Tags

Overtime New Rules: कर्मचारियों की मौज! 1 घंटे के काम पर मिलेगा 2 घंटे का पैसा; नए लेबर कोड में डबल सैलरी का नियम समझें

नए लेबर कोड के तहत ओवरटाइम भुगतान को लेकर कर्मचारियों के लिए राहत की बड़ी खबर है। तय शिफ्ट के बाद किए गए अतिरिक्त काम का भुगतान अब सामान्य वेतन दर से दोगुना देना होगा, जबकि 15–30 मिनट के अतिरिक्त समय को 30 मिनट और 30 मिनट से ज्यादा को 1 घंटे का ओवरटाइम माना जाएगा.

By Pinki Negi

new labour law overtime double salary rules india

नए लेबर कोड के ओवरटाइम नियमों पर जो सबसे बड़ी बात सामने आती है, वह यह है कि अतिरिक्त काम का भुगतान “डबल वेज” यानी सामान्य मजदूरी दर से कम-से-कम दोगुना होना चाहिए, और ओवरटाइम का हिसाब तय शिफ्ट के बाद किए गए वास्तविक अतिरिक्त समय के आधार पर होगा। सरकार के जारी कंप्लायंस हैंडबुक और PRS के विश्लेषण में भी साफ कहा गया है कि 8 घंटे प्रतिदिन और 48 घंटे साप्ताहिक सीमा के बाद काम करने पर ओवरटाइम देय होगा, तथा 15–30 मिनट को 30 मिनट और 30 मिनट से अधिक को 1 घंटे के ओवरटाइम में गिना जा सकता है।

कर्मचारियों के लिए बड़ा बदलाव

अगर इस नियम को सरल भाषा में समझें, तो शिफ्ट खत्म होने के बाद किया गया हर अतिरिक्त मिनट अब कंपनी के लिए लागत बनेगा, और कर्मचारी के लिए वैध भुगतान का अधिकार। पहले कई जगहों पर अतिरिक्त काम तो लिया जाता था, लेकिन भुगतान को लेकर ढिलाई रहती थी; नए ढांचे का उद्देश्य इसी गैप को कम करना है। सरकार की ओर से जारी दस्तावेजों में रिकॉर्ड-keeping, ओवरटाइम रजिस्टर और wage slip को अनिवार्य बताया गया है, ताकि कर्मचारी अपना बकाया आसानी से मांग सके।

ओवरटाइम की गणना

ओवरटाइम को “1 घंटे का काम = 2 घंटे की कमाई” कहकर पेश किया जा रहा है, लेकिन व्यावहारिक अर्थ यह है कि ओवरटाइम के हर घंटे के लिए सामान्य hourly wage का दोगुना भुगतान होगा। अगर किसी कर्मचारी की सामान्य प्रति-घंटा दर 150 रुपये है, तो ओवरटाइम के लिए न्यूनतम भुगतान 300 रुपये प्रति घंटा होगा। मासिक वेतन वाले कर्मचारियों के लिए भी गणना basic pay और dearness allowance के आधार पर होती है, इसलिए CTC देखकर नहीं बल्कि wage-components देखकर हिसाब लगाया जाता है।

काम के घंटे और सीमा

नए नियमों के तहत सामान्य कार्यदिवस 8 घंटे और साप्ताहिक सीमा 48 घंटे रखी गई है, जबकि कुछ रूपों में 4 दिन के वर्कवीक के साथ 12 घंटे तक का दिन संभव है, बशर्ते कुल साप्ताहिक सीमा 48 घंटे बनी रहे. PRS की समीक्षा के अनुसार, ड्राफ्ट नियमों में ओवरटाइम की अधिकतम सीमा प्रति तिमाही 125 घंटे बताई गई थी, जबकि बाद के मसौदों/व्याख्याओं में कुछ श्रेणियों के लिए 144 घंटे तक की बात सामने आई। इसका सीधा मतलब यह है कि कानून अतिरिक्त काम को अनुमति तो देता है, लेकिन उसे असीमित नहीं छोड़ता।

फाइनल सेटलमेंट

नए नियमों की एक अहम राहत यह है कि नौकरी छोड़ने, निकाले जाने या इस्तीफे की स्थिति में फाइनल सेटलमेंट जल्दी करने पर जोर दिया गया है। सरकारी handbook के मुताबिक, सभी due wages दो working days के भीतर चुकाने होते हैं, और इसमें ओवरटाइम बकाया भी शामिल है. यह प्रावधान कर्मचारियों के लिए नकदी प्रवाह और पारदर्शिता दोनों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

किसे फायदा होगा

इस बदलाव का सबसे ज्यादा फायदा उन कर्मचारियों को होगा जो IT, services, factories, logistics, production, security, retail और shift-based jobs में काम करते हैं। जहां लंबे घंटे, late shifts या peak-load के दौरान अतिरिक्त काम सामान्य बात है, वहां अब employer पर proper overtime payment का दबाव बढ़ेगा। साथ ही, हर कंपनी को attendance, overtime register और payment trail रखना होगा, जिससे dispute होने पर कर्मचारी के पास सबूत मजबूत होंगे।

क्या यह हर जगह तुरंत लागू है

यहां एक अहम तथ्य समझना जरूरी है: भारत के labor codes और उनके rules का ढांचा central framework देता है, लेकिन व्यावहारिक लागूकरण notification, sector-specific rules और state-level adoption पर निर्भर कर सकता है। इसलिए “नई नौकरी नीति” या “डबल सैलरी” की खबर को हमेशा कंपनी की policy, state rules और latest official notification के साथ पढ़ना चाहिए। यही वजह है कि हेडलाइन आकर्षक होने के बावजूद नियम की कानूनी भाषा को समझना जरूरी है।

रिपोर्टर की नज़र से निष्कर्ष

इस खबर का सबसे सटीक और संतुलित निष्कर्ष यह है कि नया लेबर ढांचा कर्मचारियों के ओवरटाइम अधिकारों को मजबूत करता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हर कर्मचारी की पूरी सैलरी अपने-आप दोगुनी हो जाएगी। असल बदलाव यह है कि तय ड्यूटी टाइम से ऊपर किए गए काम का भुगतान अब ज्यादा स्पष्ट, ज्यादा रिकॉर्डेड और कम-से-कम दोगुना दर से होना चाहिए। यही बात इसे एक employee-friendly reform बनाती है।

Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

अभी-अभी मोदी का ऐलान

हमारे Whatsaap ग्रुप से जुड़ें