
सर्राफा बाजार में सोमवार को ऐसा भूचाल आया जिसने हर किसी को चौंका दिया। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और वैश्विक तनाव के बावजूद सोने और चांदी की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई। आमतौर पर युद्ध या संकट के समय इन कीमती धातुओं को ‘सेफ हार्बन’ यानी सुरक्षित निवेश माना जाता है, लेकिन इस बार उल्टा हुआ।
दोपहर करीब 3.15 बजे मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने का वायदा भाव 1,34,042 रुपये पर कारोबार कर रहा था, जो पिछले बंद स्तर से 10,420 रुपये (7.25%) नीचे था। वहीं चांदी का हाल और भी खराब रहा। चांदी का वायदा भाव 2,05,439 रुपये पर पहुंच गया, जिसमें 21,172 रुपये (9.43%) की भारी गिरावट आई। अगर शुक्रवार के बंद लेवल से देखें, तो सोमवार को सोना करीब 15,000 रुपये और चांदी लगभग 27,000 रुपये तक टूट गया ।
पांच बड़ी वजहें, जिनने मचाई बाजार में खलबली
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, इस गिरावट के पीछे पांच प्रमुख कारण हैं:
1. ईरान की चेतावनी: ईरान ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि अगर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के बिजली ग्रिड पर हमला करने की धमकी को अमल में लाते हैं, तो जवाब में खाड़ी देशों के ऊर्जा और जल ढांचे को निशाना बनाया जा सकता है। इस चेतावनी ने बाजार में अनिश्चितता बढ़ा दी है।
2. होर्मुज जलडमरूमध्य पर खतरा: ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने कहा है कि अगर ईरान के पावर प्लांट्स पर हमला हुआ, तो होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा। यह रास्ता वैश्विक तेल सप्लाई के लिए बेहद अहम है, और इसके बंद होने की आशंका से बाजार में दहशत फैल गई।
3. कच्चे तेल का बढ़ता भाव: अमेरिका और ईरान के बीच ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाने की धमकियों के बाद कच्चे तेल की कीमतें 110 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई हैं। तेल महंगा होने से महंगाई बढ़ने की आशंका है, जिससे निवेशक घबरा गए।
4. ग्लोबल मार्केट्स में दबाव: अमेरिका और एशिया के शेयर बाजारों में भी कमजोरी दिख रही है। अमेरिकी फ्यूचर्स नीचे हैं और एशियाई बाजार भी गिरावट के साथ खुले। इससे बाजार में जोखिम से बचने का रुझान बढ़ा और सभी एसेट क्लास में बिकवाली हुई।
5. ब्याज दर अनिश्चितता: अमेरिकी फेडरल रिजर्व के अगले कदम को लेकर निवेशक सतर्क हैं। बाजार में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है। ब्याज दरें बढ़ने से सोना और चांदी जैसी धातुओं की आकर्षकता कम हो जाती है, क्योंकि ये ब्याज नहीं देतीं।
वैश्विक बाजार से भी मिला दबाव
वैश्विक संकेत भी इसी रुझान की ओर इशारा कर रहे हैं। स्पॉट गोल्ड करीब 4,372 डॉलर प्रति औंस तक गिर गया, जो लगभग 2.5% नीचे है। अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स में 4.4% की गिरावट आई। सोने की कीमत लगातार नौ कारोबारी सत्रों से गिर रही है और यह जनवरी की शुरुआत के बाद अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है।
एक्सपर्ट्स की राय
Geojit Investments Limited के चीफ इनवेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट डॉ. वी के विजयकुमार का कहना है कि वैश्विक स्तर पर बढ़े जोखिम ने सभी एसेट्स को प्रभावित किया है। “कई बार सुरक्षित माने जाने वाले सोने में गिरावट शेयर बाजार से भी ज्यादा हो जाती है। इतनी अनिश्चितता के माहौल में निवेशकों के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि वे घबराएं नहीं और शांत रहें,” उन्होंने कहा ।
निवेशकों के लिए क्या मतलब?
मौजूदा गिरावट का यह मतलब नहीं है कि सोने और चांदी का लंबी अवधि का रुझान पूरी तरह बदल गया है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, हालिया तेजी के बाद यह स्वाभाविक प्रॉफिट बुकिंग है। जब तक वैश्विक तनाव और ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता बनी रहेगी, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।
निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे छोटे समय के उतार-चढ़ाव पर ज्यादा प्रतिक्रिया न दें। लंबी अवधि के लिए सोना अभी भी सुरक्षित निवेश का विकल्प बना हुआ है।









