
जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हाल ही में दो अमेरिकी नागरिकों को सैटेलाइट फोन के साथ पकड़े जाने से सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मच गया। जेफरी स्कॉट प्राथर (मोंटाना निवासी) और हलदर कौशिक (भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिक, कोलकाता से) एयर इंडिया की फ्लाइट AI-1893 से दिल्ली जा रहे थे, जब सिक्योरिटी चेक में उनके बैग से ताइवान निर्मित गार्मिन सैटेलाइट GPS डिवाइस बरामद हो गया।
पुलिस ने तत्काल दोनों के खिलाफ FIR दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया। खुफिया एजेंसियां अब उनकी यात्रा इतिहास, फोन का स्रोत और जम्मू-कश्मीर में किसी संदिग्ध कॉल की जांच में जुटी हैं। यह घटना भारत में सैटेलाइट फोन के सख्त नियमों की याद दिलाती है, जहां बिना अनुमति रखना या इस्तेमाल करना सीधे जेल भेज सकता है।
सैटेलाइट फोन का छिपा खतरा
दिखने में साधारण वॉकी-टॉकी या वायरलेस सेट जैसे ये फोन वास्तव में राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा हैं। सामान्य मोबाइल फोन टेलीकॉम टावरों पर निर्भर होते हैं, जो नेटवर्क कवरेज वाले इलाकों तक सीमित रहते हैं। लेकिन सैटेलाइट फोन सीधे अंतरिक्ष के सैटेलाइट्स से जुड़ जाते हैं, जिससे वे समुद्र, रेगिस्तान, पहाड़ी क्षेत्रों या दूरदराज के जंगलों में भी बिना रुके काम करते हैं। यही उनकी ताकत है और खतरा भी।
आतंकवादी या देश-विरोधी तत्व इन्हें ट्रैकिंग से बचने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं, क्योंकि इनके सिग्नल आम मोबाइल नेटवर्क से बाहर होते हैं। ट्रैकिंग मुश्किल होने के बावजूद, एयरपोर्ट स्कैनर और खुफिया निगरानी से ये पकड़े जाते हैं।
कानूनी पाबंदी का आधार
भारत सरकार ने देश की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए इन पर पूर्ण पाबंदी जरी रखी है। भारतीय वायरलेस टेलीग्राफी अधिनियम, 1933 की धारा 3 और 6 स्पष्ट कहती हैं कि बिना लाइसेंस के कोई वायरलेस टेलीग्राफी उपकरण रखना या चलाना अवैध है। टेलीकॉम्युनिकेशन एक्ट 2023 ने इसे और सख्त कर दिया। दूरसंचार विभाग (DoT) से NOC या लाइसेंस के बिना Thuraya, Iridium या Garmin जैसे विदेशी सैटेलाइट फोनों का इस्तेमाल दंडनीय अपराध है।
केवल BSNL की सैटेलाइट सेवाओं को विशेष परिस्थितियों में अनुमति मिलती है, वो भी सरकारी एजेंसियों, सेना या आपदा प्रबंधन के लिए। आम नागरिक, पर्यटक या विदेशी- कोई अपवाद नहीं।
फोन की आसान पहचान
पहचानना भी आसान है। इनमें बड़ा बाहरी एंटीना होता है, जो सैटेलाइट को सीधा सिग्नल भेजने के लिए जरूरी है। ये आम स्मार्टफोनों से भारी और मजबूत होते हैं, अक्सर काले या सैन्य ग्रेड डिजाइन में। अगर कहीं ऐसा डिवाइस दिखे, तो तुरंत पुलिस को सूचित करें। विदेशी यात्रियों के लिए DGCA ने एयरलाइंस को निर्देश दिए हैं कि सभी उड़ानों में घोषणा हो- सैटेलाइट फोन प्रतिबंधित है। ब्रिटेन और अमेरिका की ट्रैवल एडवाइजरी में भी चेतावनी है: बिना DoT अनुमति के लाना जेल या जुर्माना सुनिश्चित। सऊदी अधिकारी को इसी कानून के तहत कुछ दिनों की सजा मिल चुकी है।
सजा का कड़ा प्रावधान
उल्लंघन की सजा कड़ी है। उपकरण जब्ती, भारी जुर्माना और तीन साल तक की जेल- किसी को छूट नहीं। श्रीनगर मामले में दोनों अमेरिकियों को रिमांड पर लिया गया है, उनकी मंशा और संपर्कों की गहन जांच चल रही है। क्या ये जासूसी से जुड़े थे या महज लापरवाही? जवाब मिलने पर बड़ा खुलासा हो सकता है। सरकार ने जागरूकता अभियान तेज कर दिया है, खासकर सीमावर्ती इलाकों में।
अंतिम सलाह
निष्कर्षतः, सैटेलाइट फोन का लालच न करें। भारत यात्रा पर सामान्य फोन ही काफी। DoT वेबसाइट या दूतावास से पहले जांच लें। एक छोटी गलती पूरी यात्रा बर्बाद कर सकती है। सुरक्षा पहले, सावधानी हमेशा।









