
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की रहस्यमयी मौत के बाद पश्चिम एशिया में छिड़ी जंग ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को हिला दिया है। ईरान की ओर से इजरायल और अमेरिकी ठिकानों पर ड्रोन-मिसाइल बरसाने का सिलसिला जारी है, तो जवाब में इजरायल-अमेरिका की बमबारी ने तनाव को चरम पर पहुंचा दिया। भारत जैसे कृषि प्रधान देश के लिए यह सबसे बड़ा खतरा साबित हो रहा है, जहां यूरिया उत्पादन पर गैस सप्लाई निर्भर है।
दक्षिण भारत के प्रमुख उर्वरक सप्लायर FACT के एमडी एस शक्तिमणि ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि खरीफ सीजन के लिए यूरिया का स्टॉक पर्याप्त है, लेकिन छह महीने लंबा युद्ध संकट पैदा कर सकता है।
पश्चिम एशिया में तनाव की आग
मध्यप्रदेश से केरल दौरे पर आए पत्रकारों से बातचीत में शक्तिमणि ने कहा, “अभी लड़ाई के दौरान कोई फसल सीजन नहीं है। खरीफ जुलाई से शुरू होगा, उसके लिए पर्याप्त यूरिया उपलब्ध है।” FACT, जो बंदरगाह नगरी कोच्चि में स्थित है, दक्षिणी राज्यों में उर्वरकों की मुख्य आपूर्तिकर्ता है। ईरान-इजरायल युद्ध से LNG सप्लाई बाधित होने के बावजूद उन्होंने आश्वासन दिया कि गैस लाइन में फिलहाल कोई बड़ी समस्या नहीं। “कुछ अस्थिरता है, लेकिन उर्वरक उत्पादन प्रभावित नहीं हो रहा। हम पश्चिम एशिया के अलावा आस्ट्रेलिया से भी गैस लेते हैं।”
स्टॉक की मजबूत स्थिति
FACT के पास वर्तमान में 1.4 लाख मीट्रिक टन उर्वरक भंडार है, जिसमें NP 20:20:0:13, अमोनियम सल्फेट, DAP, TSP और NPK 15:15:15 शामिल हैं। मार्च-अप्रैल 2026 के लिए 1.5 लाख मीट्रिक टन उत्पादन हेतु कच्चा माल भी जमा है। केंद्र सरकार ने DAP-DSP का अलग स्टॉक रखा है। शक्तिमणि ने कहा, “यह अस्थायी चरण है। सरकार के सहयोग से किसानों की हर जरूरत पूरी करेंगे।”
उत्पादन पर संकट की आशंका
पिछले डेटा से साफ है कि खरीफ 2025 में यूरिया उपलब्धता 230 लाख मीट्रिक टन थी, जबकि जरूरत 185 लाख थी। लेकिन ईरान संकट से भारत में उत्पादन 7-8% गिरा है, क्योंकि 80% यूरिया LNG पर निर्भर है। ग्लोबल कीमतें $470 से $550/टन पहुंचीं, LNG महंगा होने से सब्सिडी बोझ बढ़ा। यदि युद्ध एक महीने में न थमा, तो खरीफ सुरक्षित रहेगा, लेकिन रबी (अक्टूबर-मई) में दिक्कत हो सकती है।
किसानों पर असर
भारत में सालाना 35-40 मिलियन टन यूरिया खपत होती है, खरीफ (जून-अक्टूबर) में धान-मक्का जैसी फसलें इसका 60% इस्तेमाल करती हैं। ईरान जंग से खाड़ी देशों की गैस सप्लाई चुप्पी साध गई, जिसका असर IFFCO जैसी कंपनियों पर पड़ा। विश्लेषक चेताते हैं कि लंबे संघर्ष से खाद संकट गहराएगा, वैश्विक अर्थव्यवस्था को अरबों का नुकसान। भारत सरकार वैकल्पिक आयात पर विचार कर रही है।
FACT का भरोसा और सलाह
शक्तिमणि ने स्पष्ट कहा, “हम आपूर्ति सुनिश्चित करेंगे, यह हमारा कर्तव्य है।” FACT जैसी PSUs ने स्टॉक बढ़ाया है। किसानों को सलाह: अधिकृत वितरकों से बुकिंग करें, नेमेटेड यूरिया या जैविक खाद अपनाएं। सरकारी पोर्टल urea.nfsm.gov.in चेक करें। फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं, लेकिन निगाह युद्ध पर। यदि छह महीने चला, तो रबी फसलों पर असर पड़ेगा। कृषि क्षेत्र, जो 50% आबादी का भरण-पोषण करता है, उर्वरकों पर टिका है। सरकार कदम उठा रही है।









