
होली त्योहार के मद्देनजर देश के तेल‑तिलहन बाजार में शुक्रवार को कारोबार धीमा रहा। बाजार में ज्यादातर तेल और तिलहन के भाव स्थिर बने रहे, जबकि सरसों और सरसों के तेल में दबाव बनने की वजह से कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। व्यापारियों का कहना है कि त्योहार से पहले जिस दायरे में खरीदारी होनी थी, वह पहले ही पूरी हो चुकी, इसलिए शुक्रवार को न तो ज्यादा खरीदारी हुई और न ही ज्यादा बिकवाली, जिसके चलते दाम लगभग पहले जैसे ही बने रहे।
होली के कारण बाजार सुस्त
होली के आसपास की अवधि में रसोई, तले‑पकवान और मिठाई‑खाने की खपत बढ़ती है, जिसकी वजह से तेल‑तिलहन की मांग आमतौर पर ठहराव से ऊपर जाती है। लेकिन इस बार व्यापारी और डिपो मालिक पहले से ही स्टॉक ले चुके थे, जिससे शुक्रवार को रोजाना की तरह गतिविधियां कम रहीं। एक दिल्ली‑आधारित तेल व्यापारी ने बताया, “जितना ऑर्डर होली के लिए चाहिए था, वह लगभग पूरा हो गया। इसलिए शुक्रवार को नया ऑर्डर लेने की जरूरत नहीं थी, भाव भी अपने ठहरे‑ठिकाने पर बने रहे।”
सरसों पर दबदबा
बाजार सूत्रों के मुताबिक, होली के बाद सरसों की नई फसल की आवक बढ़ने की उम्मीद है, यानी मंडियों में पुराने भंडार के साथ‑साथ नई पैदावार आने लगेगी। जब किसी वस्तु की आपूर्ति बढ़ती है तो उसके दाम पर दबाव बनता है, और यही हाल सरसों तिलहन और सरसों तेल का रहा। फरवरी के अंत में दादरी‑दिल्ली बाजार में थोक सरसों तेल की कीमत लगभग 13,150 रुपये प्रति क्विंटल रही, जो पिछले महीनों के उच्च स्तर से नीचे है।
मंडी रिपोर्ट्स के अनुसार सरसों तिलहन की कीमत लगभग 6,375–6,400 रुपये प्रति क्विंटल के बीच बनी है, जबकि सरसों पक्की घानी और सरसों कच्ची घानी दोनों की टिन रेंज 2,245–2,390 रुपये प्रति टिन के बीच दर्ज हुई। व्यापारी मान रहे हैं कि अगर नई फसल की आवक उम्मीद से ज्यादा रही तो आने वाले सप्ताहों में घानी और रिफाइंड सरसों तेल में और नरमी देखने को मिल सकती है, जिससे रिटेल शतर भी थोड़े सस्ते हो सकते हैं।
ज्यादातर तेलों में स्थिरता
वहीं ज्यादातर अन्य तेलों में कोई बड़ा उतार‑चढ़ाव नहीं देखा गया। मूंगफली तिलहन की कीमत लगभग 6,950–7,425 रुपये प्रति क्विंटल तक बनी रही, जबकि मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात) की कीमत लगभग 17,000 रुपये प्रति क्विंटल बनी रही। मूंगफली रिफाइंड तेल की टिन के भाव 2,675–2,975 रुपये प्रति टिन के बीच रहे, जो पिछले कुछ हफ्तों की रेंज से काफी अलग‑अंतर नहीं दिखती।
इसी तरह सोयाबीन तेल भी अधिकांश बाजारों में स्थिर है। दिल्ली में सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी की कीमत 14,200 रुपये प्रति क्विंटल, इंदौर में 13,850 रुपये और डीगम‑कांडला मार्केट में 11,100 रुपये प्रति क्विंटल रही। कच्चा पाम तेल (सीपीओ) और पामोलिन तेल की कीमतों में भी ज्यादा बदलाव नहीं आया; सीपीओ एक्स‑कांडला लगभग 11,600 रुपये और पामोलिन आरबीडी, दिल्ली 13,400 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ।
बिनौला तेल में हल्की मजबूती
वहीं बिनौला (रेपसीड‑मस्तर्ड) तेल की कीमतों में हल्का सुधार देखने को मिला। बाजार में इसकी मांग निकलने से भाव में तेजी आई, हालांकि यह बढ़ोतरी बहुत ज्यादा नहीं थी। बिनौला तेल मिल डिलिवरी (हरियाणा) की कीमत लगभग 12,950 रुपये प्रति क्विंटल तक चली गई, जो पिछले कुछ दिनों के नीचे स्तर से ऊपर है।
व्यापारियों का मानना है कि अगर आने वाले दिनों में बिनौला तेल की मांग जारी रही तो इसके दाम में और मजबूती देखने को मिल सकती है, खासकर उन राज्यों में जहां बिनौला रिफाइंड ऑयल का उपयोग रसोई और उद्योग दोनों में ज्यादा होता है।
अंतरराष्ट्रीय बाजारों का असर अभी सीमित
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी उतार‑चढ़ाव चल रहे हैं। मलेशिया पाम ऑयल एक्सचेंज ने दोपहर करीब साढ़े तीन बजे सुधार के साथ बंद किया, जबकि शिकॉगो एक्सचेंज में भी खाद्य तेलों के भाव में मजबूती बनी हुई है। आम तौर पर इन ग्लोबल संकेतों का असर भारतीय तेल‑तिलहन बाजार पर सीधे पड़ता है, लेकिन फिलहाल होली के कारण घरेलू बाजार सुस्त रहने की वजह से इसका खास प्रभाव नहीं दिखा।
व्यापारी अनुमान लगा रहे हैं कि त्योहार के बाद जब बाजार में सामान्य कारोबार शुरू होगा, तब अंतरराष्ट्रीय बाजारों की दिशा और घरेलू आवक‑मांग का मिला‑जुला असर साफ दिखेगा, और इसी के आधार पर अगले महीने के लिए खाद्य तेलों की दिशा तय होगी।
आम आदमी के लिए क्या मायने?
फिलहाल आम ग्राहक के लिए यह दृश्य है: ज्यादातर तेल अभी भी महंगे स्तर पर बने हुए हैं, लेकिन सरसों तेल में थोक स्तर पर थोड़ी नरमी आई है, जिससे रिटेल स्तर पर भी छोटी‑मोटी राहत की उम्मीद है। दिल्ली और एनसीआर जैसे शहरों में खुले घानी सरसों तेल की कीमत अभी लगभग 130–150 रुपये प्रति किलो तक देखी जा रही है, जबकि ब्रांडेड रिफाइंड तेल 170–220 रुपये प्रति किलो के बीच बिक रहा है।









