
स्कूल एडमिशन के मौसम में एक सवाल सबसे ज्यादा पूछा जा रहा है- क्या APAAR ID के बिना बच्चे का दाखिला नहीं होगा? NCERT ने इस भ्रम पर साफ कहा है कि यह दावा गलत है, क्योंकि APAAR ID स्कूल प्रवेश के लिए अनिवार्य नहीं है। केंद्रीय विद्यालय, नवोदय विद्यालय, CBSE और अन्य स्कूलों में APAAR ID का इस्तेमाल छात्रों के शैक्षणिक रिकॉर्ड को डिजिटल रूप से सुरक्षित रखने और उन्हें एक जगह व्यवस्थित करने के लिए किया जाता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि एडमिशन के समय बच्चे के पास यह ID होना ही चाहिए।
NCERT का साफ जवाब
NCERT ने अपने आधिकारिक बयान में कहा है कि APAAR ID के बिना भी बच्चे का प्रवेश हो सकता है। संस्था के अनुसार, यह व्यवस्था स्कूलों को छात्र के रिकॉर्ड को सुरक्षित तरीके से संभालने में मदद करती है, लेकिन यह किसी भी बच्चे के स्कूल में दाखिला लेने के अधिकार में बाधा नहीं डालती। यह स्पष्टीकरण इसलिए अहम है क्योंकि कई अभिभावक एडमिशन के समय बाकी दस्तावेजों की तरह APAAR ID को भी जरूरी मानने लगे थे। NCERT ने यह स्पष्ट कर दिया है कि दाखिले के लिए इसे अनिवार्य दस्तावेज नहीं माना जा सकता।
APAAR ID क्या है
APAAR यानी Automated Permanent Academic Account Registry, जिसे “वन नेशन, वन स्टूडेंट ID” पहल के तहत विकसित किया गया है। इसका उद्देश्य छात्र की शैक्षणिक पहचान को डिजिटल रूप से एकीकृत करना है, ताकि उसके स्कूल रिकॉर्ड, ट्रांसफर, उपलब्धियों और प्रमाणपत्रों को एक ही जगह सुरक्षित रखा जा सके।
यह व्यवस्था आगे चलकर छात्रों के लिए रिकॉर्ड ट्रैकिंग, दस्तावेज़ सत्यापन और शैक्षणिक निरंतरता को आसान बना सकती है। इसी वजह से स्कूलों में इसके बारे में जागरूकता बढ़ाई जा रही है।
एडमिशन और APAAR ID का संबंध
कई स्कूल APAAR ID का उपयोग रिकॉर्ड-मैनेजमेंट के लिए करते हैं, लेकिन यह अलग बात है कि वह एडमिशन की शर्त हो। NCERT के स्पष्टीकरण के अनुसार, बच्चे का दाखिला APAAR ID के बिना भी संभव है, इसलिए माता-पिता को इस मुद्दे पर अनावश्यक दबाव नहीं लेना चाहिए।
यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि कुछ शैक्षणिक प्रक्रियाओं, ट्रांसफर या आगे चलकर बोर्ड-स्तरीय रिकॉर्ड में APAAR ID की उपयोगिता बढ़ सकती है। लेकिन स्कूल में पहली बार प्रवेश लेने के लिए इसे बाध्यता नहीं माना गया है।
APAAR ID कैसे बनती है
APAAR ID स्कूल के जरिए भी बनाई जा सकती है और DigiLocker के माध्यम से भी। इसके लिए आधार-लिंक्ड मोबाइल नंबर और आवश्यक विवरणों की जरूरत पड़ती है। आम तौर पर वेरिफिकेशन के बाद ID जारी की जाती है और उसे DigiLocker में देखा जा सकता है। नाबालिग छात्रों के मामले में अभिभावक की सहमति जरूरी हो सकती है। इसलिए यह एक डिजिटल शैक्षणिक पहचान है, जिसे सुविधा के लिए बनाया गया है, न कि प्रवेश रोकने के लिए।
माता-पिता को क्या समझना चाहिए
एडमिशन के समय माता-पिता को सबसे पहले स्कूल के मूल दस्तावेज़ों पर ध्यान देना चाहिए। APAAR ID को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि आधिकारिक स्पष्टीकरण के मुताबिक यह दाखिले की शर्त नहीं है। अगर कोई स्कूल इसे जरूरी बताता है, तो अभिभावक लिखित आधार पर स्पष्टीकरण मांग सकते हैं। फिलहाल उपलब्ध आधिकारिक जानकारी यही कहती है कि हर बच्चे को सरल और तनाव-मुक्त शिक्षा पाने का अधिकार है।









