
भारतीय रेलवे ने यात्रियों की बढ़ती मांग को देखते हुए एक महत्वपूर्ण कदम उठाने का फैसला किया है। पश्चिम मध्य रेलवे (WCR) जोन ने लंबे समय से ‘स्पेशल’ श्रेणी में चल रही छह प्रमुख ट्रेनों को नियमित एक्सप्रेस ट्रेनों में परिवर्तित करने का प्रस्ताव रेलवे बोर्ड को भेज दिया है। यदि यह प्रस्ताव जुलाई 2026 तक मंजूर हो जाता है, तो इन ट्रेनों पर लगने वाला अतिरिक्त स्पेशल चार्ज समाप्त हो जाएगा, जिससे यात्रियों के टिकटों की कीमतों में 10 से 150 रुपये तक की कमी आ जाएगी। यह बदलाव विशेष रूप से दैनिक कम्यूटर्स, नौकरीपेशा लोगों, छात्रों और लंबी दूरी के यात्रियों के लिए वरदान साबित होगा।
प्रस्ताव का उद्देश्य और लाभ
पश्चिम मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी हर्षित श्रीवास्तव ने बताया कि जोन का लक्ष्य अधिक से अधिक स्पेशल ट्रेनों को स्थायी श्रेणी में लाना है, ताकि यात्रियों को सस्ती और विश्वसनीय सेवाएं मिल सकें। वर्तमान में ये ट्रेनें स्पेशल होने के कारण महंगे किराए और अनियमित समयसूची का शिकार हैं, लेकिन नियमित होने पर इनका संचालन तय समय पर होगा। इससे न केवल भीड़भाड़ कम होगी, बल्कि ट्रेनों की पाबंदी भी बढ़ेगी।
उदाहरण के लिए, जनरल श्रेणी में जहां स्पेशल ट्रेन का किराया 170-190 रुपये है, वहीं नियमित में यह 150-160 रुपये तक सस्ता हो जाएगा। इसी तरह स्लीपर में 360-390 से घटकर 320-340, थर्ड एसी में 950-1050 से 850-920, और सेकंड एसी में 1350-1450 से 1200-1300 रुपये रह जाएगा। 500 किलोमीटर तक की दूरी पर यह छूट यात्रियों की जेब पर भारी बोझ कम करेगी।
ट्रेनों की पूरी सूची
इन छह ट्रेनों में RKMP-अगरतला-RKMP (01665-01666), जबलपुर-पुणे-जबलपुर (02131-02132), जबलपुर-कोयंबटूर-जबलपुर (02197-02198), रीवा-सीएसएमटी-रीवा (02187-02188), जबलपुर-हावड़ा-जबलपुर (01701-01702) और जबलपुर-बांद्रा-जबलपुर (02133-02134) शामिल हैं। भोपाल से गुजरने वाली आरकेएमपी-अगरतला और जबलपुर-बांद्रा जैसी ट्रेनें पूर्वोत्तर, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और मुंबई को जोड़ती हैं।
ये रूट व्यस्ततम हैं, जहां रोजाना हजारों यात्री सफर करते हैं। नियमित होने से बुकिंग आसान होगी और वेटलिस्टिंग की समस्या घरेगी। बिहार के पटना-गया रूट पर हाल ही में शुरू हुई छह स्पेशल ट्रेनों (03656/03655, 05553/05554, 03668/03667) की तर्ज पर यह कदम भीड़ प्रबंधन का हिस्सा है, जो 30 सितंबर 2025 तक चल रही हैं और 50 हजार यात्रियों को लाभ पहुंचा रही हैं।
रूट पर ट्रैफिक का दबाव
यह फैसला तब आया है जब बीना-भोपाल-इटारसी का 280 किलोमीटर लंबा ट्रैक अपनी क्षमता से 50 प्रतिशत अधिक (150 प्रतिशत लोड) पर दबाव झेल रहा है। यहां रोजाना 260 यात्री ट्रेनें और 150 मालगाड़ियां गुजरती हैं, जिससे देरी, सिग्नल फेलियर और लेटलतीफी आम हो गई है। राहत की बात यह है कि केंद्र सरकार ने इस कॉरिडोर पर 237 किमी चौथी रेल लाइन के लिए 4,329 करोड़ रुपये की परियोजना को मंजूरी दे दी है।
सर्वे पूरा हो चुका है और 2025 में काम शुरू होने से ट्रेनें 160-220 किमी/घंटा की रफ्तार पकड़ सकेंगी। तीन साल में पूरा होने वाला यह प्रोजेक्ट सफर को 2-2.5 घंटे छोटा कर देगा, जिससे इन स्पेशल ट्रेनों का संचालन और सुगम होगा।
अन्य रेलवे योजनाएं
रेलवे की यह पहल डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने वाली 3 प्रतिशत छूट (रेलवन ऐप पर, 14 जुलाई 2026 तक) से जुड़ती है, जो अनारक्षित टिकटों पर 150 रुपये तक की बचत दे रही है। छात्रों को मुफ्त मासिक सीजन टिकट (MST) भी उपलब्ध है। जनवरी-फरवरी 2026 में 20-20 नई स्पेशल ट्रेनें शुरू हो चुकी हैं। कुल मिलाकर, रेलवे यात्रियों की ‘मौज’ बढ़ाने को प्रतिबद्ध दिख रहा है, लेकिन जुलाई का इंतजार यात्रियों को सस्ते और नियमित सफर की उम्मीद बांधे हुए है। (









