
राज्य के करीब सवा सात लाख पेंशनधारकों के चेहरे पर मुस्कान आ गई है। उत्तराखंड सरकार ने चालू वित्तीय वर्ष में दूसरी बार पेंशन में बढ़ोतरी का ऐलान किया है। पहले अप्रैल के पहले सप्ताह में वृद्धावस्था, विधवा और दिव्यांग पेंशन को 200 रुपये बढ़ाकर 1400 रुपये मासिक कर दिया गया था। अब इसमें फिर से 100 रुपये का इजाफा करते हुए इसे 1500 रुपये प्रतिमाह कर दिया गया है।
समाज कल्याण विभाग ने 7.23 लाख लाभार्थियों के लिए 1 अप्रैल से पहली तिमाही की 4500 रुपये की राशि जारी करने की तैयारी पूरी कर ली है। यह फैसला बुजुर्गों, विधवाओं और दिव्यांगों के जीवन को थोड़ा सहज बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
हिंदुस्तान रिपोर्ट का खुलासा
हिंदुस्तान अखबार की एक रिपोर्ट के अनुसार, शासन ने इसके लिए औपचारिक निर्देश जारी कर दिए हैं। प्रमुख सचिव एल फैनई ने बताया कि यह बढ़ोतरी राज्य के समाज कल्याण विभाग के तहत चलाई जा रही योजनाओं पर लागू होगी। पहले पेंशनधारकों को मासिक 1400 रुपये के हिसाब से हर तीन महीने में 4200 रुपये मिलते थे। अब नई दर के तहत तिमाही पेंशन 4500 रुपये हो गई है। यह 100 रुपये मासिक की वृद्धि से कुल 300 रुपये तिमाही का अतिरिक्त लाभ सुनिश्चित करती है।
फैनई ने कहा, “यह निर्णय पेंशनर्स की बदलती आर्थिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। विभाग ने सभी जिलों के जिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि डीबीटी के माध्यम से राशि शीघ्र खातों में हस्तांतरित हो।”
पेंशन का ऐतिहासिक सफर
उत्तराखंड में पेंशन व्यवस्था का इतिहास देखें तो 2014 में अंतिम बड़ा संशोधन हुआ था। उस समय वृद्धावस्था, दिव्यांग और विधवा पेंशन को 1200 रुपये मासिक निर्धारित किया गया था। उसके बाद कई वर्षों तक कोई बदलाव नहीं आया, जिससे लाभार्थी महंगाई की मार झेलते रहे। फिर 2022 के मार्च में तत्कालीन मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने तीनों श्रेणियों की पेंशन को 1200 से बढ़ाकर 1400 रुपये करने की घोषणा की थी। यह कदम राज्य बजट में सामाजिक कल्याण पर जोर देने का प्रतीक था। अब 2026 में एक बार फिर धामी सरकार ने पेंशनर्स को सरप्राइज दिया है।
अप्रैल में पहली बढ़ोतरी के बाद यह दूसरा मौका है जब चालू वित्तीय वर्ष में ही मानदेय में संशोधन किया गया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह निर्णय आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए बुजुर्ग वोट बैंक को मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है।
पेंशनर्स के जीवन पर असर
यह बढ़ोतरी केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पेंशनधारकों के दैनिक जीवन पर सीधा असर डालती है। राज्य के पहाड़ी इलाकों में रहने वाले बुजुर्गों के लिए जहां दवाइयों और राशन की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, वहीं 100 रुपये का अतिरिक्त लाभ छोटा लग सकता है, लेकिन सवा सात लाख परिवारों के लिए यह महत्वपूर्ण है। उदाहरण के लिए, देहरादून के एक वृद्धाश्रम से जुड़े रामलाल (नाम परिवर्तित) जैसे बुजुर्ग बताते हैं कि पहले 1400 रुपये से मुश्किल से दो महीने का राशन चल पाता था, अब 1500 से थोड़ी राहत मिलेगी।
इसी तरह, हरिद्वार की विधवा सुनीता कहती हैं, “यह राशि बच्चों की पढ़ाई और घर के खर्च में मदद करेगी। सरकार का शुक्रिया।” विभागीय आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में कुल 7.23 लाख पेंशनर्स हैं, जिनमें से अधिकांश ग्रामीण क्षेत्रों से हैं। इनमें 60 वर्ष से अधिक आयु के वृद्ध, आर्थिक रूप से कमजोर विधवाएं और 40 प्रतिशत से अधिक दिव्यांग शामिल हैं।
सरल भुगतान प्रक्रिया
भुगतान प्रक्रिया को और सरल बनाने के लिए सरकार डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जोर दे रही है। आधार लिंक्ड बैंक खातों के माध्यम से डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) सुनिश्चित किया जा रहा है। समाज कल्याण विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि जिला स्तर पर कैंप लगाकर पेंशन लिंकिंग को पूरा किया जा रहा है। यदि कोई लाभार्थी अभी तक रजिस्टर्ड नहीं है, तो वे नजदीकी ब्लॉक कार्यालय या ई-ग्राम पोर्टल पर आवेदन कर सकते हैं। इसके अलावा, पेंशन वितरण में देरी न हो, इसके लिए विभाग ने तिमाही कैलेंडर तैयार किया है। पहली तिमाही (अप्रैल-जून) की राशि 1 अप्रैल से ही प्रोसेस हो रही है, जो मई के पहले सप्ताह तक खातों में पहुंच जाएगी।
राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में महत्व
राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में देखें तो उत्तराखंड का यह कदम अन्य राज्यों के लिए मिसाल पेश कर सकता है। केंद्र सरकार की स्तर पर ईपीएफओ न्यूनतम पेंशन को 1000 से 5000 रुपये तक बढ़ाने का प्रस्ताव लंबित है, जबकि दिल्ली और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में भी पेंशन में वृद्धि हुई है। दिल्ली में 70 वर्ष से अधिक आयु वालों को 3000 रुपये मिल रहे हैं, तो यूपी में सामान्य पेंशन 10300 रुपये प्रतिमाह पहुंच गई है। हालांकि, उत्तराखंड जैसे छोटे राज्यों में संसाधनों की सीमित होने के बावजूद यह बढ़ोतरी सराहनीय है।
विशेषज्ञों का कहना है कि महंगाई दर (लगभग 5-6 प्रतिशत) को देखते हुए पेंशन में समय-समय पर संशोधन जरूरी है। भविष्य में डीए (महंगाई भत्ता) में 60 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की संभावना भी चर्चा में है।
सीएम का संकल्प और भविष्य
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक हालिया बयान में कहा, “हमारी सरकार गरीब, बुजुर्ग और जरूरतमंदों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। पेंशन वृद्धि इसी दिशा में एक और कदम है।” विपक्षी दल भी इसकी तारीफ कर रहे हैं, हालांकि वे मांग कर रहे हैं कि इसे 2000 रुपये मासिक करने का लक्ष्य रखा जाए। कुल मिलाकर, यह फैसला राज्य के सामाजिक सुरक्षा जाल को मजबूत करता है। पेंशनधारक अब आशा भरी निगाहों से अगली तिमाही का इंतजार कर रहे हैं। यदि आप भी लाभार्थी हैं, तो अपने बैंक खाते की जांच करें और विभाग की हेल्पलाइन 1800-XXX-XXXX पर संपर्क करें। यह छोटी-सी वृद्धि बड़े सपनों को साकार करने में सहायक बनेगी।









