
भारत में डिजिटल पेमेंट्स की दुनिया तेजी से बदल रही है। आरबीआई ने ई-मैंडेट फ्रेमवर्क को मजबूत करने के लिए नए समेकित दिशानिर्देश जारी किए हैं, जो ऑटो-डेबिट और रेकरिंग पेमेंट्स को सुरक्षित और सुगम बनाते हैं। भारत में डिजिटल ट्रांजेक्शन्स की संख्या 2025 में 140 बिलियन को पार कर चुकी है, लेकिन फ्रॉड के मामले भी बढ़े हैं। इसी को देखते हुए आरबीआई ने 21 अप्रैल 2026 को ई-मैंडेट पर कंसोलिडेटेड गाइडलाइंस जारी कीं, जो क्रेडिट/डेबिट कार्ड, UPI, PPI और क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट्स पर लागू होती हैं।
पहली ट्रांजेक्शन हमेशा AFA (अतिरिक्त फैक्टर ऑफ ऑथेंटिकेशन जैसे OTP) के साथ वैलिडेट होनी चाहिए, उसके बाद ₹15,000 तक के सब्सिक्वेंट पेमेंट्स बिना अतिरिक्त OTP के हो सकते हैं। इससे पहले यह लिमिट ₹5,000 थी, जो अब बढ़ाकर ₹15,000 कर दी गई है।
₹15,000 की लिमिट का मतलब
₹15,000 से कम के रेकरिंग पेमेंट्स- जैसे OTT सब्सक्रिप्शन, बिजली बिल या छोटे बीमा प्रीमियम- अब स्मूथली ऑटो-डेबिट हो सकेंगे, बिना हर बार OTP मांगने के। लेकिन ₹15,000 से ऊपर के किसी भी ई-मैंडेट ट्रांजेक्शन के लिए AFA जरूरी रहेगा, ताकि ग्राहक की सहमति सुनिश्चित हो।
विशेष मामलों में छूट है: इंश्योरेंस प्रीमियम, म्यूचुअल फंड SIP और क्रेडिट कार्ड बिल के लिए ₹1 लाख तक बिना अतिरिक्त OTP के पेमेंट हो सकता है। हर ई-मैंडेट की वैलिडिटी पीरियड तय होगी, और ग्राहक इसे कभी भी मॉडिफाई या कैंसल कर सकेंगे।
24 घंटे का पूर्व-अलर्ट अनिवार्य
बैंकों को हर ऑटो-डेबिट से कम से कम 24 घंटे पहले SMS या ईमेल से ग्राहक को नोटिफाई करना होगा- ट्रांजेक्शन अमाउंट, डेट, मर्चेंट डिटेल्स के साथ। इससे ग्राहक अनचाहे डेबिट रोक सकेंगे या बैलेंस चेक कर सकेंगे। ई-मैंडेट रजिस्ट्रेशन के दौरान ही यह सुविधा स्पष्ट बतानी होगी। ग्राहकों को ई-मैंडेट मैनेजमेंट पोर्टल मिलेगा, जहां वे सभी एक्टिव मंडेट्स देख, एडिट या डिलीट कर सकेंगे।
ग्राहकों और बैंकों पर असर
ये नियम डिजिटल पेमेंट्स को तेज बनाते हैं- SIPs, EMI, सब्सक्रिप्शन्स अब फेल कम होंगे। लेकिन हाई-वैल्यू ट्रांजेक्शन्स पर सिक्योरिटी बढ़ेगी, फ्रॉड से बचाव होगा। बैंकों को ई-मैंडेट सर्विस के लिए ग्राहकों से कोई चार्ज नहीं वसूलना। पुराने मंडेट्स को नए फ्रेमवर्क में माइग्रेट करना होगा। UPI ऑटोपे जैसे फीचर्स में भी यह लागू होगा, जहां स्टैंडर्ड लिमिट ₹15,000 और एनहांस्ड ₹1 लाख है।
आरबीआई का यह कदम डिजिटल इंडिया को सिक्योर बनाता है, खासकर जब ट्रांजेक्शन्स 2026 में 200 बिलियन के पार पहुंचने की उम्मीद है। ग्राहकों को अपने बैंक ऐप चेक करना चाहिए और अनावश्यक मंडेट्स रद्द कर लेने चाहिए। इससे न केवल सुविधा बढ़ेगी, बल्कि वित्तीय साक्षरता भी।









