
मध्य पूर्वी में बढ़ते तनाव और ईरान-इजरायल के बीच खिंचाव की वजह से भारत के आम आदमी की रसोई सीधे तौर पर प्रभावित हो रही है। ईरान द्वारा विश्व के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) को बंद करने के बाद, वैश्विक ऊर्जा बाजार में तनाव बढ़ गया है। इसका सीधा प्रभाव भारत में LPG सिलेंडर की कीमतों पर पड़ा est. 7 मार्च 2026 से लागू होने वाले नए रेट्स के अनुसार, 14.2 किलो के घरेलू सिलेंडर की कीमत में 60 रुपये की वृद्धि हुई है, जबकि 19 किलो के व्यावसायिक सिलेंडर की कीमत में 115 रुपये की वृद्धि हुई है।
वैश्विक तनाव और ऊर्जा संकट का सीधा असर
ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव के कारण, विश्व के कई देशों में ऊर्जा आपूर्ति बाधित हो गई है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा ईरान, कतार और UAE जैसे देशों से लाता है, जो कि ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ के रास्ते से गुजरता है। ईरान द्वारा इस मार्ग को बंद करने से 28 फरवरी से गैस आपूर्ति बाधित हो गई है। विश्व की लगभग 20% LPG आपूर्ति इसी मार्ग से हो रही है, जिससे एशियाई बाजारों में गैस की कीमतों में अचानक उछाल आया है।
नए रेट्स: शहर-दर-शहर तुलना
नए रेट्स के अनुसार, दिल्ली में 14.2 किलो के घरेलू सिलेंडर की कीमत 853 रुपये से बढ़कर 913 रुपये हो गई है। वहीं, 19 किलो के व्यावसायिक सिलेंडर की कीमत 1768.5 रुपये से बढ़कर 1883 रुपये हो गई है।
| शहर | 14.2 kg (घरेलू) | 19 kg (व्यावसायिक) |
|---|---|---|
| दिल्ली | ₹913 | ₹1883 |
| मुंबई | ₹912.50 | ₹1835 |
| पटना | ₹1011 | ₹2095 |
| लखनऊ | ₹951 | ₹1998 |
| रांची | ₹910.50 | ₹1876 |
| कोलकाता | ₹970 | ₹2042 |
| चेennai | ₹939 | ₹1995 |
| बेंगलुरु | ₹928.50 | ₹2045 |
| चंडीगढ़ | ₹915.50 | ₹1961 |
| नोएडा | ₹922.50 | ₹1905 |
क्यों बढ़े गैस के दाम?
गैस की कीमतों में इस उछाल के पीछे मुख्य कारण पश्चिमी एशिया में सैन्य तनाव है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का 70% से अधिक भाग ईरान, कतार और UAE जैसे देशों से आयात करता है जो ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ के रास्ते से आता है। ईरान द्वारा इस मार्ग को ब्लॉक करने से 28 फरवरी से गैस आपूर्ति बाधित हो गई है।
आम आदमी पर प्रभाव
इस वृद्धि का सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ता है। घरेलू उपभोग के लिए 14.2 किलो के सिलेंडर की कीमत 60 रुपये बढ़ी है, जबकि व्यावसायिक उपयोग के लिए 19 किलो के सिलेंडर की कीमत 115 रुपये बढ़ी है। इसका असर खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ सकता है, क्योंकि रेस्टोरेंट और होटल अपने खर्चों को कम से कम से कम कर सकते हैं।









