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Amazing Fact: दुनिया का इकलौता ऐसा देश जहां नहीं है एक भी गांव! जानिए कैसे चलता है इस अनोखे ‘नगर राज्य’ का शासन

सिंगापुर दुनिया का एकमात्र ऐसा देश है जहां एक भी गांव नहीं बचा- पूरी तरह शहरीकृत राष्ट्र। 728 वर्ग किमी में 59 लाख आबादी हाई-राइज अपार्टमेंट्स और इंडस्ट्रियल हब्स में रहती है। मछुआरों की बस्ती से एशिया का चमकता मोती बनने की प्रेरक कहानी।

By Pinki Negi

this country has no villages know how did it become a city state

कल्पना कीजिए एक ऐसा देश जहां न कच्चे घरों की बस्तियां हों, न खेतों-खलिहानों की सैर हो- सिर्फ चमचमाती इमारतें, हाईवे और हाई-टेक जीवन। दुनिया में ऐसा इकलौता राष्ट्र है सिंगापुर, जहां एक भी गांव नहीं बचा। 728 वर्ग किलोमीटर में बसा यह ‘सिटी-स्टेट’ पूरी तरह शहरीकृत है, जहां 59 लाख आबादी हाई-राइज अपार्टमेंट्स, इंडस्ट्रियल हब्स और ग्रीन स्पेस में रहती है। ज्यादातर देश ग्रामीण-शहरी मिश्रण पर टिके हैं, लेकिन सिंगापुर ने सीमित जमीन को चतुराई से इस्तेमाल कर खुद को एशिया का चमकता मोती बना लिया।

सिंगापुर की ऐतिहासिक जड़ें

यह अनोखी पहचान रातोंरात नहीं बनी। 19वीं सदी की शुरुआत में सिंगापुर मछुआरों की छोटी बस्ती था- लकड़ी के झोपड़े, टीन की छतें और मछली पकड़ने का जीवन। 1819 में ब्रिटिश अधिकारी सर स्टैमफोर्ड रैफल्स ने इसे मलय प्रायद्वीप के दक्षिण में व्यापारिक चौकी बनाया। प्रमुख समुद्री मार्गों पर रणनीतिक लोकेशन ने इसे सोने की चिड़िया बना दिया। स्वेज नहर के उद्घाटन (1869) के बाद यह यूरोप-एशिया का प्रमुख बंदरगाह बन गया, जिससे व्यापार, उद्योग और प्रवासी आबादी उमड़ी। 1867 में ब्रिटिश क्राउन कॉलोनी का दर्जा मिला तो विकास ने रफ्तार पकड़ी।

स्वतंत्रता के बाद शहरी क्रांति

1965 में मलेशिया से अलग होने के बाद सिंगापुर गरीबी, बेरोजगारी और सांप्रदायिक तनाव से जूझ रहा था। पहले प्रधानमंत्री ली कुआन येव ने ‘शहरीकरण की क्रांति’ शुरू की। देश की 100% आबादी को शहरीकरण का लक्ष्य रखा गया। 1970 के दशक तक यहां 200 से ज्यादा ‘काम्पोंग’ (मलय में गांव) थे- कच्चे घर, पशुपालन और खेती पर निर्भर जीवन। लेकिन सरकार ने इन्हें धीरे-धीरे हटाया।

HDB (हाउसिंग एंड डेवलपमेंट बोर्ड) ने सस्ते फ्लैट्स बनाए, जहां आज 80% आबादी रहती है। 1980 के दशक तक सभी काम्पोंग गायब- उनकी जगह आई मरीना बे, ऑर्किड, सेंटोसा जैसे आधुनिक इलाके। सिंगापुर का आखिरी गांव ‘काम्पोंग लोरोंग बुआंगकोक’ भी अब विलुप्ति के कगार पर है।

सीमित संसाधनों में चमत्कार

सीमित जमीन (फिलीपींस के एक राज्य जितनी) ने मजबूरी में चतुर प्लानिंग थोपी। कोई प्राकृतिक संसाधन नहीं, फिर भी GDP प्रति व्यक्ति $84,000 (दुनिया में टॉप)। चांगी एयरपोर्ट (विश्व का सर्वश्रेष्ठ), दुनिया का दूसरा सबसे व्यस्त पोर्ट और फाइनेंशियल हब ने इसे महाशक्ति बनाया। गार्डन्स बाय द बे, इंफिनिटी पूल और सुपरट्रीज पर्यटकों को लुभाते हैं। शहरीकरण ने वनों का 95% नुकसान किया, लेकिन अब ‘गार्डन सिटी’ विजन से 47% हरा-भरा क्षेत्र बहाल हो रहा है।

सख्त शासन का मॉडल

शासन की बात करें तो सिंगापुर संसदीय गणराज्य है। राष्ट्रपति सांकेतिक प्रमुख, प्रधानमंत्री (लॉरेंस वोंग) असल सत्ता चलाते हैं। 103 सदस्यीय संसद हर 5 साल चुनी जाती है। पीपुल्स एक्शन पार्टी (PAP) 1959 से सत्ता में- भ्रष्टाचार मुक्त (दुनिया में नंबर 1)। सख्त कानून हैं: च्युइंग गम बैन, जेबकतरी पर कोड़े, फाइनिंग सिस्टम। CCTV, स्मार्ट गवर्नेंस और मेरिटोक्रेसी से ‘एशियन टाइगर’ की उपाधि। कोई ग्रामीण प्रशासन नहीं- सब कुछ सेंट्रलाइज्ड, जैसे एक मेगासिटी।

वैश्विक प्रेरणा और सबक

यह मॉडल विकास का प्रतीक है। सीमित संसाधनों में नवाचार से सिंगापुर ने साबित किया कि इच्छाशक्ति से नामुमकिन संभव है। भारत जैसे देशों के लिए प्रेरणा- जहां 65% आबादी ग्रामीण है। लेकिन सिंगापुर की ‘काम्पोंग आत्मा’- भाईचारा, सादगी- आधुनिकता में कहीं खो गई। फिर भी, यह सिटी-स्टेट साबित करता है कि गांवों के बिना भी राष्ट्र चमक सकता है।

Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।