
उद्योगपति अनिल अंबानी की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शुक्रवार तड़के मुंबई में अनिल अंबानी और रिलायंस पावर लिमिटेड से जुड़े 10 से 12 ठिकानों पर धावा बोल दिया। समाचार एजेंसी IANS के सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक, ED की लगभग 15 विशेष टीमें सुबह होते ही रिलायंस पावर के अधिकारियों के दफ्तरों, आवासों और संबंधित व्यवसायिक प्रतिष्ठानों पर तलाशी लेने पहुंचीं। यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) के तहत चल रही जांच का हिस्सा मानी जा रही है, जिसमें संदिग्ध फंड ट्रांसफर और बैंकिंग अनियमितताओं का मामला प्रमुख है।
शेयर बाजार में हलचल
ED ने अभी तक इस बड़ी कार्रवाई पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन सूत्र बताते हैं कि छापेमारी का फोकस रिलायंस पावर से जुड़े फर्जी लेन-देन और कर्ज के दुरुपयोग पर है। बाजार में खबर फैलते ही रिलायंस पावर के शेयरों में हलचल मच गई। BSE पर लिस्टेड कंपनी के शेयरों में शुरुआती उतार-चढ़ाव देखा गया- कुछ रिपोर्ट्स में 2-3% की तेजी का जिक्र है, जबकि पुरानी कार्रवाइयों की याद ताजा होने से निवेशकों में घबराहट फैली। वर्तमान में शेयर ₹35-40 के दायरे में घूम रहे हैं, जो कंपनी की वित्तीय कमजोरी को दर्शाता है।
CBI-ED की पिछली कार्रवाइयां
यह ED की ताजा कार्रवाई अनिल अंबानी ग्रुप के खिलाफ लंबे समय से चल रही जांचों का नवीनतम अध्याय है। फरवरी 2026 के अंत में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने बैंक ऑफ बड़ौदा की शिकायत पर अनिल अंबानी के पाली हिल स्थित आलीशान बंगले ‘एबोड’ और रिलायंस कम्युनिकेशंस (RCom) के कार्यालयों पर छापे मारे थे। CBI की FIR में ₹2,220 करोड़ के बैंक धोखाधड़ी का आरोप लगाया गया है। दावा है कि RCom ने बैंक से लिए गए कर्ज का गलत इस्तेमाल किया, फर्जी लेन-देन के जरिए फंड्स डायवर्ट किए और खातों में हेराफेरी कर अनियमितताओं को छिपाया। इससे बैंक को भारी नुकसान हुआ।
संपत्ति जब्ती का सिलसिला
ED ने इस मामले में पहले ही सख्त कदम उठाए हैं। नवंबर-दिसंबर 2025 में फेक बैंक गारंटी और FEMA उल्लंघन के केस में ED ने ₹8,997 करोड़ से अधिक की संपत्तियां जब्त कीं, जिसमें अनिल अंबानी का ‘एबोड’ घर (मूल्यांकन ₹3,716.83 करोड़) शामिल है। दिसंबर में ही ₹1,120 करोड़ की नई संपत्तियों को अटैच किया गया, जिसके बाद रिलायंस ग्रुप के शेयरों में 6% तक की गिरावट आई थी। कुल मिलाकर, ED ने अब तक ₹9,000 करोड़ से ज्यादा की संपत्तियां सील की हैं। इन कार्रवाइयों ने अंबानी ग्रुप की वित्तीय साख पर गहरा असर डाला है।
कंपनी पर लगे प्रमुख आरोप
रिलायंस कम्युनिकेशंस और रिलायंस पावर पर लगे आरोपों का केंद्रबिंदु बैंकिंग फ्रॉड है। CBI के अनुसार, RCom ने बैंक ऑफ बड़ौदा को दिए गए लोन की राशि का दुरुपयोग किया। फर्जी इनवॉयस और शेल कंपनियों के जरिए पैसा ट्रांसफर किया गया, जो मनी लॉन्ड्रिंग का स्पष्ट संकेत है। ED की जांच में फेक बैंक गारंटी का भी खुलासा हुआ, जिसकी वजह से चार्जशीट दाखिल की गई और तीन गिरफ्तारियां हुईं। अनिल अंबानी खुद प्रत्यक्ष आरोपी नहीं हैं, लेकिन ग्रुप की कंपनियों से उनका सीधा संबंध होने से जांच का दायरा उन तक पहुंचा है।
भविष्य की संभावनाएं
विश्लेषकों का मानना है कि ये छापे रिलायंस पावर के भविष्य के लिए खतरे की घंटी हैं। कंपनी पहले से ही कर्ज के बोझ तले दबी है और शेयरधारकों का भरोसा कमजोर हो चुका है। यदि ED को ठोस सबूत मिले, तो और संपत्तियां जब्त हो सकती हैं। अंबानी ग्रुप ने अभी चुप्पी साध रखी है, लेकिन कानूनी लड़ाई लंबी खिंचने की संभावना है। बाजार निगाहें ED के अगले बयान पर टिकी हैं।









