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Ganga Expressway: तैयार हो जाइए! गंगा एक्सप्रेसवे पर जल्द भर सकेंगे फर्राटा, सफर शुरू करने से पहले देख लें सुरक्षा और सुविधाओं की लिस्ट

मेरठ से प्रयागराज तक 594 किमी लंबा ग्रीनफील्ड गंगा एक्सप्रेसवे यूपी के विकास की नई इबारत है। छह लेन वाला यह एक्सप्रेसवे आगे आठ लेन तक बढ़ाया जा सकेगा। नौ फैसिलिटी सेंटर पर फ्यूल, EV चार्जिंग, फूड कोर्ट, ढाबा, मोटेल, ट्रामा सेंटर और बड़ी पार्किंग जैसी वर्ल्ड–क्लास सुविधाएं मिलेंगी, जबकि हर किलोमीटर पर सीसीटीवी से सुरक्षा पुख्ता रहेगी।

By Pinki Negi

Ganga Expressway: तैयार हो जाइए! गंगा एक्सप्रेसवे पर जल्द भर सकेंगे फर्राटा, सफर शुरू करने से पहले देख लें सुरक्षा और सुविधाओं की लिस्ट

गंगा एक्सप्रेसवे पर फर्राटा भरने का इंतज़ार अब खत्म होने वाला है। मेरठ से प्रयागराज तक 594 किलोमीटर लंबा यह ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे सिर्फ़ तेज़ सफर नहीं, बल्कि सुरक्षा और सुविधाओं के मामले में भी उत्तर प्रदेश के लिए नया बेंचमार्क साबित होने जा रहा है। सरकारी एजेंसियां और प्रोजेक्ट से जुड़े अधिकारी साफ कर चुके हैं कि एक्सप्रेसवे का काम अंतिम चरण में है और इसी महीने के अंत तक इसे यातायात के लिए खोलने की तैयारी है।

यूपी की सड़कों से हाईस्पीड कॉरिडोर तक का सफर

लखनऊ से मिली जानकारी के मुताबिक, कभी गड्ढों और खराब सड़कों के लिए बदनाम रहे यूपी ने अब हाईस्पीड कनेक्टिविटी के दम पर देश के “ग्रोथ इंजन” के रूप में नई पहचान गढ़नी शुरू कर दी है, और गंगा एक्सप्रेसवे इस बदलाव की सबसे अहम कड़ी है। मेरठ के बिजौली गांव से शुरू होकर प्रयागराज के जुदापुर दांडू गांव तक जाने वाला यह एक्सप्रेसवे कुल 12 जिलों- मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज – को सीधे जोड़ता है। भविष्य की योजना इसे उत्तराखंड के हरिद्वार तक बढ़ाने की भी है, जिससे हरिद्वार से संगम नगरी प्रयागराज तक आस्था का एक सीधा और तेज़ कॉरिडोर तैयार होगा।

ग्रीनफील्ड डिज़ाइन और निर्माण मॉडल

यह गंगा एक्सप्रेसवे पूरी तरह ग्रीनफील्ड मॉडल पर बना है, यानी इसके लिए पहले से बनी किसी सड़क का इस्तेमाल नहीं किया गया, पूरा ट्रैक नए सिरे से तैयार किया गया है। फिलहाल इसे छह लेन का बनाया गया है, लेकिन बीच में अतिरिक्त जगह छोड़कर भविष्य में आठ लेन तक विस्तार की गुंजाइश रखी गई है, ताकि ट्रैफिक बढ़ने पर बिना बड़े रुकावट के चौड़ीकरण संभव हो सके। परियोजना का बड़ा हिस्सा प्रतिष्ठित अदाणी समूह के पास रहा है, जो बदायूं से हरदोई, हरदोई से उन्नाव और उन्नाव से प्रयागराज तक करीब 464 किलोमीटर हिस्से का निर्माण कर रहा है। यह प्रोजेक्ट डिजाइन-बिल्ड-फाइनेंस-ऑपरेट-ट्रांसफर (DBFOT) मॉडल पर 30 साल की रियायत अवधि के साथ विकसित किया जा रहा है।

मल्टी-लेयर सुरक्षा: फेंसिंग से रंबल स्ट्रिप तक

सुरक्षा के मोर्चे पर गंगा एक्सप्रेसवे को मल्टी-लेयर सेफ्टी कॉरिडोर के रूप में डिजाइन किया गया है। एक्सप्रेसवे के दोनों ओर सीमेंटेड फेंसिंग की गई है, ताकि आसपास के गांवों से आवारा पशु या लोग सीधे तेज रफ्तार लेन पर न चढ़ सकें। जहां अंडरपास बनाए गए हैं, वहां लोहे की जाली वाले बैरियर लगाए गए हैं ताकि स्थानीय आवाजाही को सुरक्षित रखा जा सके और एक्सप्रेसवे की मेन कैरिजवे पर अनचाही एंट्री रोकी जा सके। सड़क पर जगह-जगह रंबल स्ट्रिप यानी उभरी पट्टियां बनाई गई हैं, जो गाड़ी के टायर से गुजरते ही तेज़ गड़गड़ाहट की आवाज़ के साथ ड्राइवर को अलर्ट कर देती हैं, खासकर उस स्थिति में जब लंबी ड्राइव के दौरान उसे झपकी आने लगे।

हाई-टेक निगरानी और स्पीड कंट्रोल

निगरानी के लिए इस एक्सप्रेसवे पर लगभग हर एक किलोमीटर पर टू-साइडेड हाई रेजोल्यूशन सीसीटीवी कैमरा लगाया जा रहा है, जिसकी रेंज करीब 500 मीटर है। यानी मेरठ से प्रयागराज तक आप जब तक एक्सप्रेसवे पर रहेंगे, आपकी गाड़ी एक सेकेंड के लिए भी कैमरे की नजर से बाहर नहीं होगी। ओवरस्पीडिंग पर लगाम के लिए हर दस किलोमीटर पर खास स्पीड मॉनिटरिंग कैमरे और ट्रैकिंग सिस्टम लगाए गए हैं, जिनकी मदद से तेज रफ्तार वाहनों पर डिजिटल सबूतों के साथ कार्रवाई की जा सकेगी।

रात और खराब मौसम में विजिबिलिटी बढ़ाने के लिए सभी अहम इंटरचेंज, पुल और जंक्शनों पर हाई-मास्ट व स्ट्रीट लाइटें लगाई गई हैं, जबकि सड़क किनारे रेडियम वाले ब्लिंकर्स और बैरिकेड्स पर पीली रेडियम पट्टियां लगाकर धुंध या कोहरे में भी लेन की पहचान आसान की गई है।

नौ फैसिलिटी सेंटर: फुल-सर्विस कॉरिडोर

गंगा एक्सप्रेसवे की सबसे बड़ी खासियतों में से एक हैं इसके नौ फैसिलिटी सेंटर, जिन्हें विश्वस्तरीय सुविधाओं के साथ तैयार किया जा रहा है। 594 किलोमीटर के इस कॉरिडोर पर हर 60-75 किलोमीटर के आसपास एक फैसिलिटी या जनसुविधा केंद्र होगा, ताकि यात्रियों को लम्बे अंतराल तक बिना सुविधा के न चलना पड़े। हर फैसिलिटी सेंटर पर पेट्रोल और डीज़ल पंप, सीएनजी स्टेशन और इलेक्ट्रिक व्हीकल चार्जिंग पॉइंट लगाए जा रहे हैं, जहां एक साथ कई कारों और ट्रकों को चार्ज करने की व्यवस्था होगी, ताकि EV उपयोगकर्ताओं को रेंज को लेकर कोई चिंता न रहे।

फूड कोर्ट, मोटेल और ड्राइवरों के लिए आराम

यात्रियों की सहूलियत के लिए फैसिलिटी सेंटर में फूड कोर्ट, कैफेटेरिया, ब्रांडेड फूड चेन के आउटलेट, पारंपरिक ढाबा, कार पिक-अप फूड ऑर्डर पॉइंट और आराम के लिए मोटेल व डॉरमेट्री की व्यवस्था की जा रही है। ट्रक ड्राइवरों और कम बजट वाले यात्रियों के लिए सस्ते और भरपेट खाने वाले ढाबे भी हर सेंटर पर होंगे, जबकि मोटेल में घंटों के हिसाब से रुकने की सुविधा दी जाएगी, ताकि ड्राइवर आसानी से ब्रेक लेकर फिर से सुरक्षित ड्राइविंग कर सकें। बड़ी पार्किंग, अलग-अलग जोन में कार और हैवी कमर्शियल वाहनों की पार्किंग और बेसिक व्हीकल सर्विस के लिए मोटर व्हीकल सर्विस सेंटर भी इन फैसिलिटी हब का हिस्सा होंगे।

ट्रामा-रेडी कॉरिडोर और इमरजेंसी रिस्पॉन्स

देश के अन्य एक्सप्रेसवे से अलग गंगा एक्सप्रेसवे की पहचान इसके ट्रामा-रेडी कॉरिडोर के रूप में भी होगी। हर फैसिलिटी सेंटर पर ट्रामा सेंटर या इमरजेंसी मेडिकल यूनिट की व्यवस्था की जा रही है और राज्य सरकार बड़े निजी अस्पतालों के साथ टाई-अप की दिशा में काम कर रही है, ताकि दुर्घटना की स्थिति में गोल्डन ऑवर के भीतर बेहतर इलाज शुरू किया जा सके। इसके अलावा हर 40-50 किलोमीटर पर एम्बुलेंस, टो-अवे व्हीकल, क्रेन और फायर स्टेशन जैसी सेवाएं मुहैया कराने की योजना है, जिससे किसी भी हादसे या तकनीकी खराबी की स्थिति में तुरंत रिस्पॉन्स दिया जा सके।

एयरस्ट्रिप वाला रणनीतिक एक्सप्रेसवे

एक्सप्रेसवे के तकनीकी और रणनीतिक महत्व की बात करें तो शाहजहांपुर जिले में करीब 3.5 किलोमीटर लंबा एयरस्ट्रिप-रनवे भी तैयार किया गया है, जहां पिछले साल लड़ाकू विमानों और बड़े कैरियर एयरक्राफ्ट की लैंडिंग-टेस्टिंग कराई जा चुकी है। इससे पहले लखनऊ-आगरा और पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर भी ऐसे रनवे बने थे, लेकिन गंगा एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश का तीसरा और रणनीतिक दृष्टि से बेहद अहम ऐसा कॉरिडोर बन गया है, जहां आपातकाल या युद्ध जैसे हालात में वायुसेना सीधे सड़क पर ही ऑपरेशन चला सकती है।

टोल, समय और जेब की गणित

आम यात्रियों के लिए सबसे बड़ा सवाल टोल का होता है। शुरुआती अनुमान के मुताबिक, मेरठ से प्रयागराज तक पूरे 594 किलोमीटर सफर पर हल्के वाहनों के लिए करीब 1300 रुपये टोल प्रस्तावित है, जो पहली नजर में अधिक लग सकता है, लेकिन समय, ईंधन और आराम को जोड़कर देखें तो यह मौजूदा रूट की तुलना में काफी किफायती बैठता है।

अभी पारंपरिक हाईवे से यह दूरी तय करने में लगभग 10-12 घंटे और अलग-अलग टोल प्लाज़ा पर करीब 800 रुपये तक का खर्च बैठता है, जबकि भीड़, ट्रैफिक जाम और खराब रोड कंडीशन अतिरिक्त नुकसान कराती है; वहीं एक्सप्रेसवे पर ट्रैफिक फ्री सफर के साथ 5-6 घंटे में मंजिल तक पहुंचने की सुविधा तेल की खपत और मेंटेनेंस कॉस्ट दोनों घटाएगी।

इंडस्ट्रियल और एग्री-लॉजिस्टिक्स कॉरिडोर

गंगा एक्सप्रेसवे को केवल रोड प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि इंडस्ट्रियल और टूरिज़्म कॉरिडोर के रूप में भी देखा जा रहा है। एक्सप्रेसवे के दोनों तरफ लॉजिस्टिक्स हब, वेयरहाउस और औद्योगिक क्लस्टर विकसित करने की योजना है और यूपीडा की ओर से बदायूं जैसे जिलों में इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक्स क्लस्टर के लिए इकाइयों का आवंटन शुरू भी किया जा चुका है। इससे स्थानीय युवाओं के लिए रोज़गार के बड़े अवसर बनेंगे और किसानों को अपने फल, सब्ज़ी, अनाज और डेयरी उत्पाद बड़े शहरों के बाज़ारों तक तेज़ और सुरक्षित तरीके से भेजने में मदद मिलेगी।

Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

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