कम जगह घेरता है, अपेक्षाकृत सस्ता होता है और बिजली की खपत भी सीमित रहती है, क्योंकि एक समय में एक ही हीट सोर्स चलता है।

दूसरी तरफ, संयुक्त परिवारों या उन घरों में जहां एक साथ कई डिश तैयार करनी होती हैं, डबल प्लेट मॉडल रसोई की रफ्तार बढ़ा देता है। इसकी मदद से रोटी और सब्जी, दाल और चावल, या नाश्ता और चाय- दो काम साथ-साथ निपटाए जा सकते हैं, हालांकि दोनों प्लेट फुल पावर पर चलाने से बिजली का लोड भी उतना ही बढ़ जाता है।

कितनी पावर आपके लिए सही?

इंफ्रारेड चूल्हा चुनते समय उसका वॉटेज यानी पावर रेटिंग समझना बेहद जरूरी है। कम वॉट (लगभग 800–1500W) वाले मॉडल कीमत में सस्ते और हल्की कुकिंग- जैसे चाय, कॉफी, मैगी या बेसिक नाश्ता- के लिए पर्याप्त हो सकते हैं, लेकिन इन पर भारी कुकिंग करने में समय ज्यादा लगेगा। घरेलू उपयोग के लिए विशेषज्ञ आम तौर पर 1800W से 2000W के बीच का कुकटॉप बेहतर मानते हैं, क्योंकि इसमें गर्मी तेजी से बनती है और आम भारतीय खाना अपेक्षाकृत जल्दी तैयार हो जाता है।

ध्यान रहे, जितना ज्यादा वॉट, उतनी तेज हीट और उतनी ही ज्यादा यूनिट खपत; इसलिए जरूरत के हिसाब से बैलेंस चुनना ही समझदारी है- ना बहुत कम कि हर डिश में समय दोगुना लगे, ना इतना ज्यादा कि बिजली का बिल अनावश्यक रूप से फूल जाए।

क्यों बन रहा है लोकप्रिय विकल्प?

कुल मिलाकर, बढ़ती LPG कीमतों, किल्लत और सप्लाई को लेकर असमंजस के बीच इंफ्रारेड चूल्हा अब आम भारतीय किचन में एक मजबूत विकल्प के रूप में जगह बना रहा है। यह न केवल अलग-अलग तरह के बर्तनों के साथ काम करता है, बल्कि बिना धुएं, बिना सिलेंडर की टेंशन और नियंत्रित तापमान के साथ रोजमर्रा की कुकिंग को आसान बनाता है। सही वॉट क्षमता, प्लेटों की संख्या और भरोसेमंद ब्रांड चुनकर आप अपने किचन को न सिर्फ गैस पर कम निर्भर बना सकते हैं, बल्कि उसे और भी स्मार्ट, सुरक्षित और हेल्दी कुकिंग के लिए तैयार कर सकते हैं।

Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

अभी-अभी मोदी का ऐलान

हमारे Whatsaap ग्रुप से जुड़ें