
देश में एलपीजी सप्लाई को लेकर सरकार ने जिस तरह का अपडेट दिया है, वह करोड़ों घरेलू उपभोक्ताओं के लिए राहत भरा संकेत है। पेट्रोलियम मंत्रालय के ताज़ा आंकड़े बताते हैं कि बुकिंग और डिलीवरी सिस्टम अब पहले से कहीं ज्यादा डिजिटल, तेज और पारदर्शी हो चुका है, जबकि देश में गैस की कमी को लेकर फैली आशंकाओं को सरकार ने खारिज किया है।
नई दिल्ली में बड़ा अपडेट
नई दिल्ली: देश में रसोई गैस यानी एलपीजी (LPG) की सप्लाई को लेकर केंद्र सरकार ने बड़ा और राहत भरा अपडेट दिया है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के मुताबिक, अब देशभर में करीब 99% एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग ऑनलाइन हो रही है, जिससे उपभोक्ताओं को घर बैठे मोबाइल ऐप, वेबसाइट, व्हाट्सऐप या अन्य डिजिटल माध्यमों से सिलेंडर बुक करने की सुविधा मिल रही है। सरकार का कहना है कि डिजिटल बुकिंग ने पूरी प्रक्रिया को न सिर्फ आसान बनाया है, बल्कि पारदर्शिता भी बढ़ाई है।
डिलीवरी सिस्टम में बदलाव
मंत्रालय के अनुसार, एलपीजी डिलीवरी सिस्टम में भी बड़ा बदलाव आया है। अब 94.5% से अधिक डिलीवरी OTP आधारित सत्यापन के जरिए की जा रही है। यानी सिलेंडर की डिलीवरी तभी पूरी मानी जाएगी जब ग्राहक अपने रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर आए वन टाइम पासवर्ड को साझा करेगा। इस व्यवस्था से फर्जी डिलीवरी, गलत एंट्री और गड़बड़ी की संभावना काफी हद तक कम हो गई है। सरकार का दावा है कि इस डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम ने उपभोक्ताओं का भरोसा भी बढ़ाया है और डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क को ज्यादा सुरक्षित बनाया है।
सप्लाई पर सरकार का भरोसा
सरकार ने साफ किया है कि देश में कहीं भी एलपीजी की कमी या ड्राई-आउट जैसी स्थिति नहीं है। घरेलू उपयोग के लिए गैस सप्लाई को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है, ताकि हर घर तक समय पर सिलेंडर पहुंच सके। हाल के दिनों में पश्चिम एशिया की भू-राजनीतिक स्थिति को लेकर चिंता जरूर बनी थी, लेकिन मंत्रालय ने भरोसा दिलाया है कि भारत की आपूर्ति व्यवस्था पर्याप्त रूप से मजबूत है और किसी तरह का संकट नहीं है। इसके साथ ही पेट्रोल और डीजल का भी पर्याप्त स्टॉक रखा गया है और देश की रिफाइनरियां पूरी क्षमता पर काम कर रही हैं।
PNG का तेज विस्तार
एलपीजी सप्लाई के साथ-साथ पाइप्ड नेचुरल गैस यानी PNG का विस्तार भी तेजी से हो रहा है। मंत्रालय के मुताबिक, पिछले महीने से अब तक 5.36 लाख से ज्यादा नए PNG कनेक्शन चालू किए गए हैं। इसके अलावा लगभग 2.61 लाख कनेक्शनों के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर भी तैयार किया जा चुका है। कुल मिलाकर यह विस्तार करीब 7.97 लाख इकाइयों तक पहुंच गया है। साथ ही लगभग 6 लाख नए उपभोक्ताओं ने PNG कनेक्शन के लिए रजिस्ट्रेशन कराया है, जो यह दिखाता है कि शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में लोग अब धीरे-धीरे पाइप्ड गैस की ओर बढ़ रहे हैं।
उपभोक्ताओं की बदलती पसंद
दिलचस्प बात यह है कि अब तक 42,000 से ज्यादा उपभोक्ता अपने एलपीजी कनेक्शन को सरेंडर कर PNG अपना चुके हैं। विशेषज्ञ इसे ऊर्जा खपत के व्यवहार में बड़ा बदलाव मान रहे हैं। शहरी इलाकों में PNG को ज्यादा सुविधाजनक, साफ-सुथरा और लंबे समय में अधिक भरोसेमंद विकल्प माना जा रहा है। पाइपलाइन आधारित गैस सप्लाई से सिलेंडर की निर्भरता भी कम होती है, जिससे उपभोक्ताओं को बार-बार बुकिंग और डिलीवरी की चिंता नहीं करनी पड़ती।
नीति और निगरानी
सरकार का कहना है कि गैस सप्लाई सिस्टम को मजबूत करने के लिए सिर्फ वितरण ही नहीं, बल्कि नीति स्तर पर भी कई कदम उठाए गए हैं। कमर्शियल एलपीजी के आवंटन को संकट से पहले के स्तर के लगभग 70% तक बढ़ाया गया है। कुछ राज्यों में प्रवासी मजदूरों के लिए छोटे 5 किलो वाले सिलेंडरों की उपलब्धता भी बढ़ाई गई है। वहीं, जिन क्षेत्रों में PNG इंफ्रास्ट्रक्चर तेजी से विकसित हो रहा है, उन्हें अतिरिक्त गैस आवंटन का लाभ दिया जा रहा है। इससे संकेत मिलता है कि सरकार आपूर्ति को केवल बनाए रखने के नहीं, बल्कि उसे भविष्य के लिए स्थिर और विविध बनाने की रणनीति पर काम कर रही है।
अंतरराष्ट्रीय हालात पर नजर
अंतरराष्ट्रीय हालात को देखते हुए विदेश मंत्रालय भी सतर्क है। पश्चिम एशिया में तनाव और उससे जुड़ी ऊर्जा आपूर्ति की आशंकाओं के बीच भारत अपने नागरिकों की सुरक्षा और वैकल्पिक सप्लाई चैनल पर लगातार नजर बनाए हुए है। हजारों भारतीयों को सुरक्षित निकाला भी जा चुका है। यह दर्शाता है कि सरकार ऊर्जा सुरक्षा और नागरिक सुरक्षा, दोनों मोर्चों पर समन्वित तरीके से काम कर रही है।





