Tags

बिना पेड़ों वाला देश! कतर और ओमान में बिना जंगल कैसे जिंदा हैं लोग? वजह जानकर चौंक जाएंगे आप

ओमान में पेड़ लगाने के प्रयासों में राष्ट्रीय स्तर पर 10 मिलियन पेड़ लगाने की पहल, देशभर में देशज प्रजातियों का रोपण, धौफार में ग्रीन बेल्ट परियोजना और मैंग्रोव विस्तार शामिल हैं। इन योजनाओं का लक्ष्य रेगिस्तान से लड़ना, जैव विविधता बढ़ाना और कार्बन उत्सर्जन घटाना है.

By Pinki Negi

know about the countries with no trees how people survive and get oxygen unknown facts

जब हम प्रकृति की कल्पना करते हैं, तो आंखों के सामने हरे-भरे पेड़, ठंडी छांव और ताजी हवा का दृश्य आता है. लेकिन दुनिया में कुछ ऐसे देश भी हैं, जहां पेड़ लगभग नहीं के बराबर हैं. इसके बावजूद वहां जीवन सामान्य ढंग से चलता है. कतर, ओमान और ग्रीनलैंड जैसे देशों की कहानी इस बात का सबूत है कि इंसानी जिंदगी सिर्फ जंगलों पर नहीं, बल्कि जलवायु, संसाधनों और तकनीक पर भी निर्भर करती है.

कतर: रेगिस्तान के बीच आधुनिक देश

कतर को अक्सर “बिना पेड़ों वाला देश” कहकर चर्चा में लाया जाता है. इसकी सबसे बड़ी वजह है वहां की शुष्क जलवायु, बहुत कम बारिश, तेज गर्मी और रेतीली जमीन. ऐसी परिस्थितियों में पेड़ों का प्राकृतिक रूप से पनपना बेहद कठिन हो जाता है. देश का बड़ा हिस्सा रेगिस्तान है, इसलिए हरियाली सीमित है और जंगल तो लगभग नाम के बराबर हैं.

फिर भी कतर में जीवन पूरी तरह व्यवस्थित है. इसकी वजह है भारी आर्थिक ताकत, आधुनिक शहरी ढांचा और जल प्रबंधन की उन्नत व्यवस्था. समुद्री जल को शुद्ध कर पीने लायक बनाया जाता है, जिसे डिसेलिनेशन कहा जाता है. इसी तकनीक ने पानी की कमी से निपटने में कतर को बड़ा सहारा दिया है. इसके अलावा, कृत्रिम सिंचाई और ग्रीन टेक्नोलॉजी के जरिए कुछ जगहों पर हरियाली बढ़ाने की कोशिश भी हो रही है.

कतर की अर्थव्यवस्था तेल और गैस पर आधारित है, जिससे देश को इतना राजस्व मिलता है कि वह रेगिस्तानी हालात में भी दुनिया-स्तर की सुविधाएं खड़ी कर सका है. यही कारण है कि पेड़ कम होने के बावजूद यहां की जीवन-शैली आधुनिक, तेज और सुविधाजनक है.

ओमान: सूखा देश, सीमित हरियाली

ओमान की स्थिति कतर से कुछ अलग है, लेकिन वहां भी अधिकांश इलाके शुष्क और रेगिस्तानी हैं. कुछ हिस्सों में पहाड़, वादियां और तटीय क्षेत्र मिलते हैं, लेकिन व्यापक जंगलों का विकास यहां भी प्राकृतिक रूप से कठिन रहा है. ऐतिहासिक तौर पर कई क्षेत्रों में हरियाली बेहद सीमित रही, और कुछ जगहों पर वन क्षेत्र लगभग शून्य के स्तर तक दर्ज किया गया.

ओमान में भी अब पर्यावरण सुधार की दिशा में काम हुआ है. स्थानीय संस्थाएं और सरकारी प्रयास कृत्रिम तरीके से पेड़ लगाने, पानी के संरक्षण और हरित क्षेत्र बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं. फिर भी यह देश आज भी उन जगहों में गिना जाता है जहां प्राकृतिक जंगल बहुत कम हैं. यहां लोगों की जिंदगी का आधार भी वही है जो कतर में दिखता है- तकनीक, जल प्रबंधन, ऊर्जा संसाधन और बेहतर प्रशासनिक व्यवस्था. इसलिए पेड़ों की कमी के बावजूद जीवन चलता रहता है.

ग्रीनलैंड: नाम हरा, जमीन बर्फीली

ग्रीनलैंड का नाम भले ही हरियाली का एहसास कराता हो, लेकिन सच्चाई बिल्कुल उलटी है. यहां का बड़ा हिस्सा साल भर बर्फ से ढका रहता है. इतनी अधिक ठंड के कारण बड़े पेड़ उग ही नहीं पाते. कुछ जगहों पर छोटी झाड़ियां या बहुत कम वनस्पति जरूर मिलती है, लेकिन घने जंगल यहां लगभग नहीं हैं. इस नाम के पीछे एक ऐतिहासिक कारण भी बताया जाता है. कहा जाता है कि लोगों को आकर्षित करने के लिए इस जगह को “ग्रीनलैंड” नाम दिया गया था, ताकि नाम सुनकर यह रहने लायक और उपजाऊ लगे. मगर वास्तविकता बर्फ, ठंड और कठोर जलवायु की है.

पेड़ों के बिना जीवन कैसे चलता है

सबसे बड़ा सवाल यही है कि पेड़ों के बिना भी लोग कैसे जीते हैं. इसका जवाब है- प्रकृति की दूसरी व्यवस्थाएं और मानव तकनीक. जहां जंगल नहीं होते, वहां भी हवा समुद्री जलवायु, खुले क्षेत्र और मौसमीय संतुलन से चलती रहती है. ऑक्सीजन पूरी धरती के वातावरण का हिस्सा है, इसलिए किसी एक देश में पेड़ों की कमी से वहां रहने वाले लोगों के लिए तुरंत सांस लेने की समस्या नहीं बनती.

असल चुनौती पानी, गर्मी और रहने की परिस्थितियों की होती है. कतर और ओमान जैसे देश इसी चुनौती को तकनीक, संसाधनों और योजनाबद्ध विकास के जरिए संभालते हैं. वे दिखाते हैं कि इंसान कठिन से कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में भी आधुनिक व्यवस्था बना सकता है.

क्या यह प्रकृति के खिलाफ जीत है

यह कहानी केवल “पेड़ों की कमी” की नहीं, बल्कि मानव अनुकूलन की भी है. कतर और ओमान जैसे देश बताते हैं कि जीवन का रास्ता हमेशा जंगलों से होकर नहीं गुजरता. जहां प्रकृति सख्त हो, वहां इंसान तकनीक से रास्ता निकाल लेता है. लेकिन यह भी सच है कि ऐसे देशों में हरियाली बढ़ाना भविष्य के लिए जरूरी है, क्योंकि पेड़ सिर्फ सुंदरता नहीं, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन की नींव हैं.

इसी वजह से दुनिया के इन अनोखे देशों को देखकर एक बात साफ होती है- पेड़ कम हों तो भी जीवन रुकता नहीं, लेकिन पेड़ों की अहमियत कभी कम नहीं होती.

Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

अभी-अभी मोदी का ऐलान

हमारे Whatsaap ग्रुप से जुड़ें