
देश में तेजी से बढ़ते ऑनलाइन बैंकिंग फ्रॉड के मामलों के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ग्राहकों को राहत देने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठानе को तैयार है। केंद्रीय बैंक ने एक नया ड्राफेट नियम जारी किया है, जिसके तहत यदि किसी ग्राहक को इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग फ्रॉड के कारण 50,000 रुपये तक का नुकसान होता है, तो उसे आंशिक मुआवजा दिया जा सकेगा। यह कदम डिजिटल युग में बढ़ते साइबर धोखाधड़ी के दौर में लाखों ग्राहकों के लिए राहत का सबूत है।
RBI और बैंक साझा करेंगे जिम्मेदारी
RBI के प्रस्ताव के अनुसार, यदि फ्रॉड बैंक की लापरवाही या किसी तृतीय पक्षीय सुरक्षा उल्लंघन (third-party breach) के कारण हुआ है, तो ग्राहक पर कोई जिम्मेदारी नहीं डाली जाएगी। ऐसे मामलों में ग्राहक को पूरा पैसा वापस मिल सकता है और संबंधित लेनदेन को रद्द किया जा सकता है। केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट किया है कि ग्राहक की लापरवाही साबित करने की जिम्मेदारी बैंक की होगी। यानी, बैंक को यह साबित करना होगा कि फ्रॉड में ग्राहक की लापरवाही शामिल थी।
मुआवजे का सूत्र: 85% या 25 हजार
प्रस्ताव के अनुसार, ऐसे मामलों में ग्राहक को नुकसान की 85 प्रतिशत राशि या अधिकतम 25,000 रुपये (जो भी कम हो) तक का मुआवजा दिया जा सकेगा। RBI ने इस ड्राफ्ट में मुआवजा बांटने का एक खास सूत्र भी प्रस्तुत किया है। यदि नुकसान 29,412 रुपये से कम है, तो ग्राहक को 85 प्रतिशत मुआवजा मिलेगा। इसमें से 65 प्रतिशत राशि RBI देगा, जबकि ग्राहक का बैंक और जिस बैंक में पैसा गया है, वह 10-10 प्रतिशत हिस्सा देंगे। वहीं, यदि नुकसान 29,412 रुपये से 50 हजार रुपये के बीच है, तो RBI 19,118 रुपये देगा, जबकि ग्राहक का बैंक और लाभार्थी बैंक 2,941 रुपये, 2,941 रुपये का योगदान करेंगे।
कब से लागू होंगे नए नियम?
RBI के ड्राफ्ट के मुताबिक, यह नियम 1 जुलाई 2026 से होने वाले इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग लेनदेन पर लागू किए जा सकते हैं। केंद्र बैंक ने इस प्रस्ताव पर 6 अप्रैल 2026 तक हितगों से सुझाव और टिप्पणियां मांगी हैं। RBI के आंकड़ों के अनुसार, देश में होने वाले करीब 65 प्रतिशत बैंकिंग फ्रॉड 50 हजार रुपये से कम रकम के होते हैं। इसी वजह से यह नया ढांचा छोटे लेकिन आम फ्रॉड मामलों में ग्राहकों को राहत देने के लिए तैयार किया गया है।
शिकायत और जांच की प्रक्रिया
यदि किसी ग्राहक के साथ ऑनलाइन बैंकिंग फ्रॉड होता है, तो उसे पांच दिन के भीतर दो जगह शिकायत दर्ज करनी होगी। पहली शिकायत अपने बैंक में और दूसरी नेशनल साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर करनी होगी। इसके बाद बैंक को शिकायत मिलने के 30 दिन के भीतर मामले की जांच कर ग्राहक को जवाब देना होगा और यह तय करना होगा कि जिम्मेदारी किसकी है। बैंक को शिकायत मिलने के 30 दिन के भीतर मामले की जांच कर ग्राहक को जवाब देना होगा और यह तय करना होगा कि जिम्मेदारी किस की है।
भविष्य की दिशा
केंद्र बैंक ने कहा है कि यह मुआवजा व्यवस्था लागू होने की तारीख से एक साल तक प्रभावी रहेगी। इसके बाद इसकी समीक्षा की जाएगी। भविष्य में योजना यह है कि धीरे-धीरे बैंकों की हिस्सेदारी बढ़ाई जाए और RBI का योगदान कम या खत्म किया जाए। RBI ने इस ड्राफ्ट में लापरवाही की परिभाषा भी स्पष्ट की है।









