Tags

सावधान! 1 अप्रैल से पेट्रोल-डीजल का संकट? रूस के बड़े फैसले से दुनिया भर में मची खलबली

रूस ने 1 अप्रैल 2026 से पेट्रोल (गैसोलीन) के निर्यात पर चार महीने तक प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है, ताकि घरेलू बाज़ार में आपूर्ति स्थिर रहे और कीमतें न बढ़ें। इरान–इज़राइल तनाव के बीच यह कदम वैश्विक तेल बाज़ार में दबाव बढ़ा सकता है, लेकिन भारत की तरफ से स्थिति अभी नियंत्रण में बताई जा रही है।

By Pinki Negi

russia gasoline export ban impact petrol price

रूस ने शुक्रवार को पेट्रोल (गैसोलीन) के निर्यात पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है, जो 1 अप्रूल 2026 से लागू हो जाएगा। रूसी सरकार की तरफ से 28 मार्च को जारी जानकारी में कहा गया है कि यह कदम घरेलू बाज़ार में पेट्रोल की स्थिर आपूर्ति बनाए रखने और कीमतों को नियंत्रित रखने के उद्देश्य से लिया गया है।

उप प्रधानमंत्री अलेक्सांदर नोवाक की अगुवाई वाली ऊर्जा समीक्षा बैठक के बाद यह फैसला लिया गया, जिसमें देश के उर्जा मंत्रालय को एक ड्राफ्ट आदेश तैयार करने का निर्देश दिया गया ताकि 1 अप्रैल से गैसोलीन निर्यात पर सख्त रोक लगाई जा सके। राज्य‑स्वामित्व वाली समाचार एजेंसी TASS की रिपोर्ट के अनुसार यह प्रतिबंध 31 जुलाई 2026 तक यानी लगभग चार महीने तक बना रह सकता है।

ईरान युद्ध और तेल की बढ़ती कीमतें

रूस का यह कदम मध्य पूर्व में इरान–इज़राइल संघर्ष के बीच लिया गया है, जिसकी वजह से वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतें लहराती रह रही हैं। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार रूस प्रतिदिन लगभग 1 लाख बैरल पेट्रोल निर्यात करता था, जो दुनिया की कुल आपूर्ति का छोटा, लेकिन नाटकीय रूप से महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

नोवाक का कहना है कि मध्य पूर्व संकट के कारण वैश्विक ऊर्जा बाज़ार में भारी उतार‑चढ़ाव देखा जा रहा है, ऐसे में घरेलू बाज़ार में ईंधन की कमी या कीमत छलांग से बचने के लिए यह कदम ज़रूरी है। रूस ने पिछले संस्करणों में भी अस्थायी रूप से पेट्रोल निर्यात पर रोक लगाई थी, जो बाद में उठा दी गई थी।

रूस के भीतर ईंधन की स्थिति

रूस के उर्जा मंत्रालय के अनुसार, देश की रिफाइनिंग दरें मार्च 2025 के स्तर पर बनी हुई हैं और पेट्रोल–डीजल के भंडार पर्याप्त हैं। मंत्रालय की जानकारी के अनुसार सभी प्रमुख रिफाइनरी तकरीबन पूरी क्षमता के साथ चल रही हैं, जिससे घरेलू डिमांड पूरी होने की संभावना ज़्यादा है। हालाँकि, पिछले साल कई रूसी क्षेत्रों में गैसोलीन की कमी की खबरें आई थीं, जिन्हें देखते हुए सरकार ने अब निर्यात पर रोक लगाने का फैसला लिया है।

दुनिया के किन देशों को सबसे ज़्यादा झटका?

विशेषज्ञ मानते हैं कि रूस के इस फैसले का सबसे ज़्यादा असर उन देशों पर पड़ सकता है, जो रूसी पेट्रोलियम उत्पादों पर निर्भर हैं। इनमें चीन, तुर्की, ब्राज़ील, कुछ अफ्रीकी देश और सिंगापुर जैसे रिफाइनिंग हब शामिल हैं। अगर इन देशों को रूसी पेट्रोल की जगह अन्य बाज़ारों से ईंधन खरीदना पड़ता है, तो यह वैश्विक तेल–कीमतों को और उठा सकता है।

हालाँकि, रूस के पेट्रोल निर्यात का दुनिया की कुल आपूर्ति में हिस्सा अपेक्षाकृत छोटा है, लेकिन जब बाज़ार पहले ही इरान युद्ध और सप्लाई‑चेन उथल‑पुथल की वजह से तनाव में हो, तो किसी भी बड़े खिलाड़ी के निकल जाने से हलचल तेज़ हो जाती है।

भारत की स्थिति: “संकट” नहीं, बल्कि निगरानी

भारत की तरफ से शुक्रवार को ही पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने स्थिति स्पष्ट की है कि देश में अभी कच्चे तेल, पेट्रोल और डीजल के भंडार पर्याप्त हैं। एक ज्वाइंट ब्रीफिंग में ज्वाइंट सचिव सुजाता शर्मा ने बताया कि रिफाइनरी तकरीबन पूरी क्षमता के साथ काम कर रही हैं और ईंधन की आपूर्ति अगले दो महीनों तक सुनिश्चित की गई है।

सरकार ने रिफाइनरियों को एलपीजी उत्पादन 20 प्रतिशत तक बढ़ाने का निर्देश भी दिया है, ताकि वैश्विक तनाव के बीच घरेलू ऊर्जा बाज़ार और स्थिर रहे। भारत ज़्यादातर कच्चा तेल ही रूस से खरीदता है, न कि पेट्रोल–डीजल सीधे रिफाइंड फॉर्म में; इसलिए रूस के गैसोलीन निर्यात बैन का भारत पर सीधा झटका सीमित है, लेकिन अगर क्रूड ऑयल की कीमतें लगातार बढ़ती रहीं, तो आम नागरिक को अप्रत्यक्ष रूप से ऊँची ईंधन कीमतों का झटका ज़रूर झेलना पड़ सकता है।

एक्सपर्ट्स का कहना है कि भारत सरकार अगर एक्साइज ड्यूटी और अन्य टैक्स‑स्लैब में समायोजन रखे, तो आम आदमी तक रूस के यह फैसले का असर न्यूनतम रह सकता है, लेकिन पूरी दुनिया के लिए यह संकेत है कि यूक्रेन युद्ध के बाद भी रूस अपने ऊर्जा‑निर्यात को रणनीतिक रूप से कंट्रोल करने को तैयार है।

Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

अभी-अभी मोदी का ऐलान

हमारे Whatsaap ग्रुप से जुड़ें