
भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) की वेबसाइट के अनुसार, भारत में कुल 487 हवाई अड्डे या हवाई पट्टियां हैं, जिनमें से 137 का प्रबंधन एएआई करता है। इनमें अब एक और ऐतिहासिक नाम जुड़ने जा रहा है- नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर), जो न केवल भारत बल्कि एशिया का सबसे बड़ा और दुनिया का चौथा सबसे बड़ा एयरपोर्ट है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 28 मार्च 2026 को इसका उद्घाटन करेंगे।
25 साल पुराने सपने का साकार होना
जेवर एयरपोर्ट का सपना करीब 25 साल पुराना है। साल 2017 में उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने इसे बनाने की घोषणा की। मई 2018 में नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने सैद्धांतिक मंजूरी दी और 26 नवंबर 2021 को प्रधानमंत्री मोदी ने इसकी आधारशिला रखी थी। अब पांच साल बाद यह परियोजना हकीकत बन चुकी है ।
विशालकाय परियोजना के आंकड़े
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट 5,000 से 5,845 हेक्टेयर (लगभग 13,000 एकड़) में फैला है। पहले चरण में 1,334 हेक्टेयर में 11,077 करोड़ रुपये की लागत से टर्मिनल-1, एक रनवे (3,900 मीटर लंबा) और कार्गो हब तैयार हुआ है। भविष्य में इसमें कुल 6 रनवे और 4 टर्मिनल बनाए जाएंगे, जिससे सालाना 7 करोड़ से अधिक यात्रियों को संभालने की क्षमता होगी। पूर्ण विस्तार के बाद यहां एक साथ 178 विमान खड़े हो सकेंगे।
पहले चरण में ही एयरपोर्ट की वार्षिक यात्री क्षमता 1.2 करोड़ है और रोजाना 150 वाणिज्यिक उड़ानें संचालित होंगी। अंतिम चरण में यह क्षमता 30 करोड़ यात्रियों तक पहुंच सकती है।
भारत का पहला ‘ग्रीन’ और ‘स्मार्ट’ एयरपोर्ट
जेवर एयरपोर्ट को इको-फ्रेंडली बनाने पर खास जोर दिया गया है। यह पूरी तरह सौर ऊर्जा से संचालित होगा, रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम से लैस होगा और कार्बन न्यूट्रल ऑपरेशन को अपनाएगा। डिजी यात्रा तकनीक के तहत फेस रिकग्निशन से यात्री बिना टिकट दिखाए एंट्री कर सकेंगे। सबसे खास बात यह है कि यहां ILS CAT-IIIB तकनीक लगी है, जिससे कोहरे में भी 50 मीटर दृश्यता पर विमान लैंड कर सकेंगे- दिल्ली-एनसीआर के लिए यह बड़ी राहत है।
वास्तुकला में भारतीय संस्कृति की झलक
एयरपोर्ट की डिजाइन वाराणसी और हरिद्वार के घाटों से प्रेरित है। एंट्री गेट गंगा घाट जैसा दिखता है, छत बहते पानी जैसी लहरदार है और दीवारों में पारंपरिक जालीदार नक्काशी है, जो प्राकृतिक रोशनी और वेंटिलेशन देती है। खुला आंगन भारतीय वास्तुकला की पहचान बना हुआ है ।
दिल्ली-NCR का दूसरा इंटरनेशनल गेटवे
दिल्ली से 75 किमी और नोएडा-फरीदाबाद-गाजियाबाद से 40 किमी दूर स्थित यह एयरपोर्ट इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट (IGI) पर बोझ कम करेगा। यह उत्तर भारत का सबसे बड़ा कार्गो हब भी बनेगा, जिसकी सालाना क्षमता 2.5 मिलियन टन होगी, जिससे निर्यात-आयात को बड़ा बढ़ावा मिलेगा ।
मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी का हब
जेवर एयरपोर्ट सिर्फ फ्लाइट्स तक सीमित नहीं होगा। यमुना एक्सप्रेसवे से सीधा जुड़ाव होने के अलावा, यहां बुलेट ट्रेन, मेट्रो, नमो भारत रैपिड रेल और हाईवे नेटवर्क से कनेक्टिविटी बनाई जा रही है, जिससे यह परिवहन का महाहब बनेगा।
रोजगार और आर्थिक विकास के नए रास्ते
इस परियोजना से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लाखों रोजगार के अवसर पैदा होंगे। पश्चिमी उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान के यात्रियों को अब दिल्ली एयरपोर्ट जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। एयरपोर्ट के आसपास एयरोसिटी विकसित की जा रही है, जो वैश्विक स्तर की सुविधाओं से लैस होगी।
स्विट्जरलैंड की ज्यूरिख एयरपोर्ट इंटरनेशनल एजी को 40 वर्षों तक इसके संचालन की जिम्मेदारी दी गई है। 28 मार्च को उद्घाटन के बाद अक्टूबर 2026 तक पहली वाणिज्यिक उड़ानें शुरू होने की उम्मीद है। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट सिर्फ एक हवाई अड्डा नहीं, बल्कि भारत की एविएशन शक्ति का नया प्रतीक है, जो देश को वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान देगा।









