
भारतीय एविएशन उद्योग लंबे समय से मंदी और वैश्विक संकटों की चपेट में फंसा हुआ था, लेकिन अब सरकार ने एक बड़ा कदम उठाकर इसमें जान फूंक दी है। वित्त मंत्रालय ने करीब 4,000 करोड़ रुपये का इमरजेंसी लोन प्रोग्राम की घोषणा की है, जो ईरान युद्ध से उत्पन्न ऑपरेशनल परेशानियों से जूझ रही एयरलाइंस कंपनियों को सीधा सहारा देगा।
इस स्कीम के तहत हर एयरलाइन को 1,000 करोड़ रुपये तक के लोन पर सरकारी गारंटी मिलेगी, जबकि अतिरिक्त 500 करोड़ के लिए प्रमोटर्स को बराबर राशि खुद निवेश करनी होगी। यह योजना न केवल नकदी संकट से उबारेगी, बल्कि सेक्टर को पटरी पर लाने में मील का पत्थर साबित हो सकती है।
ईरान युद्ध का गहरा असर
पिछले कुछ महीनों में मिडिल ईस्ट में भड़के ईरान युद्ध ने एविएशन कंपनियों की कमर तोड़ दी। जेट फ्यूल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गईं, जबकि दुबई जैसे प्रमुख हब एयरपोर्ट्स पर उड़ानों की सख्त पाबंदियां लगीं। IndiGo जैसी बड़ी कंपनी को स्टाफ की कमी और फ्लाइट कैंसलेशन का सामना करना पड़ा, जिससे दिल्ली-मुंबई जैसे रूट्स पर टिकटों की कीमत 28,000 रुपये तक पहुंच गई। सरकार ने तत्काल घरेलू फेयर कैप (7,500 से 18,000 रुपये) लगाकर यात्रियों को राहत दी, लेकिन कंपनियों की परेशानी बरकरार रही।
खाड़ी देशों की रूट्स से होने वाली मोटी कमाई ठप हो गई, क्योंकि अमेरिका-ईरान के अस्थायी युद्धविराम के बावजूद मध्य-पूर्व के एयरपोर्ट्स सतर्कता बरत रहे हैं। लैंडिंग और पार्किंग शुल्क में 25% कटौती से कंपनियों को 400 करोड़ की तत्काल बचत तो हुई, मगर दीर्घकालिक समाधान की दरकार थी।
SpiceJet पर सबसे भारी बोझ
इस संकट का सबसे ज्यादा असर SpiceJet पर पड़ा है, जो पहले से कैश क्रंच से जूझ रही है। कंपनी के करीब 37 विमान ग्राउंडेड पड़े हैं- लीज रेंट और स्पेयर पार्ट्स की कमी के चलते। 2024 में जुटाए फंड खर्च हो चुके हैं, सैलरी में देरी हो रही है और कर्मचारियों को बिना वेतन छुट्टी पर भेजा जा रहा है।
Jet Airways और Go First के दिवालिया होने के बाद बैंक इस सेक्टर को हाई-रिस्क मान रहे हैं, इसलिए लोन देना मुश्किल हो गया था। सरकार की गारंटी इस डर को दूर करेगी, क्योंकि बैंक अपनी जांच-पड़ताल के बाद ही फंडिंग करेंगे। SpiceJet को सबसे ज्यादा फायदा मिलेगा, जो न केवल फ्लीट बहाल कर सकेगी, बल्कि नई उड़ानों से बाजार में वापसी करेगी।
भविष्य की उम्मीदें और चुनौतियां
यह पैकेज वित्त मंत्रालय की व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जो जियोपॉलिटिकल अस्थिरता से प्रभावित बिजनेस को सहारा दे रही है। 2026 में 50-55 नए विमान जुड़ने और शंख एयर, अल हिंद एयर, फ्लाईएक्सप्रेस जैसी तीन नई एयरलाइंस को मंजूरी से प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। कुल फ्लीट 900 विमानों तक पहुंच सकता है, जिससे सस्ती और विश्वसनीय सेवाएं यात्रियों को मिलेंगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम नुकसान को 30-40% तक कम कर सकता है, खासकर जेट फ्यूल स्थिर होने पर। हालांकि, युद्धविराम की पूरी बहाली तक अनिश्चितता बनी रहेगी।
योजना का जल्द अमल
एविएशन मिनिस्ट्री के सूत्रों के अनुसार, योजना अगले हफ्ते से अमल में आ जाएगी। यात्रियों के लिए यह अच्छी खबर है, क्योंकि फ्लाइट कैंसलेशन घटेंगे और किराए स्थिर होंगे। लेकिन सवाल यह है- क्या यह अस्थायी राहत है या सेक्टर की नई शुरुआत? समय ही बताएगा।









