
भारतीय रेलवे अपने करोड़ों यात्रियों के लिए सफर को सिर्फ ‘स्टेशन तक’ नहीं, बल्कि घर के दरवाजे तक आरामदायक बनाने की तैयारी में है। ‘रेल वन’ (RailOne) सुपर ऐप के जरिए अब यात्रियों को ट्रेन से उतरने के बाद ऑटो‑टैक्सी ढूंढने की भागदौड़ से छुटकारा मिलने वाला है। इस नई व्यवस्था के तहत रेलवे का फोकस लास्ट‑माइल कनेक्टिविटी पर है, ताकि टिकट बुकिंग से लेकर घर पहुंचने तक पूरी यात्रा एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म से मैनेज हो सके।
ट्रेन टिकट के साथ ही कन्फर्म टैक्सी
नई सुविधा के तहत जब यात्री ‘रेल वन’ ऐप पर अपना ट्रेन टिकट बुक करेंगे, उसी समय उन्हें अपने अंतिम गंतव्य तक पहुंचने के लिए टैक्सी बुक करने का विकल्प भी मिलेगा। ऐप पर जैसे ही आप यात्रा की डिटेल्स भरेंगे, उसी फ्लो में आगे ‘स्टेशन से घर’ या ‘घर से स्टेशन’ की टैक्सी सर्विस का ऑप्शन दिखाई देगा। यात्री यहां अपना पूरा पता या लोकेशन दर्ज कर प्री‑बुकिंग कर सकेंगे, जिससे ट्रेन के स्टेशन पर पहुंचते ही पहले से कन्फर्म टैक्सी तय पॉइंट पर तैयार मिलेगी। इससे खास तौर पर रात में लेट पहुंचने वाले, परिवार के साथ यात्रा करने वाले और भारी‑भरकम सामान ले जाने वाले यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी।
‘भारत टैक्सी’ के साथ साझेदारी
इस डोर‑टू‑डोर कनेक्टिविटी के लिए भारतीय रेलवे ने ‘भारत टैक्सी’ के साथ साझेदारी की तैयारी की है। यह कंपनी ऐप‑आधारित टैक्सी सर्विस मुहैया कराती है और अब इसकी सेवाओं को ‘रेल वन’ के साथ इंटीग्रेट किया जा रहा है। इसका मतलब यह है कि रेलवे खुद गाड़ियां ऑपरेट नहीं करेगा, बल्कि एक प्राइवेट ऑपरेटर के साथ मिलकर यात्रियों को संगठित, ऐप‑बेस्ड टैक्सी नेटवर्क उपलब्ध कराएगा। इससे राइड ट्रैकिंग, ड्राइवर डिटेल्स, डिजिटल पेमेंट और फीडबैक जैसी सुविधाएं भी यात्रियों को मिल सकेंगी, जैसा कि वे दूसरे ऐप‑बेस्ड कैब प्लेटफॉर्म पर देखते हैं।
यात्रियों के लिए बड़े फायदे
इस नई सुविधा के कई सीधे लाभ यात्रियों तक पहुंचेंगे।
- समय की बचत: स्टेशन के बाहर निकलकर अलग से ऑटो या टैक्सी तलाशने में लगने वाला समय बचेगा, खासकर भीड़ वाले बड़े जंक्शनों पर।
- सुरक्षा में बढ़ोतरी: महिलाओं, बुजुर्गों, बच्चों और परिवार के साथ यात्रा करने वालों के लिए यह सेवा ज्यादा सुरक्षित और भरोसेमंद मानी जा रही है, क्योंकि ड्राइवर व वाहन की जानकारी पहले से रिकॉर्ड में होगी।
- किराए पर नियंत्रण: नए शहरों में अनजान यात्रियों से अक्सर मनमाना किराया वसूला जाता है। प्री‑बुकींग के साथ अनुमानित किराया पहले से पता रहेगा, जिससे मोलभाव और ओवरचार्जिंग की समस्या काफी हद तक खत्म हो सकती है।
- तनाव‑मुक्त यात्रा: यात्रियों को परिजनों या परिचितों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा कि कोई उन्हें स्टेशन से लेने आए। नौकरी‑पेशा लोगों, छात्रों और अकेले यात्रा करने वालों के लिए यह सुविधा खासतौर से उपयोगी साबित हो सकती है।
‘रेल वन’ ऐप की तेज़ रफ्तार सफलता
केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 1 जुलाई 2025 को ‘रेल वन’ ऐप लॉन्च किया था। बेहद कम समय में यह ऐप भारतीय रेलवे का सबसे अहम डिजिटल प्लेटफॉर्म बनकर उभरा है। लॉन्च के केवल 8 महीनों के भीतर इसे 2 करोड़ से अधिक बार डाउनलोड किया जा चुका है, जो रेलवे के डिजिटल ट्रांजिशन की रफ्तार को दिखाता है। वर्तमान में ‘रेल वन’ रोजाना करीब 6 लाख बुकिंग संभालने की क्षमता रखता है और रिज़र्व टिकट, अनरिज़र्व टिकट, प्लेटफॉर्म टिकट, लाइव ट्रेन स्टेटस, कैटरिंग और शिकायत दर्ज कराने जैसी कई सेवाएं एक ही जगह उपलब्ध कराता है।
टैक्सी बुकिंग की नई सुविधा जुड़ने के बाद यह ऐप सचमुच ‘वन‑स्टॉप ट्रैवल सॉल्यूशन’ के रूप में स्थापित होता दिख रहा है, जहां यात्री टिकट से लेकर घर तक पहुंचने की पूरी योजना एक ही एप्लिकेशन के माध्यम से बना सकेंगे।









