
अमेरिका–ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव और युद्ध प्रकृति की घटनाओं के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में एलपीजी गैस की आपूर्ति में दिक्कत पैदा हो गई है। इसका असर भारत सहित कई देशों पर साफ दिख रहा है, जहां एलपीजी सिलेंडर की आपूर्ति धीमी या प्रभावित होने की खबरें आम हैं। हालांकि सरकार ने पूरी तरह से यह भरोसा दिलाया है कि सबको गैस की कोई कमी नहीं होगी, लेकिन डीलर और उपभोक्ता दोनों सतर्क मोड में हैं।
इंडक्शन की बढ़ती डिमांड
एलपीजी संकट के बीच घरों में इंडक्शन चूल्हे की मांग में तेजी से उछाल आया है। गैस के विकल्प के रूप में इंडक्शन को सुरक्षित, साफ और ज्यादातर शहरी घरों के लिए प्रैक्टिकल विकल्प माना जा रहा है। और अब गर्मी की मौसम भी शुरू हो चुका है, जिसके साथ‑साथ एयर कंडीशनर (AC) की चल भी बढ़ गई है। ऐसे में बहुत से घर अब एक ही वक्त पर AC और इंडक्शन दोनों को एक साथ चलाने लगे हैं, जिससे बिजली की खपत और बिल में सीधी तरह से बढ़ोतरी हो सकती है।
4 लोगों के घर में AC और इंडक्शन खपत का हिसाब
एक आम 4 सदस्यीय परिवार को उदाहरण मानें। अगर घर में 1.5 टन का AC है, जो औसतन 1.5 यूनिट (kWh) / घंटा बिजली खपत करता है, और वह रोज 8 घंटे चलता है, तो उसकी खपत इस तरह होगी:
- रोज की खपत = 1.5 × 8 = 12 यूनिट
- 30 दिन की खपत = 12 × 30 = 360 यूनिट
दूसरी तरफ, इंडक्शन चूल्हा आमतौर पर 1.5–2 kW का होता है। मान लें कि वह रोज 2 घंटे चलता है (2 kW पर):
- रोज की खपत = 2 × 2 = 4 यूनिट
- महीने की खपत = 4 × 30 = 120 यूनिट
इन दोनों को जोड़ने पर:
- AC = 360 यूनिट
- इंडक्शन = 120 यूनिट
- कुल बिजली खपत = 480 यूनिट प्रति महीना (केवल AC और इंडक्शन)
बिजली बिल कितना हो सकता है?
अगर औसतन बिजली दर ₹7 प्रति यूनिट मानी जाए, तब:
- 480 × 7 = ₹3,360 प्रति महीना
यह रकम सिर्फ एक 1.5 टन AC और एक इंडक्शन चूल्हे की है। असल में, घर में फ्रिज, पंखे, TV, चार्जर, LED लाइट्स आदि की अतिरिक्त खपत 80–150 यूनिट तक बढ़ा सकती है, जिससे कुल यूनिट 550–600 और बिल ₹4,000–₹4,500 तक भी पहुंच सकता है।
कई राज्यों में स्लैब सिस्टम लागू है, जहां ज्यादा यूनिट पर दर बढ़ जाती है। ऐसे में AC और इंडक्शन एक साथ लगातार चलाने पर एक महीने का बिजली बिल आराम से ₹3,800 से ₹4,800 के बीच रह सकता है, खासकर गर्मी के मौसम में।
सावधानी और बचत की राह
विशेषज्ञों की सलाह है कि AC को 24–26°C पर ही चलाएं और रोज की उपयोग अवधि को आवश्यकता तक सीमित रखें। इंडक्शन पर ज्यादा देर तेज आँच पर पकाने की बजाय मध्यम पावर पर बेस बनाना और फिर दूसरी चीजें तैयार करना ज्यादा ऊर्जा‑कुशल है। साथ ही, अगर घर में लगातार दोनों उपकरण एक साथ चलाने की जरूरत है तो बिजली कनेक्शन के अनुमत लोड की जांच करना जरूरी है, ताकि ओवरलोड या फाइन की स्थिति से बचा जा सके।
इस तरह, गैस संकट और गर्मी के मौसम में भी एक समझदारी भरा ढंग से बिजली का इस्तेमाल करना ही घर के बजट और गर्मियों की असहजता दोनों को काबू में रख सकता है।









