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Fuel Crisis Rumors: पेट्रोल पंपों पर लंबी लाइनें! 29 अप्रैल से पहले लोग क्यों भरवा रहे हैं तेल? जानें भारत के पास कितना बचा है स्टॉक

देशभर के पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें और 13% डिमांड उछाल के बीच मिडिल ईस्ट युद्ध की अफवाहें पैनिक बाइंग को हवा दे रही हैं। सरकार दावा कर रही है 60-74 दिनों का स्टॉक सुरक्षित, लेकिन 25-28 रुपये दाम वृद्धि का डर बरकरार।

By Pinki Negi

Fuel Crisis Rumors: पेट्रोल पंपों पर लंबी लाइनें! 29 अप्रैल से पहले लोग क्यों भरवा रहे हैं तेल? जानें भारत के पास कितना बचा है स्टॉक

देशभर के पेट्रोल पंपों पर लंबी-लंबी कतारें लग रही हैं। लोग दोपहिया से लेकर भारी वाहनों तक भर भरकर पेट्रोल-डीजल खरीद रहे हैं। इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOC) के आंकड़ों के मुताबिक, 1 से 21 अप्रैल के बीच पेट्रोल-डीजल की बिक्री में 13 फीसदी का जोरदार उछाल आया है, जो पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले दोगुना है। तब पेट्रोल की बिक्री में महज 6.5 फीसदी और डीजल में 3.6 फीसदी की बढ़ोतरी हुई थी। गुरुवार यानी 23 अप्रैल को तो पंपों पर भारी भीड़ उमड़ पड़ी, जिससे कई जगह स्टॉक खत्म होने की नौबत आ गई। सवाल उठ रहा है- आखिर यह अचानक पैनिक बाइंग क्यों? क्या 29 अप्रैल के बाद पेट्रोल-डीजल महंगे होने वाले हैं?

पैनिक बाइंग की शुरुआत

इस हड़बड़ी की जड़ मिडिल ईस्ट में छिड़ा तेल युद्ध है। ईरान-अमेरिका-इजरायल के टकराव से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद हो गया, जो वैश्विक तेल व्यापार का 20 फीसदी हिस्सा ढोता है। भारत अपनी जरूरत का 50 फीसदी तेल इसी रास्ते से आयात करता है। नतीजा? ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल का भाव 70-75 डॉलर प्रति बैरल से उछलकर 107 डॉलर तक पहुंच गया, एक समय 120 डॉलर भी छू लिया। अमेरिका जैसे तेल धनकुबेर देश ने भी खुदरा दामों में 4 फीसदी की बढ़ोतरी कर दी। चीन समेत अन्य देशों में भी महंगाई का डर मंडरा रहा है।

सोशल मीडिया पर अफवाहें फैलीं कि भारत में ईंधन खत्म हो जाएगा, जिससे पैनिक बाइंग शुरू हो गई। बलरामपुर जैसे इलाकों में 41 पंपों पर पेट्रोल और 26 पर डीजल सूख गया।

सरकार का रुख

सरकार और तेल कंपनियां इसे महज अफवाह बता रही हैं। पेट्रोलियम मंत्रालय ने जी न्यूज को दिए बयान में स्पष्ट किया कि अगले महीने 25-28 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की खबरें फर्जी हैं। केंद्रीय मंत्री ने जोर देकर कहा कि रिटेल दाम स्थिर रखे गए हैं, क्योंकि कंपनियां नुकसान झेल रही हैं लेकिन आम आदमी पर बोझ नहीं डालना चाहतीं। विधानसभा चुनावों के चलते भी दाम न बढ़ाए जाने की अटकलें हैं। एक ब्रोकरेज रिपोर्ट का दावा है कि 29 अप्रैल के बाद, जब पांच राज्यों के चुनाव खत्म होंगे, तो 25-28 रुपये का झटका लग सकता है।

मिडिल ईस्ट जंग से शिपिंग और इंश्योरेंस खर्च चढ़ गया है, आयात बिल फूल रहा है। भारत 85 फीसदी तेल आयात पर निर्भर है, खाड़ी देशों पर खासतौर से। लेकिन युद्ध के बाद भारत ने रणनीति बदली- रूस अब सबसे बड़ा सप्लायर है (आयात का 25 फीसदी), और 40 से ज्यादा देशों से तेल खरीदा जा रहा है।

स्टॉक की हकीकत

फिर भी चिंता की कोई बात नहीं। सरकारी आंकड़े बताते हैं कि भारत के पास कच्चा तेल, रिफाइंड प्रोडक्ट्स और रणनीतिक भंडार (SPR) मिलाकर 74 दिनों की स्टोरेज कैपेसिटी है। वर्तमान स्टॉक 60 दिनों का है- करीब 250 मिलियन बैरल या 4000 करोड़ लीटर। SPR में 9.5 दिनों का अतिरिक्त रिजर्व है। मार्च में भी ऐसी अफवाहें फैली थीं, लेकिन सरकार ने खारिज कर दिया था। सभी 1 लाख से ज्यादा पंप खुले हैं, सप्लाई चेन मजबूत है। BPCL, HPCL, IOCL जैसी कंपनियों ने अगले 60 दिनों का कच्चा तेल अनुबंधित कर लिया है।

आगे की चुनौतियां

पैनिक से लोकल स्तर पर दिक्कतें हो रही हैं, लेकिन राष्ट्रीय संकट नहीं। अर्थव्यवस्था पर असर पड़ सकता है- हर 1 डॉलर कीमत बढ़ने से 1.8-2 अरब डॉलर का अतिरिक्त आयात बिल। महंगाई, निर्यात में गिरावट का खतरा है। सरकार विविध आयात स्रोतों पर जोर दे रही है। जनता से अपील है- अफवाहों पर ध्यान न दें, जरूरत भर ही खरीदें। तेल कंपनियां लगातार स्टॉक रिचार्ज कर रही हैं। फिलहाल राहत की सांस लें, लेकिन ग्लोबल तनाव पर नजर रखें।

Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।