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Income Tax Alert: पत्नी के खाते में पैसे ट्रांसफर करने वाले सावधान! टैक्स बचाने की ये ट्रिक कहीं पड़ न जाए भारी, आयकर विभाग की है पैनी नजर

टैक्स बचाने की होड़ में पत्नी के नाम FD या निवेश करवाना क्लबिंग ऑफ इनकम का जाल है। आयकर विभाग AIS से ट्रैक कर रहा है। लोन, म्यूचुअल फंड, होम लोन, LTA जैसे कानूनी तरीकों से लाखों बचाएं। जोखिम न लें, CA से सलाह लें।

By Pinki Negi

Income Tax Alert: पत्नी के खाते में पैसे ट्रांसफर करने वाले सावधान! टैक्स बचाने की ये ट्रिक कहीं पड़ न जाए भारी, आयकर विभाग की है पैनी नजर

आजकल टैक्स बचाने की होड़ में कई लोग अपनी कमाई को पत्नी के बैंक खाते में ट्रांसफर कर देते हैं या उनके नाम पर फिक्स्ड डिपॉजिट (FD), म्यूचुअल फंड या शेयर खरीद लेते हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही ये ‘ट्रिक’ लगती तो आसान है, लेकिन आयकर कानून के क्लबिंग ऑफ इनकम प्रावधान के कारण ये उल्टी पड़ सकती है। इनकम टैक्स एक्ट की धारा 64(1)(iv) साफ तौर पर कहती है कि अगर पति पत्नी को बिना किसी प्रतिफल के धन या संपत्ति ट्रांसफर करता है, तो उससे होने वाली किसी भी आय को पति की कुल आय में ही जोड़ दिया जाएगा।

यानी ब्याज, डिविडेंड, किराया या कैपिटल गेन- सबका टैक्स बोझ पति पर ही आ गिरेगा। ऊपर दी गई जानकारी के मुताबिक, आयकर विभाग अब एन्युअल इनफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) और बैंक स्टेटमेंट्स के जरिए हाई-वैल्यू ट्रांसफर पर पैनी नजर रख रहा है, खासकर अगर पत्नी गृहिणी हैं या उनकी अपनी आय स्रोत कम हैं।

क्लबिंग का जाल कैसे फंसाता है?

कल्पना कीजिए, आप अपनी सालाना 10 लाख रुपये की बचत को पत्नी के नाम पर FD करवा देते हैं। वो FD 7 फीसदी ब्याज देती है, यानी करीब 70,000 रुपये सालाना। लेकिन टैक्स के लिहाज से ये पूरी रकम आपकी ही आय मानी जाएगी, क्योंकि ट्रांसफर ‘गिफ्ट’ या बिना मेहनत के था। अगर पत्नी उस पैसे से म्यूचुअल फंड में निवेश करती हैं और शेयर बाजार में मुनाफा होता है, तो LTCG (लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन) भी आपकी जिम्मेदारी बन जाएगा। विभाग को शक होता है तो AIS में ट्रांसफर दिखेगा, लेकिन अगर ITR में सही रिपोर्टिंग न हो तो नोटिस घर आ ही जाएगा।

गलत रिपोर्टिंग पर 50 फीसदी तक पेनल्टी या स्क्रूटनी का खतरा मंडराता है। कैश ट्रांसफर पर तो धारा 269SS और 269T के तहत 20,000 रुपये से ज्यादा की सीमा लांघी तो अलग नोटिस। हालांकि, पत्नी को मिला गिफ्ट खुद टैक्स-फ्री है (धारा 56 के तहत), लेकिन उत्पन्न आय क्लब हो जाती है। पत्नी को ITR में इसे ‘एक्जेम्प्ट इनकम’ दिखाना पड़ता है और फीडबैक देना पड़ता है कि ये पति के PAN में क्लब हो चुकी है।

लोन का रास्ता: सावधानी से अपनाएं

अगर ट्रांसफर लोन के रूप में हो, यानी लिखित एग्रीमेंट हो, ब्याज तय हो (बाजार दर से कम न हो) और पत्नी समय पर चुकाए, तो क्लबिंग से बचाव संभव है। लेकिन ये आसान नहीं- ब्याज की रसीदें, बैंक ट्रांसफर प्रूफ और नियमित EMI जरूरी। अगर ब्याज न लिया जाए या रिकवरी न हो, तो फिर वही क्लबिंग लागू। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि ऐसे लोन के लिए CA की मदद लें, वरना विभाग इसे ‘ट्रांसफर विदाउट कंसिडरेशन’ मान लेगा।

कानूनी टैक्स सेविंग के स्मार्ट तरीके

टैक्स बचाने के चक्कर में जोखिम क्यों? परिवार के सदस्य मिलकर वैध तरीकों से लाखों बचा सकते हैं। म्यूचुअल फंड या इक्विटी शेयरों में निवेश का शानदार मौका है। हर व्यक्ति को LTCG पर 1.25 लाख रुपये सालाना टैक्स-फ्री सीमा मिलती है। अगर पति-पत्नी दोनों अलग-अलग नाम पर निवेश करें- पति 10 लाख, पत्नी 10 लाख- तो कुल 2.5 लाख तक का गेन टैक्स-मुक्त। ये क्लबिंग से अलग है, क्योंकि निवेश पति की अपनी कमाई से हो।

होम लोन में तो कमाल हो जाता है। अगर प्रॉपर्टी दोनों के नाम पर हो और लोन जॉइंट लिया जाए, तो धारा 80C में प्रिंसिपल पर 1.5 लाख तक और धारा 24(b) में ब्याज पर 2 लाख (स्वयं के घर के लिए) तक की अलग-अलग छूट। यानी कुल 7 लाख तक का फायदा। हेल्थ इंश्योरेंस में भी यही फॉर्मूला- धारा 80D के तहत पति-पत्नी अपनी-अपनी पॉलिसी से 25,000 (स्वास्थ्य) + 50,000 (सीनियर सिटीजन) तक बचा सकते हैं।

बच्चों की पढ़ाई पर धारा 80C का लाभ दोहरा लें। ट्यूशन फीस पर कोई लिमिट नहीं, बस दो बच्चों तक। अगर दो से ज्यादा बच्चे या फीस भारी हैं, तो पति एक बच्चे की, पत्नी दूसरे की फीस भरें। नौकरीपेशा दंपति LTA (लीव ट्रैवल अलाउंस) से 4 साल के ब्लॉक में दो यात्राओं पर खर्च बचा सकते हैं- ट्रेन, बस, फ्लाइट का बिल जमा करें। ये छुट्टियों को टैक्स-फ्री बना देता है।

विभाग की नजर और सलाह

आयकर विभाग अब डिजिटल ट्रांजेक्शन पर AI की मदद से ट्रैक कर रहा है। फ्रीलांसर या बिजनेस वाले खास सावधान- पत्नी के अकाउंट में रूटिंग नोटिस का शिकार हो चुके हैं। अंतिम सलाह: हर कदम CA से कंसल्ट करें, दस्तावेज संभालें और ITR समय पर फाइल करें। टैक्स बचत कानून के दायरे में रखें, वरना ‘स्मार्ट ट्रिक’ महंगी साबित होगी। 

Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

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