
ट्रेन से सफर करने वाले लाखों यात्रियों के लिए भारतीय रेलवे स्टेशनों पर क्लोक रूम और लॉकर सुविधा वरदान साबित हो रही है। क्या आप भी ट्रेन पकड़ने के लिए घंटों पहले स्टेशन पहुंचते हैं और भारी सामान ढोते-ढोते परेशान हो जाते हैं? अगर हां, तो यह सुविधा आपके लिए खासतौर पर उपयोगी है। प्रमुख स्टेशनों जैसे दिल्ली, गोरखपुर, गाजियाबाद और टाटानगर पर उपलब्ध यह सर्विस यात्रियों को अपना सामान सुरक्षित रखकर शहर घूमने या अन्य काम निपटाने की आजादी देती है।
लेकिन इसकी शर्तें सख्त हैं- वैध टिकट अनिवार्य, ताला जरूरी और वजन सीमा का पालन। हाल के अपडेट्स के मुताबिक, डिजिटल लॉकर और स्मार्ट सिस्टम से प्रक्रिया आसान हुई है, मगर किराया भी बढ़ा है।
क्लोक रूम जमा करने की सरल प्रक्रिया
क्लोक रूम की प्रक्रिया बेहद सरल रखी गई है। यात्री को सबसे पहले अपना बैग, सूटकेस या ट्रैवल बैग अच्छी तरह लॉक करना होता है। अनलॉक सामान को रेलवे कर्मचारी अस्वीकार कर सकते हैं, क्योंकि यह सुरक्षा के लिहाज से जोखिम भरा है। सामान जमा करने पर कर्मचारी वजन जांचते हैं – स्लीपर क्लास के लिए अधिकतम 40 किलो, एसी के लिए 50-70 किलो तक सीमा है।
उसके बाद रसीद जारी होती है, जिसमें टैग नंबर, जमा समय और शुल्क दर्ज होता है। यह रसीद आपका सबसे बड़ा प्रमाण है; बिना इसके सामान वापस नहीं मिलेगा। क्लोक रूम स्टेशन के मजबूत स्ट्रॉन्ग रूम में होता है, जहां 24 घंटे निगरानी रहती है। अधिकतम 7 से 30 दिनों तक सामान रखा जा सकता है, लेकिन समय पर न लेने पर नीलामी का खतरा रहता है।
अपडेटेड किराया संरचना
किराए की बात करें तो क्लोक रूम में पहले 24 घंटे के लिए प्रति पैकेट 15 रुपये लगते हैं, जबकि प्रत्येक अतिरिक्त 24 घंटे पर 20 रुपये। पहले यह 10 रुपये था, लेकिन 2018 से बढ़ोतरी हुई। लॉकर में बदलाव ज्यादा दिलचस्प हैं। पारंपरिक लॉकर पहले 24 घंटे 20 रुपये और अतिरिक्त पर 30 रुपये लेते थे। लेकिन 2025 से शुरू स्मार्ट लॉकर साइज आधारित हैं – स्मॉल के लिए 20 रुपये प्रति घंटा, मीडियम 30 रुपये, लार्ज या एक्स्ट्रा लार्ज 40 रुपये (1-6 घंटे तक)।
टाटानगर जैसे स्टेशनों पर डिजिटल लॉकर मोबाइल OTP और ऑनलाइन पेमेंट से काम करते हैं, जहां लार्ज सामान के लिए 1 घंटे का शुल्क 23.6 रुपये तक है। गोरखपुर में हाल ही डिजिटल लॉकर सेवा शुरू हुई, जो यात्रियों को तुरंत पहुंच देती है। डीआरएम को स्थानीय स्तर पर किराया बढ़ाने का अधिकार है, इसलिए स्टेशनवार थोड़ा अंतर हो सकता है।
सख्त नियम: इनका पालन अनिवार्य
कुछ जरूरी नियमों का पालन न करने पर सुविधा से वंचित होना पड़ सकता है। वैध टिकट या PNR नंबर दिखाना अनिवार्य है; बिना टिकट वालों का सामान जमा नहीं होता। खतरनाक वस्तुएं जैसे विस्फोटक, बदबूदार सामान, जल्दी खराब होने वाली चीजें या मादक पदार्थ प्रतिबंधित हैं। सामान पर ताला न होने या वजन अधिक होने पर जुर्माना लग सकता है। डिजिटल लॉकर में ऐप या स्क्रीन पर डिटेल भरकर QR कोड जेनरेट होता है। रसीद हमेशा संभालें और समय सीमा का ध्यान रखें – ओवरटाइम पर दोगुना शुल्क लग सकता है।
सामान चोरी होने पर तुरंत कार्रवाई
अगर ट्रेन में या क्लोक रूम से सामान चोरी हो जाए तो घबराएं नहीं। तुरंत TTE, कोच अटेंडेंट, गार्ड या RPF को सूचित करें। उनके पास शिकायत फॉर्म उपलब्ध होता है, जिसे भरकर अगले स्टेशन पर GRP को भेजा जाता है। Rail Madad ऐप, 139 हेल्पलाइन या RPF पोस्ट पर ऑनलाइन FIR दर्ज कराएं। यह प्रक्रिया यात्रा बीच में रोकने की जरूरत नहीं पड़ने देती। रेलवे मुआवजा भी दे सकता है, बशर्ते शिकायत तुरंत दर्ज हो।
जागरूकता से बनाएं सफर आसान
कुल मिलाकर, यह सुविधा रेल यात्रियों की राह आसान बनाती है, खासकर मेरठ, दिल्ली जैसे उत्तर भारत के स्टेशनों पर। लेकिन जागरूकता जरूरी है – लॉक करें, रसीद रखें, नियम पालें। अपडेटेड जानकारी के लिए स्टेशन इंक्वायरी या IRCTC ऐप चेक करें। बेफिक्र घूमें, लेकिन सावधानी बरतें।









