
अगर आप अपनी बेटी के भविष्य को सुरक्षित और वित्तीय रूप से स्वतंत्र बनाना चाहते हैं, तो सरकार की सुकन्या समृद्धि योजना (Sukanya Samriddhi Yojana – SSY) आज भी निवेशकों के बीच सबसे भरोसेमंद ऑप्शन में से एक मानी जाती है। खासकर उन परिवारों के लिए जो बेटी की शादी, उच्च शिक्षा और व्यक्तिगत सुरक्षा के लिए लंबी अवधि का सुरक्षित निवेश चाहते हैं, वे SSY को लंबी उम्र तक बेहतर विकल्प मान रहे हैं। लेकिन इस बीच एक आम भ्रम यह रहता है कि अगर बेटी 10 साल की उम्र में खाता खुलवाया जाए, तो मैच्योरिटी का पैसा 21 साल की उम्र में मिलेगा या 31 साल की उम्र में?
मैच्योरिटी का सही नियम क्या है?
इस सवाल का साफ जवाब यह है कि सुकन्या समृद्धि योजना का मैच्योरिटी नियम बस “बेटी की उम्र” पर निर्भर नहीं है, बल्कि खाता कब खोला गया इस पर निर्भर करता है। दरअसल, SSY खाता खुलने की तारीख से 21 साल बाद मैच्योर होता है। यानी अगर आप बेटी के 10 साल की उम्र में खाता खोलते हैं, तो मैच्योरिटी तब होगी जब बेटी 31 साल की हो जाएगी (10 + 21 = 31)। इस तरह, अक्सर लोगों के मन में वही गलत धारणा बन जाती है कि बेटी 21 साल की होते‑होते पूरी राशि मिल जाएगी, जबकि ऐसा नहीं है।
15 साल जमा, 21 साल ब्याज कैलकुलेशन
एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि SSY में पूरे 21 साल तक पैसा जमा करना जरूरी नहीं। नियम के अनुसार, खाता खोलने की तारीख से पहले 15 साल तक ही निवेश करना अनिवार्य या अनुमत है। इसके बाद खाता जारी रहता है, लेकिन नई रकम जमा नहीं की जा सकती। इसका मतलब यह है कि पहले 15 साल में जो भी राशि आपने जमा की, उसपर अगले 6 साल तक भी ब्याज लगता रहता है, यानी खाता खोलने की तारीख से 21वें साल तक।
जब बेटी 31 साल की होगी तो कितना पैसा मिलेगा?
एक उदाहरण से यह गणित और भी साफ हो जाता है। मान लीजिए साल 2026 में आपकी बेटी 10 साल की है और आपने उसी साल ही SSY खाता खोला। अब मान लीजिए कि आप हर साल 1.5 लाख रुपये जमा करते हैं। पहले 15 साल तक कुल निवेश 1.5 लाख × 15 = 22.5 लाख रुपये होगा। जब बेटी 25 साल की होगी, तक आप जमा करना बंद कर देंगे, लेकिन खाता चलता रहेगा। फिर 2047 में, जब बेटी 31 साल की हो जाएगी, खाता मैच्योर हो जाएगा।
अगर औसतन 8.2% की ब्याज दर मान ली जाए, तो 22.5 लाख रुपये का निवेश बढ़कर लगभग 71.82 लाख रुपये के आस‑पास हो सकता है, जिसमें से करीब 49.32 लाख रुपये सिर्फ ब्याज होगा।
बीच में पैसा निकालने की सुविधा कैसे काम करती है?
इतना बड़ा ब्याज वापसी SSY को लंबी दूरी के निवेशकों के लिए खासा आकर्षक बनाती है, लेकिन साथ ही यह भी याद रखना जरूरी है कि योजना में बीच‑बीच में निकासी की भी सुविधा है। जब बेटी 18 साल की हो जाती है, तो उच्च शिक्षा या शादी के लिए पिछले साल के बैलेंस का 50% तक निकाला जा सकता है, बशर्ते जरूरी दस्तावेज जैसे पढ़ाई की फीस रसीद या शादी के प्रूफ दिए जाएं। इस तरह, पूरी राशि एक साथ नहीं, बल्कि जरूरत के हिसाब से भाग‑भाग कर निकाली जा सकती है।
SSY पर टैक्स लाभ क्या‑क्या हैं?
टैक्स के मामले में भी SSY आज बेहद फायदेमंद साबित हुई है। पुरानी टैक्स व्यवस्था के तहत निवेशक धारा 80C के तहत हर साल 1.5 लाख रुपये तक की टैक्स छूट प्राप्त कर सकते हैं। इसके अलावा, यह योजना “ट्रिपल ई” कैटेगरी में आती है, यानी निवेश की गई राशि, मिलने वाला ब्याज और मैच्योरिटी पर मिलने वाली पूरी राशि सभी टैक्स‑फ्री होती है। यही वजह है कि कई लोग बेटियों के लिए लंबी अवधि का निवेश तय करते समय SSY को जोखिम‑मुक्त और टैक्स‑आधारित योजनाओं में ऊपरी पसंद के तौर पर चुनते हैं।









