
भारत में सामान्य परिस्थितियों में अब भी पेट्रोल और डीजल खरीदने की कोई राष्ट्रीय स्तर पर ज़बरदस्ती दैनिक सीमा नहीं है, लेकिन मार्च 2026 के दौरान कई राज्यों में पैनिक बाइंग की आशंका और अफवाहों के चलते स्थानीय प्रशासन ने अस्थायी रूप से गाड़ियों के हिसाब से खरीद की सीमा तय कर दी है। इसके साथ‑साथ पेट्रोलियम मंत्रालय और तमाम राज्य सरकारों ने कैन, बोतल और असुरक्षित कंटेनरों में तेल बेचने पर पूरी तरह रोक लगा दी है, क्योंकि यह आग, विस्फोट और कालाबाजारी के जोखिम को बढ़ाता है।
दिन भर में कितना तेल भरवा सकते हैं?
फेडरल नियम (पेट्रोलियम अधिनियम 1934) के मुताबिक साधारण उपभोक्ता के लिए प्रतिदिन कितने लीटर तेल खरीदने की कोई फिक्स्ड लिमिट निर्धारित नहीं है, बशर्ते तेल सीधे वाहन की टकी के अंदर डाला जा रहा हो। इसका मतलब यह है कि आप अपनी बाइक या कार में टकी पर अंकित क्षमता के अनुसार ही जितना चाहें तेल भरवा सकते हैं और जितनी बार चाहें पेट्रोल पंप जा सकते हैं। लेकिन यह नियम भारत भर में एक‑सा नहीं है, क्योंकि स्थानीय प्रशासन अस्थायी रूप से अपने आदेश जारी करके दिनचर्या सीमित कर सकता है, जैसा कि महाराष्ट्र के कुछ ज़िलों में हाल में देखा गया है।
मोटरसाइकिल और कार की सीमा
मार्च 2026 के दौरान महाराष्ट्र के कई ज़िलों में मिलने वाली अफवाहों और ईंधन की गैरक़ानूनी जमाखोरी की आशंका के बीच प्रशासन ने अस्थायी आदेश जारी किए। इनमें सबसे ज़्यादा चर्चित नियम यह है कि दोपहिया वाहनों को एक दिन में केवल ₹200 तक और चार पहिया वाहनों को अधिकतम ₹2,000 तक का पेट्रोल या डीजल दिया जा सकता है। इसका उद्देश्य सिर्फ यह है कि लोग भीड़‑भाड़ और लंबे क़्यू में न फंसें और ईंधन की अतिरिक्त खपत से बचाया जा सके। यह नियम पूरे महाराष्ट्र या पूरे भारत में लागू नहीं है, बल्कि सिर्फ उन्हीं ज़िलों में चलता है जहाँ ऐसे आदेश जारी किए गए हैं।
कैन, बोतल, ड्रम पर क्यों लगा बैन?
सरकारी सूत्रों के मुताबिक पेट्रोलियम मंत्रालय और कई राज्य सरकारें (जैसे असम के डिब्रूगढ़ और जम्मू‑कश्मीर के किश्तवाड़) ने प्लास्टिक की बोतलों, सामान्य कैन या असुरक्षित धातु‑प्लास्टिक कंटेनरों में खुला पेट्रोल‑डीजल बेचने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। इसकी मुख्य वजह तीन हैं: पहला, आग और विस्फोट का जोखिम; दूसरा, घरेलू भंडारण के ज़रिए जमाखोरी की आशंका; तीसरा, मानव शरीर के साथ संपर्क के कारण स्वास्थ्य खतरा। प्रशासन का तर्क है कि खुले कंटेनर में तेल सड़क‑घर‑दुकानों में आसानी से गिर सकता है, जिससे छोटी‑सी चिंगारी भी बड़ी आग का कारण बन सकती है।
“लूज पेट्रोल” के लिए क्या नियम हैं?
कुछ विशेष मामलों में जैसे छोटे जनरेटर, खेती के यंत्रों, ट्रैक्टर, खेत‑निर्माण साइट आदि के लिए 2 से 5 लीटर तक का तेल खुले में दिया जा सकता है, लेकिन उसके लिए भी सख्त शर्तें हैं। इस तेल को सिर्फ एल्यूमीनियम, लोहे या भारी, विशेष श्रेणी के प्लास्टिक कंटेनरों में ही दिया जा सकता है, जो आग लगने या नुकीली चीज़ों से फटने के जोखिम को कम करते हैं। इन कंटेनरों पर अक्सर विशेष लेबल और चेतावनी चिह्न भी लगाए जाते हैं, ताकि उपयोगकर्ता को खतरों के बारे में पता चल सके।
घर पर कितना पेट्रोल‑डीजल स्टोर कर सकते हैं?
पेट्रोलियम अधिनियम और PESO (Petroleum and Explosives Safety Organization) के नियमों के अनुसार बिना लाइसेंस आप घर पर अधिकतम 30 लीटर तक पेट्रोल या डीजल स्टोर कर सकते हैं। इससे ज़्यादा तेल रखना पहले ही अवैध माना जाता है, जब तक कि आपके पास PESO से विशेष लाइसेंस न हो। बड़े पैमाने पर तेल भंडारण (जैसे फैक्टरी, डिपो, गोदाम, इंडस्ट्रियल यूनिट, बड़े जनरेटर प्लांट) के लिए विशेष टैंक, अग्निशमन प्रणाली, वेंटिलेशन, दूरी की शर्तें और नियमित निरीक्षण जैसी शर्तें ज़रूरी मानी जाती हैं।
नियम तोड़ने पर क्या सज़ा हो सकती है?
पेट्रोलियम अधिनियम 1934 के तहत नियमों का उल्लंघन करने पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान है।
- पहली बार नियम तोड़ने पर 1 महीने तक की जेल या 1,000 रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।
- दूबारा नियम तोड़ने पर 3 महीने तक की जेल और 5,000 रुपये तक का जुर्माना लग सकता है।
- अगर किसी को ईंधन की कालाबाजारी (hoarding + black‑marketing) करते पकड़ा जाता है, तो उसके लिए 7 साल तक की सज़ा का प्रावधान है। पंप संचालकों के खिलाफ अक्सर लाइसेंस निलंबन, भारी जुर्माना और वैकल्पिक रूप से लाइसेंस रद्दीकरण जैसी कार्रवाई भी हो सकती है।
सरकार का संदेश
सरकार ने जनता को स्पष्ट चेतावनी दी है कि देश में पेट्रोल‑डीजल का भंडार लगभग 60 से 74 दिन तक की खपत के लिए पर्याप्त है, इसलिए “पैनिक बाइंग” या अफवाहों पर विश्वास करके अतिरिक्त ईंधन भरवाने या जमा करने की ज़रूरत नहीं है। अधिकारी यह भी कहते हैं कि अगर आप अपने क्षेत्र के लिए विशिष्ट स्थानीय दिशा‑निर्देशों या PESO लाइसेंस की प्रक्रिया के बारे में जानकारी चाहते हैं, तो स्थानीय DSM (Deputy Superintendent of Petroleum), PESO कार्यालय या ज़िला प्रशासन से सीधे संपर्क करना ज़रूरी है।









