
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत करोड़ों लघु एवं सीमांत किसानों की निगाहें अगली 23वीं किस्त पर टिकी हैं। केंद्र सरकार ने इस योजना के जरिए किसानों को सालाना 6,000 रुपये की आर्थिक सहायता देने का वादा किया है, जो तीन समान किस्तों में सीधे उनके बैंक खातों में भेजी जाती है। लेकिन 18 अप्रैल 2026 तक उपलब्ध अपडेट्स के मुताबिक, 22वीं किस्त 13 मार्च को असम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा जारी की गई थी, जबकि 23वीं किस्त जून-जुलाई 2026 तक आने की संभावना है।
समस्या यह है कि सख्त वेरिफिकेशन प्रक्रिया के चलते लाखों किसानों के नाम लाभार्थी सूची से काट दिए गए हैं। अगर आप भी योजना के लाभार्थी हैं, तो समय रहते अपनी स्थिति जांच लें, वरना आपका हक का 2,000 रुपये का भुगतान अटक सकता है।
नाम कटने की प्रमुख वजहें
सरकार ने पारदर्शिता और डुप्लिकेट लाभ को रोकने के लिए डिजिटल वेरिफिकेशन पर जोर दिया है। सबसे बड़ी वजह e-KYC का पूरा न होना है। आधिकारिक पोर्टल pmkisan.gov.in पर स्पष्ट निर्देश हैं कि बिना e-KYC या फार्मर आईडी के कोई किस्त जारी नहीं होगी। लाखों किसानों ने मोबाइल OTP, फेस ऑथेंटिकेशन या बायोमेट्रिक के जरिए यह प्रक्रिया पूरी नहीं की, जिससे उनकी 22वीं किस्त तक अटकी रही।
इसके अलावा, लैंड सीडिंग यानी जमीन के सरकारी रिकॉर्ड का पोर्टल से लिंक न होना भी प्रमुख कारण है। कई राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश और बिहार में भू-रिकॉर्ड अपडेट न होने से किसानों की किस्तें बीच रास्ते में लौट आईं। पिछले वेरिफिकेशन ड्राइव में 35 से 70 लाख नाम काटे गए, जिनमें डुप्लिकेट क्लेम, गलत जानकारी या अपात्रता शामिल थी।
बैंक और अपात्रता संबंधी समस्याएं
अपात्रता के अन्य कारणों में बैंक खाते का आधार से लिंक न होना या खाता निष्क्रिय पड़ा होना प्रमुख है। डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) सिस्टम में आधार-सीडेड एक्टिव बैंक अकाउंट अनिवार्य है। अगर खाते में तकनीकी खराबी है या लंबे समय से ट्रांजेक्शन न हुआ हो, तो पेमेंट फेल हो जाता है। सरकार ने अब उन किसानों पर नजर रखी है, जिनके परिवार में आयकर दाता, सरकारी कर्मचारी या संवैधानिक पदाधिकारी हैं। एक ही जमीन पर कई सदस्यों का लाभ लेना या 2019 के बाद अधिग्रहीत भूमि पर क्लेम भी सख्ती का शिकार हो रहा है।
AgriStack और किसान रजिस्ट्री जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से क्रॉस-वेरिफिकेशन हो रहा है, जिससे गलत लाभार्थियों से पुरानी किस्तों की वसूली भी शुरू हो गई है। बिहार में ही 73 लाख किसानों को 22वीं किस्त मिली, लेकिन 23वीं के लिए संख्या घट सकती है।
तुरंत अपडेट के आसान स्टेप्स
किसानों को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए। सबसे पहले pmkisan.gov.in पर ‘Know Your Status‘ ऑप्शन चुनें, अपना रजिस्ट्रेशन नंबर, मोबाइल और कैप्चा डालकर स्टेटस चेक करें। अगर e-KYC पेंडिंग है, तो ‘e-KYC’ सेक्शन में आधार नंबर डालकर OTP से वेरिफाई करें। CSC सेंटर या तहसील कार्यालय जाकर फेस/फिंगरप्रिंट ऑथेंटिकेशन कराएं। लैंड रिकॉर्ड के लिए ब्लॉक ऑफिस में जाकर ‘Yes’ स्टेटस सुनिश्चित करें।
बैंक डिटेल्स अपडेट के लिए नजदीकी शाखा में संपर्क करें। हेल्पलाइन नंबर 155261 या 011-24300606 पर कॉल करें। देरी से बचने के लिए 8 मार्च 2026 तक e-KYC पूरा करने की मोहलत दी गई थी, लेकिन अब और सतर्क रहें।
पारदर्शिता के फायदे और आगे की राह
ये कदम न सिर्फ पारदर्शिता बढ़ाते हैं, बल्कि वास्तविक किसानों तक मदद पहुंचाते हैं। सरकार का ‘सैचुरेशन कैंपेन’ असली लाभार्थियों को शामिल करने पर केंद्रित है। अगर आपका नाम कटा है, तो पोर्टल पर अपील दर्ज करें या स्थानीय अधिकारी से संपर्क करें। समय रहते अलर्ट रहें, क्योंकि लापरवाही महंगी पड़ सकती है। योजना से अब तक 11 करोड़ से ज्यादा किसान जुड़े हैं, लेकिन सत्यापन के बाद सही संख्या तय होगी। किसान भाइयों, अपनी मेहनत की कमाई को सुरक्षित रखें- डिजिटल अपडेट आपका हथियार है।









