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Solar Pump Benefits: डीजल का खर्चा खत्म! सोलर पंप से एक घंटे की सिंचाई में बचेंगे इतने पैसे, किसानों के लिए वरदान है ये तकनीक

उत्तर प्रदेश के किसान अब सोलर पंप से डीजल के महंगे जाल से मुक्त हो रहे हैं। एक घंटे सिंचाई में 100-200 रुपये बचत हो रही है, पीएम कुसुम योजना से 90% सब्सिडी मिल रही है। संतकबीरनगर में लाखों लीटर डीजल बचा, आय दोगुनी और पर्यावरण सुरक्षित। मेरठ जैसे क्षेत्रों में जागरूकता बढ़ी, आत्मनिर्भर खेती का नया दौर शुरू।

By Pinki Negi

Solar Pump Benefits: डीजल का खर्चा खत्म! सोलर पंप से एक घंटे की सिंचाई में बचेंगे इतने पैसे, किसानों के लिए वरदान है ये तकनीक

उत्तर प्रदेश के किसान लंबे समय से सिंचाई के महंगे डीजल पंपों की मार झेल रहे हैं। हर सीजन हजारों रुपये का डीजल खर्च खेती की कमर तोड़ देता है, लेकिन अब सोलर पंप ने यह तस्वीर बदल दी है। डीजल का खर्चा शून्य हो गया है और एक घंटे की सिंचाई से 100-200 रुपये की सीधी बचत हो रही है। प्रधानमंत्री कुसुम योजना के तहत सरकार की मेहरबानी से यह तकनीक छोटे किसानों तक पहुंच रही है, जो न सिर्फ लागत घटा रही है बल्कि आय के नए द्वार खोल रही है।

सिंचाई का बढ़ता बोझ

खेती में सिंचाई का खर्चा हमेशा से किसानों की सबसे बड़ी परेशानी रहा है। एक सामान्य 1 एचपी डीजल पंप एक घंटे में 1 से 1.5 लीटर डीजल चूस लेता है, जिसकी कीमत आजकल 100 से 150 रुपये तक बैठती है। अगर एक सीजन में 150 दिन सिंचाई करें तो हजारों लीटर डीजल यानी लाखों रुपये उड़ जाते हैं। संतकबीरनगर जैसे जिलों में 715 सोलर पंप लगने से ही 4.83 लाख लीटर डीजल की बचत हो चुकी है।

डीजल न सिर्फ जेब खाली करता है बल्कि प्रदूषण फैलाकर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाता है- हर लीटर डीजल से 720 ग्राम कार्बन गैस निकलती है और 1920 ग्राम ऑक्सीजन खपत होती है। ऐसे में सोलर पंप किसानों के लिए सच्चा वरदान साबित हो रहा है।

शून्य खर्च की क्रांति

सोलर पंप लगाने पर परिचालन खर्च बिल्कुल जीरो हो जाता है। सूरज की मुफ्त रोशनी से दिन भर सिंचाई हो जाती है, बिना किसी बिजली बिल या डीजल की टेंशन के। विशेषज्ञों का कहना है कि एक घंटे की सिंचाई से डीजल पंप के मुकाबले 100-200 रुपये की बचत आसानी से हो जाती है। पूरे सीजन में यह रकम हजारों रुपये तक पहुंच जाती है।

मध्य प्रदेश में 52,000 किसानों को 90 फीसदी सब्सिडी मिल रही है, जहां 4.68 लाख रुपये का 5 एचपी पंप महज 58,000 रुपये में लग रहा है। उत्तर प्रदेश में भी पीएम कुसुम-बी योजना के तहत 60-90 फीसदी अनुदान उपलब्ध है। आवेदन dbt-kusum.mnre.gov.in पोर्टल पर आसानी से किया जा सकता है।

आय दोगुनी, पर्यावरण सुरक्षित

इसका फायदा सिर्फ सिंचाई तक सीमित नहीं। सोलर सिस्टम से अतिरिक्त बिजली बनाकर ग्रिड को बेचने का मौका मिलता है, जो किसानों की आय दोगुनी कर देता है। दतिया जिले के किसान रामेश्वर कुशवाहा जैसे सैकड़ों किसान बता रहे हैं कि तीन सोलर पंप लगाने से उनकी जिंदगी बदल गई- ना बिजली बिल, ना डीजल खर्च। सोलर पंप पर्यावरण के दोस्त भी हैं: कोई धुआं, कोई शोर नहीं। 5 साल तक फ्री मेंटेनेंस और 25 साल की उम्र इसे टिकाऊ बनाती है। छोटे-सीमांत किसान धूप वाले क्षेत्रों में इसे प्राथमिकता दें, मॉनसून के लिए बैकअप रखें।

आत्मनिर्भर खेती की ओर

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि सोलर पंप से भारत का कृषि क्षेत्र डीजल मुक्त हो सकता है। 34,800 मेगावाट सौर क्षमता का लक्ष्य मार्च 2026 तक पूरा होने से लाखों किसानों को फायदा होगा। मेरठ जैसे क्षेत्रों में भी जागरूकता बढ़ रही है। सरकार का यह कदम खेती को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में मील का पत्थर है। किसान भाइयों, देर न करें- योजना का लाभ उठाएं और सूरज की ताकत से समृद्ध हों।

Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

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