
कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) के खाताधारकों के बीच 10 प्रतिशत ब्याज दर की अफवाहों ने जोर पकड़ा था, लेकिन लोकसभा में सरकार ने इसकी हवा निकाल दी। सांसद विजय वसंत ने हाल ही में श्रम राज्य मंत्री शोभा करंदलजे से सवाल किया था कि क्या ईपीएफ ब्याज दर को 10% तक बढ़ाने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन है और क्या इसकी व्यवहार्यता का आकलन किया गया है। जवाब में मंत्री ने लिखित बयान जारी कर साफ शब्दों में कहा कि ऐसा कोई औपचारिक प्लान मौजूद नहीं है।
अफवाहों पर लगी लगाम
यह चर्चा तब तेज हुई जब सोशल मीडिया और कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि लेबर यूनियनों की मांग पर ब्याज दरों में भारी बढ़ोतरी हो सकती है। लेकिन करंदलजे ने स्पष्ट किया कि ईपीएफओ को यूनियनों से 10% ब्याज की कोई लिखित या औपचारिक मांग प्राप्त नहीं हुई है। उन्होंने कहा, “फिलहाल ऐसी कोई विशेष मांग नहीं मिली है।” यह बयान 30 मार्च 2026 को लोकसभा में पेश किया गया, जो करोड़ों पीएफ धारकों के लिए बड़ा अपडेट है। वर्तमान वित्त वर्ष 2025-26 के लिए ईपीएफओ ने ब्याज दर को 8.25 प्रतिशत पर ही स्थिर रखा है, जो पिछले दो वर्षों से अपरिवर्तित है।
ब्याज दर का आधार
सरकार ने यह भी जोर देकर कहा कि ईपीएफ ब्याज दर किसी मनमाने फैसले से तय नहीं होती। यह पूरी तरह ईपीएफओ के निवेश से होने वाली आमदनी पर निर्भर करती है। ईपीएफ स्कीम 1952 के प्रावधानों के तहत फंड में ओवरड्रॉ की मनाही है, यानी संगठन उतना ही ब्याज दे सकता है जितना वह कमाता है।
अगर बिना पर्याप्त रिटर्न के 10% ब्याज घोषित किया गया, तो फंड की वित्तीय स्थिरता खतरे में पड़ सकती है, जो लंबे समय में सदस्यों के हितों को नुकसान पहुंचाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि ईटीएफ और सरकारी सिक्योरिटीज जैसे निवेशों से मिलने वाले रिटर्न के बावजूद 10% का लक्ष्य चुनौतीपूर्ण है।
निर्णय प्रक्रिया
ब्याज दर तय करने की प्रक्रिया भी पारदर्शी है। वित्त वर्ष के अंत में फाइनेंस, इन्वेस्टमेंट एंड ऑडिट कमेटी निवेशों का विश्लेषण करती है। इसके बाद सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज (सीबीटी) की बैठक में सिफारिश होती है, जिसमें सरकार, नियोक्ता और कर्मचारी प्रतिनिधि शामिल होते हैं। अंतिम मंजूरी वित्त मंत्रालय देता है। सीबीटी ने ही 239वीं बैठक में 8.25% की सिफारिश की थी, जो अब लागू हो चुकी है। ब्याज मासिक रनिंग बैलेंस पर कैलकुलेट होता है, लेकिन साल के अंत में ही खातों में ट्रांसफर होता है- संभावित रूप से जून-अगस्त 2026 तक।
तुलना और भविष्य
कई पीएफ धारक महंगाई, बैंक एफडी या पीपीएफ जैसी स्कीम्स से तुलना करते हैं, लेकिन सरकार ने साफ किया कि ईपीएफ एक स्वावलंबी फंड है। इसकी तुलना अन्य विकल्पों से सीधे नहीं की जा सकती। निष्क्रिय खातों (36 माह से अधिक बिना योगदान) पर ब्याज भी बंद हो जाता है। कुल मिलाकर, 10% ब्याज का आकर्षक विचार भले ही कर्मचारियों को भाए, लेकिन वित्तीय वास्तविकताएं इसे फिलहाल असंभव बनाती हैं। ईपीएफओ की मजबूत निवेश रणनीति से भविष्य में बेहतर रिटर्न की उम्मीद बनी हुई है।









