
LPG सिलेंडर के दामों पर 51 रुपये की बढ़ोतरी के बाद अब पेट्रोल-डीजल की कीमतें भी आसमान छूने लगी हैं। प्राइवेट फ्यूल रिटेलर्स ने आम जनता को झटका देने वाले फैसले ले लिए हैं। शेल इंडिया ने 1 अप्रैल से अपने आउटलेट्स पर पेट्रोल के दाम 7.41 रुपये और डीजल के दाम 25.01 रुपये प्रति लीटर बढ़ा दिए हैं। इससे पहले नायरा एनर्जी ने भी कीमतें ऊंची कर दी थीं। कंपनियों का तर्क है कि कच्चे तेल की वैश्विक कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं, जिससे उन्हें भारी नुकसान हो रहा था।
नई बढ़ोतरी का झटका
बेंगलुरु जैसे शहरों में शेल के पंपों पर सामान्य पेट्रोल अब 119.85 रुपये प्रति लीटर और प्रीमियम पावर 129.85 रुपये पर बिक रहा है। डीजल के मामले में बढ़ोतरी और चौंकाने वाली है- सामान्य डीजल 123.52 रुपये तथा प्रीमियम डीजल 133.52 रुपये प्रति लीटर हो गया। यह बदलाव कर्नाटक, महाराष्ट्र, गुजरात, तमिलनाडु, तेलंगाना और असम जैसे राज्यों के शेल स्टेशनों पर लागू हो चुका है।
हालांकि, सरकारी तेल कंपनियां जैसे IOC, BPCL और HPCL ने साधारण पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर रखे हैं। दिल्ली में सामान्य पेट्रोल 94.77 रुपये और डीजल 87.67 रुपये प्रति लीटर ही बना हुआ है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि वैश्विक संकट के बावजूद आम उपभोक्ताओं को राहत दी गई है, लेकिन प्रीमियम वेरिएंट्स में मामूली बढ़ोतरी हुई।
वैश्विक संकट की जड़
कीमतों में इस तेजी की जड़ मिडिल ईस्ट का भू-राजनीतिक तनाव है। ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद होर्मुज स्ट्रेट से कच्चे तेल की सप्लाई पर संकट गहरा गया। भारत अपनी 88 प्रतिशत तेल जरूरत आयात करता है, जिसमें ईरान-इराक जैसे देशों का बड़ा योगदान है। 28 फरवरी से शुरू हुए संघर्ष ने ब्रेंट क्रूड की कीमतों में 60 प्रतिशत की उछाल ला दिया।
निजी कंपनियां ‘इंपोर्ट पैरिटी प्राइसिंग’ (IPP) फॉर्मूले पर चलती हैं, जिसमें वैश्विक भाव, शिपिंग कॉस्ट, बीमा और पोर्ट शुल्क शामिल होते हैं। सरकारी कंपनियों को सब्सिडी बैकअप मिलता है, लेकिन प्राइवेट फर्मों को बाजार के हवाले रहना पड़ता है। नायरा और शेल जैसी कंपनियां घाटे की भरपाई के लिए खुदरा दाम बढ़ा रही हैं।
आम आदमी पर गहरा असर
इसका असर सीधे आम आदमी की जेब पर पड़ रहा। ट्रांसपोर्टर, किसान, ऑटो-टैक्सी चालक और दैनिक यात्री सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। खाने-पीने की चीजों के दाम 10-20 प्रतिशत ऊंचे हो सकते हैं। आगरा जैसे शहरों में डीजल-चालित वाहनों पर निर्भर लोग परेशान हैं। टाटा मोटर्स जैसी कंपनियां भी पेट्रोल-डीजल वाहनों की कीमतें 0.5 प्रतिशत बढ़ा रही हैं। सरकार उत्पाद शुल्क घटाकर कंपनियों को राहत दे रही, लेकिन निजी क्षेत्र पर दबाव बरकरार है।
भविष्य की आशंकाएं
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर युद्ध जारी रहा तो डीजल 148-165 रुपये तक पहुंच सकता है। सरकार सरकारी-निजी रिफाइनरियों का ग्रुप बना रही है ताकि आयात सौदे मजबूत हों। फिलहाल उपभोक्ताओं को सतर्क रहना होगा। क्या केंद्र अब टैक्स कटौती पर विचार करेगा? आने वाले दिन बताएंगे।









