
मई 2026 से राज्य स्तर पर लागू होने वाली नई श्रम संहिताएँ भारतीय श्रम व्यवस्था में एक बड़ा परिवर्तन ला रही हैं। 29 जटिल श्रम कानूनों को हटाकर चार संहिताओं- वेतन संहिता 2019, औद्योगिक संबंध संहिता 2020, व्यावसायिक सुरक्षा संहिता 2020 और सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020-का दायरा बढ़ाया गया है, जिससे श्रमिकों को पीएफ, ग्रेच्युटी, बोनस और काम के घंटों में स्पष्ट लाभ मिलेगा।
नए कानून क्या हैं?
चार नई श्रम संहिताएँ श्रमिकों के लिए एकल–स्तर पर सुरक्षा और सुविधा प्रदान करती हैं। वेतन संहिता न्यूनतम वेतन, ओवरटाइम और समान वेतन जैसे मुद्दों को संबोधित करती है। औद्योगिक संबंध संहिता छंटनी, बंदी और हड़ताल के नियमों को सरल बनाती है। व्यावसायिक सुरक्षा संहिता कारखानों और उद्योगों में सुरक्षा और स्वास्थ्य नियमों का दायरा बढ़ाती है, जबकि सामाजिक सुरक्षा संहिता गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों को पहली बार एकीकृत करती है।
वेतन, PF और ग्रेच्युटी में बदलाव
नई व्यवस्था के अनुसार, कर्मचारी की कुल वेतन (CTC) का कम से कम 50% भाग मूल वेतन माना जाएगा, जिससे PF, ग्रेच्युटी और बोनस जैसी देनदारियाँ बढ़ेंगी। इससे श्रमिकों की रिटायरमेंट योजनाओं में लंबे समय में फायदा होगा, हालाँकि अल्पकालिक रूप से इन–हैंड वेतन में गिरावट आ सकती है।
ग्रेच्युटी की नई परिभाषा के तहत, अब गणना केवल बेसिक वेतन पर नहीं, बल्कि CTC के मुख्य हिस्सों पर की जाएगी। इससे दीर्घकालिक रूप से श्रमिकों को अधिक लाभ मिलेगा, खासकर उनके लिए जिन्हें पहले कम मूल वेतन द्वारा दबाए जाते थे। बोनस नियमों में भी बदलाव होगा, जिससे उत्पादन और लाभ में वृद्धि के साथ श्रमिकों को अधिक लाभ मिल सकता है।
न्यूनतम सुरक्षा और काम के घंटे
नई संहिताओं के तहत, 300 या अधिक श्रमिकों वाले प्रतिष्ठानों को छंटनी या बंदी के लिए सरकारी अनुमति लेनी होगी, जो पहले 100 श्रमिकों के लिए थी। इससे बड़ी इकाइयों में श्रमिकों की नौकरी सुरक्षा बढ़ेगी। छंटनी की स्थिति में नियोक्ता को री–स्किलिंग फंड में 15 दिन का वेतन जमा करना होगा, जो श्रमिकों को नए रोज़गार के लिए तैयार करेगा।
काम के घंटे में भी सुधार होगा: दिन के 8 घंटे और सप्ताह के 48 घंटे की सीमा रहेगी, जिससे श्रमिकों को अधिक समय मिलेगा। ओवरटाइम के लिए दोगुना भुगतान किया जाएगा, जो श्रमिकों को वास्तविक लाभ देगा। गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों को भी सामाजिक सुरक्षा फंड में शामिल किया जाएगा, जिससे उन्हें पहली बार PF, बीमा और पेंशन जैसे लाभ मिलेंगे।
न्यूनतम वेतन और श्रमिक सुरक्षा
नई वेतन संहिता के तहत, सभी क्षेत्रों के कर्मचारियों के लिए न्यूनतम वेतन अनिवार्य किया गया है। केंद्र सरकार फ्लोर वेज तय करेगी, जिससे राज्य उससे नीचे नहीं जा सकेंगे। वेतन का भुगतान हर महीने सात तारीख तक अनिवार्य होगा, जिससे श्रमिकों को समय पर वेतन मिल सकेगा।
महिला कर्मचारियों को सभी शिफ्टों में काम की अनमुति दी जाएगी, जिससे उनकी नौकरी के अवसर बढ़ेंगे। निरीक्षक की भूमिका “इंस्पेक्टर–कम–फैसितेटर” होगी, जो छोटी उल्लंघनों पर पहले सुधार का मौका देगा, जबकि गंभीर मामलों में जुर्माना 20 लाख रुपये तक हो सकता है।





