
परिवार में किसी कमाने वाले सदस्य की मृत्यु होना बेहद दुखद और कठिन स्थिति होती है। ऐसे समय में परिवार को भावनात्मक सहारे के साथ आर्थिक सुरक्षा की भी जरूरत होती है। अगर मृतक व्यक्ति प्राइवेट नौकरी में था और उसकी सैलरी से भविष्य निधि (पीएफ) कटती थी, तो परिवार को कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) की कई योजनाओं का लाभ मिल सकता है।
इसके जरिए परिवार को पीएफ की जमा राशि, पेंशन और बीमा जैसी आर्थिक मदद मिल सकती है। हालांकि इसके लिए कुछ जरूरी प्रक्रियाएं पूरी करना जरूरी होता है। सही जानकारी और समय पर कदम उठाकर परिवार आर्थिक रूप से सुरक्षित रह सकता है।
मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाना जरूरी औपचारिकता
सबसे पहले मृतक का मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाना अनिवार्य होता है। यह दस्तावेज लगभग हर सरकारी और वित्तीय प्रक्रिया में आधारभूत साबित होता है। परिवार के सदस्य नगर निगम या संबंधित सरकारी पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन भी मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए आवेदन कर सकते हैं। यह दस्तावेज आगे पीएफ, बैंक और बीमा क्लेम में काम आता है। बिना मृत्यु प्रमाण पत्र के EPFO कोई भी क्लेम प्रोसेस नहीं करता है।
ईपीएफ से मिल सकती है जमा राशि और जीवनभर पेंशन
अगर मृतक की सैलरी से पीएफ कटता था, तो उसके खाते में जमा पूरी राशि परिवार को मिल सकती है। यह पैसा एकमुश्त या किस्तों में दिया जा सकता है। EPFO के नियमों के अनुसार, नॉमिनी या कानूनी वारिस Form 20 भरकर पूरा PF बैलेंस क्लेम कर सकते हैं, जिसमें सदस्य का योगदान, नियोक्ता का योगदान और accrued ब्याज शामिल होता है। क्लेम के लिए आधार कार्ड, मृत्यु प्रमाण पत्र, और बैंक खाता विवरण अनिवार्य है।
इसके अलावा अगर कर्मचारी ने पांच साल या उससे अधिक समय तक नौकरी की है, तो उसके पति या पत्नी को जीवनभर पेंशन और बच्चों को 25 साल की उम्र तक पेंशन का लाभ मिल सकता है। 2026 के नए नियमों के अनुसार, पेंशन की गणना अब सदस्य के सबसे ज्यादा वेतन वाले 60 महीनों के औसत के आधार पर होती है, जिससे बार-बार नौकरी बदलने वाले कर्मचारियों को फायदा होगा। न्यूनतम पेंशन ₹7,500 प्रतिमाह करने का प्रस्ताव है।
EDLI योजना से 7 लाख रुपये तक की बीमा राशि
ईपीएफओ की कर्मचारी जमा लिंक्ड बीमा योजना (EDLI) के तहत नौकरी के दौरान कर्मचारी की मृत्यु होने पर परिवार को अधिकतम 7 लाख रुपये तक का बीमा लाभ मिल सकता है। यह योजना बिना किसी प्रीमियम के चलती है और न्यूनतम ₹2.5 लाख की गारंटी होती है भले ही PF बैलेंस कम क्यों न हो। EDLI क्लेम के लिए Form 5IF भरना होता है और सदस्य का कम से कम 12 महीने तक EPFO सदस्य होना जरूरी है।
इसके अलावा अगर मृतक ने अलग से कोई जीवन बीमा पॉलिसी ली थी, तो उसका क्लेम भी तुरंत करना चाहिए। कई बार परिवार वाले इस महत्वपूर्ण बात पर ध्यान नहीं दे पाते और बीमा राशि क्लेम करने से चूक जाते हैं।
लोन और बैंक खातों से जुड़ी जरूरी सावधानियां बरतें
अगर मृतक के नाम पर कोई लोन था, तो पहले यह जांच लें कि उस लोन पर बीमा कवर था या नहीं। अगर बीमा था, तो लोन की रकम बीमा कंपनी चुका सकती है। वहीं बैंक खाते के मामले में मृतक के एटीएम कार्ड से पैसे निकालने की गलती नहीं करनी चाहिए। इसके बजाय बैंक जाकर नॉमिनी के खाते में राशि ट्रांसफर कराने की प्रक्रिया पूरी करनी चाहिए।
EPFO ने अगस्त 2025 में मृत्यु क्लेम प्रक्रिया को और सरल बनाया है। अब नाबालिग बच्चों को क्लेम देने के लिए गार्जियनशिप सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं है। यदि नॉमिनेशन नहीं है, तो पति/पत्नी, बच्चे या आश्रित माता-पिता कानूनी वारिस प्रमाण पत्र के साथ क्लेम कर सकते हैं।
क्लेम प्रक्रिया: ऑनलाइन या ऑफलाइन दोनों
परिवार वाले EPFO पोर्टल (epfindia.gov.in) पर लॉगिन करके ऑनलाइन क्लेम जमा कर सकते हैं या निकटतम EPFO कार्यालय जाकर ऑफलाइन प्रक्रिया अपना सकते हैं। Form 20 (PF), Form 5IF (EDLI), और Form 10D (पेंशन) भरकर आवश्यक दस्तावेज संलग्न करने होते हैं। आधार और UAN लिंक होने पर ऑनलाइन क्लेम तेजी से प्रोसेस होता है और 15-30 दिनों के भीतर राशि सीधे बैंक खाते में ट्रांसफर हो जाती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि परिवार को इन सभी लाभों को क्लेम करने में आमतौर पर 30-45 दिन लगते हैं। ऑनलाइन क्लेम जमा करने पर प्रोसेसिंग समय 20 दिन तक घट गया है। क्लेम स्टेटस EPFO पोर्टल पर ट्रैक किया जा सकता है और सेटलमेंट पर SMS नोटिफिकेशन आता है।









