
आंध्र प्रदेश समेत देश के कई हिस्सों में अचानक पेट्रोल पंपों पर “नो फ्यूल” या “स्टॉक खत्म” के बोर्ड लगने के बाद पूरे देश में यह सवाल गूंज उठा है कि कहीं सच में भारत भी पेट्रोल‑डीजल की किल्लत और ईंधन संकट के दौर से नहीं गुजरने वाला। वैश्विक स्तर पर ईरान‑अमेरिका व इजराइल के बीच जारी तनाव के बीच पाकिस्तान सहित कई देशों में लॉकडाउन जैसी स्थिति बन चुकी है, जबकि गैस और तेल के दाम इतनी तेजी से बढ़े हैं कि आम उपभोक्ता भी दहशत में है।
ऐसे में जब आंध्र प्रदेश में 400 से अधिक पेट्रोल पंपों पर तेल खत्म होने की शिकायत आई और कई जगह पंप बंद हो गए तो राज्य सरकार ने भी तुरंत संज्ञान लेना शुरू कर दिया।
आंध्र प्रदेश में “ईंधन संकट” जैसी स्थिति
आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा, गुंटूर, राजमुंद्री, कुरनूल और नेल्लोर सहित कई शहरों में रविवार व उसके आसपास के दिनों में पेट्रोल पंपों पर भारी भीड़ देखी गई, जहां लोगों ने टैंक 100% भरवाना शुरू कर दिया। अधिकारियों का कहना है कि इन दिनों में पेट्रोल‑डीजल की उपभोग की मात्रा सामान्य से लगभग दोगुनी तक चली गई, जिससे कई डिपो और डीलरों के स्टॉक एकाएक खत्म हो गए।
राज्य में कुल लगभग 4,510 पेट्रोल पंपों में से 421 पर स्टॉक खत्म होने की वजह से पंप बंद करने पड़े या “नो फ्यूल” का बोर्ड लगाया जाना पड़ा। डीप क्लियर रूप से कहा जा रहा है कि यह स्थिति “वैश्विक तनाव” नहीं, बल्कि अफवाहों के बाद लोगों की घबराहट भरी खरीदारी की दी गई उपज है।
सोशल मीडिया, अफवाह और घबराहट खरीद
वीकेंड के दिनों में व्हाट्सऐप, फेसबुक और टेलीग्राम पर कई पोस्ट वायरल होने लगे, जिनमें दावा किया गया कि ईरान‑अमेरिका युद्ध और इजराइल के बीच बढ़ रहा तनाव आने वाले दिनों में ईंधन की वैश्विक आपूर्ति पर भारी दबाव डालेगा और भारत में भी पेट्रोल‑डीजल समाप्त होने लगेगा। इन अफवाहों से परेशान लोग तुरंत पेट्रोल पंपों पर पहुंचने लगे, टैंक भरवा कर ईंधन की अतिरिक्त मात्रा खरीदने लगे।
आंध्र प्रदेश पेट्रोल डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष गोपाल कृष्ण ने बताया कि कई पंपों पर औसत दिनभर की डीजल बिक्री 7,000 लीटर के आसपास रहती थी, लेकिन अफवाह के बाद यह आंकड़ा 14,000 लीटर से ज्यादा पहुंच गया, जिससे स्टॉक एकाएक खाली हो गए।
पंपों पर तनाव, उत्पीड़न और जनजीवन अस्त‑व्यस्त
कई जगहों पर लंबी लाइनें लगने के बाद वाहन चालकों और पंप कर्मचारियों के बीच तीखी झड़पें भी सामने आईं। पर्यटन स्थल तिरुमाला के आसपास भी दो पेट्रोल पंपों पर स्टॉक खत्म होने के कारण परिवहन व्यवस्था प्रभावित हुई, जिससे तीर्थ यात्रियों का भी समय बर्बाद हुआ। विजयवाड़ा, गुंटूर और राजमुंद्री जैसे बड़े शहरों में ऑटो और ट्रक चालकों को लंबे समय तक ईंधन के लिए इंतजार करना पड़ा, जिससे उनकी रोजमर्रा की कमाई भी धरातल पर आ गई।
बड़ी बात यह है कि राज्य सरकार को यह तस्वीर देखकर लगने लगा कि यह केवल “स्टॉक खत्म” नहीं है, बल्कि सार्वजनिक व्यवस्था को लेकर जनता में व्यापक असंतोष और विश्वास की कमी बन रही है, जिस पर तुरंत नियंत्रण की आवश्यकता है।
सीएम ने तुरंत एक्शन लिया
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने इस बात पर तुरंत संज्ञान लेते हुए जिला कलेक्टरों को निर्देश दिया कि वे तेल की कमी से जुड़ी समस्याओं पर तत्काल एक कार्य योजना बनाकर लागू करें और सोमवार शाम तक सभी विभागों से की गई कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करें। सीएम ने मुख्य सचिव जी साई प्रसाद और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ टेलीकॉन्फ्रेंस भी की, जिसमें अधिकारियों ने बताया कि शनिवार को राज्य के डिपो में 10,345 किलो लीटर पेट्रोल और 14,156 किलो लीटर डीजल की आपूर्ति की गई, लेकिन घबराकर खरीदारी और अफवाहों के चलते इस स्टॉक को सामान्य तरीके से डिस्ट्रीब्यूट करना संभव नहीं हो पाया।
केंद्र सरकार और तेल कंपनियों का संदेश
इस दौरान केंद्र सरकार और सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों के बीच एक स्पष्ट रूप से दोहराया जा रहा है कि देश में पेट्रोल‑डीजल और LPG की कोई राष्ट्रीय स्तर पर कमी नहीं है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने लगातार जोर देकर कहा है कि यह अफवाहों पर आधारित “पैनिक बाइंग” का नतीजा है, न कि तेल की वास्तविक घाटा का।
इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और एचपीसीएल जैसी कंपनियों ने भी बयान जारी करके लोगों से अपील की है कि वे घबराकर ईंधन की ज्यादा खरीदारी न करें और जरूरत के हिसाब से ही टैंक भरें। अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में चरम स्थितियां वास्तव में भारत को प्रभावित कर सकती हैं, लेकिन फिलहाल राष्ट्रीय स्तर पर ईंधन की पूर्ति सामान्य बताई जा रही है।





