
मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर है, कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं और भारत जैसे तेल आयातक देश के लिए महंगाई का भूत फिर सिर पर मंडरा रहा है। ऐसे में सरकार ने फ्लेक्स फ्यूल को सड़कों पर उतारने का बड़ा दांव खेला है। सूत्र बताते हैं कि सोमवार को पेट्रोलियम मंत्रालय की हाई-लेवल मीटिंग में तेल कंपनियों और ऑटोमोबाइल दिग्गजों के साथ E85 ब्लेंडिंग का रोडमैप तैयार किया जाएगा। भारत अपनी जरूरत का 85 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है, जिसकी वजह से हर वैश्विक संकट में पेट्रोल-डीजल के दाम आसमान छूते हैं। फ्लेक्स फ्यूल इस निर्भरता को तोड़ने का हथियार बन सकता है।
सरकारी योजना और तेजी से बदलाव
पहले 20 प्रतिशत एथेनॉल ब्लेंडिंग का लक्ष्य 2030 तक था, लेकिन सरकार ने इसे 2025-26 में समेट लिया। अप्रैल 2023 से E20 पूरे देश में उपलब्ध है और 1 अप्रैल 2026 से अनिवार्य होने की खबरें हैं। एथेनॉल पर जीएसटी घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया गया है ताकि इसकी कीमत नियंत्रित रहे। गन्ना, मक्का और चावल जैसे कृषि उत्पादों से बनने वाला एथेनॉल न केवल विदेशी मुद्रा बचाएगा, बल्कि किसानों की आय दोगुनी करने में भी मददगार साबित होगा। केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने जोर देकर कहा है कि फ्लेक्स-फ्यूल इंजन वाले वाहनों का बड़े पैमाने पर उत्पादन जरूरी है।
फ्लेक्स फ्यूल की पूरी व्याख्या
फ्लेक्स फ्यूल आखिर है क्या? इसका नाम ‘फ्लेक्सिबल’ से आया है, जो पेट्रोल और एथेनॉल के किसी भी अनुपात पर चल सकता है। वर्तमान E20 में 80 प्रतिशत पेट्रोल और 20 प्रतिशत एथेनॉल होता है, लेकिन फ्लेक्स फ्यूल वाहन (FFV) E85 तक झेल सकते हैं- यानी 85 प्रतिशत एथेनॉल और मात्र 15 प्रतिशत पेट्रोल। ये इंजन खास सेंसरों से लैस होते हैं जो ईंधन के मिश्रण को ऑटोमैटिक एडजस्ट कर लेते हैं।
एथेनॉल जलने पर कम कार्बन उत्सर्जन करता है, जिससे प्रदूषण में कमी आएगी। ब्राजील जैसे देशों में यह तकनीक दशकों से सफल है, जहां गाड़ियां 100 प्रतिशत एथेनॉल पर भी दौड़ती हैं। भारत में Toyota ने 2022 में Corolla Altis को E20-E85 रेंज के लिए तैयार किया, जबकि Maruti Suzuki ने WagonR का प्रोटोटाइप पेश कर इतिहास रचा।
प्रमुख लॉन्च और ऑटो कंपनियों की भूमिका
नितिन गडकरी ने अगस्त 2023 में दुनिया की पहली BS-VI स्टेज-II इलेक्ट्रिक फ्लेक्स-फ्यूल कार- Toyota Innova- लॉन्च की, जो 100 प्रतिशत एथेनॉल पर चलेगी और 40 प्रतिशत बिजली भी जनरेट करेगी। Bharat Mobility Global Expo 2025 में कई FFV मॉडल प्रदर्शित हुए। Maruti Fronx और WagonR फ्लेक्स-फ्यूल वेरिएंट मार्च 2026 तक बाजार में उतरने वाले हैं। Tata भी इस दौड़ में पीछे नहीं है। सरकार 2030 तक दोपहिया से चार पहिया वाहनों तक FFV को मुख्यधारा बनाने की योजना पर काम कर रही है।
आम आदमी पर आर्थिक असर
आम आदमी की जेब पर असर क्या पड़ेगा? सबसे बड़ा फायदा कम कीमत का है। एथेनॉल पेट्रोल से 35-40 प्रतिशत सस्ता पड़ता है, इसलिए E85 ब्लेंडिंग से फ्यूल कॉस्ट में भारी कटौती संभव है। हालांकि, एथेनॉल की कैलोरीफिक वैल्यू कम होने से माइलेज में 3-7 प्रतिशत गिरावट आ सकती है, लेकिन सस्ते दाम इसकी भरपाई कर देंगे। विदेशी तेल आयात पर अरबों डॉलर की बचत होगी, जो महंगाई पर लगाम कसेगी। किसानों को गन्ना-मक्का बेचने से अतिरिक्त कमाई होगी, और पर्यावरण को साफ हवा मिलेगी।
पुरानी गाड़ियों की कम्पैटिबिलिटी का खतरा
लेकिन सबसे बड़ा सवाल: क्या आपकी पुरानी कार या बाइक यह नया ईंधन झेल पाएगी? सिंपल पेट्रोल इंजन E85 नहीं चला सकते। 2010 से पहले बनी गाड़ियों में E20 भी समस्या पैदा कर सकता है- रबर पार्ट्स, फ्यूल पाइप और पंप पर जंग लग सकती है, माइलेज गिरेगा और इंजन क्षतिग्रस्त हो सकता है। 2023 से पहले के वाहनों को E20 कम्पैटिबल रबर पाइप और फ्यूल स्टेबलाइजर लगवाना चाहिए। नई FFV में इंजन खुद एडजस्ट हो जाता है, लेकिन पुरानी गाड़ियों के लिए सर्विस सेंटर चेक जरूरी। अगर फ्यूल कैप पर ‘E20 Compatible’ लिखा है, तो E20 सुरक्षित है, लेकिन ऊंचे ब्लेंड से परहेज करें।
चुनौतियां और भविष्य की राह
फ्लेक्स फ्यूल संक्रमण की राह में चुनौतियां भी हैं। ग्रामीण पंपों पर एथेनॉल की उपलब्धता सीमित है, इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाना होगा। FFV गाड़ियां 50 हजार रुपये महंगी पड़ सकती हैं। फिर भी, EV हाइब्रिड के साथ मिलकर यह पेट्रोल की विदाई का संकेत दे रहा है। अगर मिडिल ईस्ट संकट लंबा खिंचा, तो 2026 फ्लेक्स फ्यूल का साल साबित हो सकता है। गाड़ी मालिक सतर्क रहें- सर्विस सेंटर से सलाह लें, वरना इंजन का झटका लग सकता है।









