
आजकल सब्जी वाले से लेकर बड़े शॉपिंग मॉल तक, हर जगह हम स्मार्टफोन से ही पेमेंट करना पसंद करते हैं। डिजिटल लेनदेन ने जिंदगी आसान बना दी, लेकिन साइबर ठगी का साया हमेशा मंडराता रहता है। इसी आम आदमी की चिंता दूर करने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बड़ा कदम उठाया है। 1 अप्रैल 2026 से ऑनलाइन पेमेंट का पूरा सिस्टम बदल जाएगा। अब साइबर अपराधी आपकी गाढ़ी कमाई पर हाथ साफ नहीं कर पाएंगे।
2FA अनिवार्य: दोहरी सुरक्षा का जाल बिछेगा
RBI के नए निर्देशों के तहत UPI, कार्ड, नेट बैंकिंग, वॉलेट- हर ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के लिए टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) जरूरी होगा। आसान शब्दों में, पेमेंट कन्फर्म करने को दो सुरक्षा चरणों से गुजरना पड़ेगा- जैसे पासवर्ड, PIN, OTP या बायोमेट्रिक (फिंगरप्रिंट, फेस आईडी)। खास बात, इनमें एक ‘डायनामिक’ फैक्टर होना चाहिए, जो हर बार बदलता रहे। इससे एक जानकारी चुराने पर भी जालसाज अकाउंट से पैसे नहीं निकाल सकेगा। विदेशी ट्रांजेक्शन पर ये 1 अक्टूबर 2026 से लागू होंगे।
OTP पर भरोसा क्यों टूटा?
पिछले सालों डिजिटल पेमेंट्स में उछाल आया, लेकिन फिशिंग, OTP चोरी और अनधिकृत ट्रांजेक्शन के केस भी आसमान छूने लगे। RBI आंकड़ों के मुताबिक, 65% फ्रॉड इसी कमजोरी से होते हैं। सिर्फ SMS-OTP पर निर्भर सिस्टम अब पुराना पड़ गया, क्योंकि हैकर्स ने SIM स्वैपिंग जैसे नए हथकंडे अपना लिए। इसी खतरे को भांप RBI ने 2FA को मजबूत ढाल बनाया है।
फ्रॉड हुआ तो बैंक की जेब ढीली
सबसे राहत वाली बात- फ्रॉड में ग्राहक की जिम्मेदारी खत्म। अगर बैंक या फिनटेक की लापरवाही से नुकसान हो, तो पूरा पैसा वे लौटाएंगे। मार्च 2026 के ड्राफ्ट में छोटे फ्रॉड (₹50,000 तक) पर मुआवजा स्कीम है: RBI 65%, बैंक 20% कवर करेंगे (कुल 85% या अधिकतम ₹25,000)। ये 1 जुलाई 2026 से लागू हो सकता है। शर्त- फ्रॉड 5 दिनों में रिपोर्ट करें। देरी या ग्राहक गलती पर मुआवजा न मिले।
रिस्क-बेस्ड सिस्टम
हर पेमेंट पर सख्ती नहीं- रिस्क-बेस्ड ऑथेंटिकेशन से छोटे रोजमर्रा ट्रांजेक्शन आसान रहेंगे। बड़ी रकम या संदिग्ध गतिविधि पर अतिरिक्त जांच। बैंकों पर दबाव बढ़ेगा कि सिस्टम अभेद्य बनाएं। विशेषज्ञों का मानना है, इससे डिजिटल इंडिया को नई गति मिलेगी। फ्रॉड पर तुरंत 1930 हेल्पलाइन या साइबर पोर्टल रिपोर्ट करें। हमेशा 2FA अपनाएं। RBI का ये कदम उपभोक्ता सुरक्षा को मजबूत करेगा।









