
भारत में लाखों युवाओं को यह भ्रम है कि ड्राइविंग लाइसेंस (DL) केवल 18 साल की उम्र के बाद ही बनता है। लेकिन सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) के मोटर व्हीकल एक्ट 1988 के तहत 16 साल पूरे कर चुके किशोर कानूनी रूप से गाड़ी चला सकते हैं। यह सुविधा MCWOG (मोटरसाइकिल विदाउट गियर) कैटेगरी तक सीमित है, जो 50cc तक के गियरलेस टू-व्हीलर जैसे स्कूटी या मोपेड के लिए है।
हाल के आंकड़ों के मुताबिक, परिवहन मंत्रालय के सारथी पोर्टल पर 2025 में 16-18 साल के 2 लाख से अधिक आवेदन दर्ज हुए, जो सड़क सुरक्षा जागरूकता बढ़ने का संकेत है।
क्या चला सकते, क्या नहीं?
16 साल की उम्र में कार, गियर वाली मोटरसाइकिल या LMV (लाइट मोटर व्हीकल) चलाना पूरी तरह प्रतिबंधित है। केवल 50cc इंजन क्षमता वाले गियरलेस वाहन ही अनुमत हैं, क्योंकि ये कम शक्तिशाली होते हैं और किशोरों के लिए सुरक्षित माने जाते हैं। उदाहरणस्वरूप, होंडा एक्टिवा या हीरो प्लेजर जैसी स्कूटियां आती हैं। 18 साल बाद ही फुल लाइसेंस या अपग्रेड संभव है। उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में हालिया प्रस्तावों के बावजूद केंद्रीय नियम वही हैं।
अभिभावक सहमति: अनिवार्य शर्त
स्वतंत्र आवेदन असंभव है। माता-पिता या कानूनी अभिभावक का लिखित सहमति पत्र 필수 है, जिसमें बच्चे को प्रशिक्षण देने की जिम्मेदारी ली जाती है। बिना इसके आवेदन रद्द हो जाता है। यह प्रावधान माता-पिता को जवाबदेह बनाता है, क्योंकि उल्लंघन पर उन्हें ही जुर्माना (₹5,000 तक) या कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ता है।
ऑनलाइन आवेदन
सारथी पोर्टल (sarathi.parivahan.gov.in) सबसे सुविधाजनक है। चरणबद्ध तरीके से:
- राज्य चुनें, ‘नया लर्नर लाइसेंस’ फॉर्म 1A भरें।
- MCWOG कैटेगरी चुनें, व्यक्तिगत विवरण दर्ज करें।
- दस्तावेज अपलोड: आधार, जन्म प्रमाणपत्र, 3 फोटो, निवास प्रमाण, अभिभावक सहमति।
- ₹100-200 फीस (राज्यवार भिन्न) ऑनलाइन चुकाएं।
- ऑनलाइन थ्योरी टेस्ट (ट्रैफिक नियम, 30 सवाल, 90% पासिंग मार्क्स) दें।
टेस्ट पास होने पर लर्नर लाइसेंस 6 महीने के लिए जारी होता है। L-बोर्ड लगाकर अभिभावक की निगरानी में ही वाहन चलाएं। RTO प्रैक्टिकल टेस्ट वैकल्पिक है। 2026 में डिजिटल वेरिफिकेशन तेज हुआ है।
सख्त नियम उल्लंघन: भारी सजा
बिना लाइसेंस गाड़ी चलाने पर पहली बार ₹500 जुर्माना, दोबारा ₹1,500। गलत वाहन चलाने पर वाहन जब्ती और अभिभावक पर IPC 304A (लापरवाही से मौत) का मुकदमा। 2025 में 1.5 लाख नाबालिग ड्राइविंग केस दर्ज हुए, जो सड़क हादसों का 15% कारण हैं।
जरूरी दस्तावेज: एक नजर
| दस्तावेज | उदाहरण |
|---|---|
| पहचान प्रमाण | आधार/पैन कार्ड |
| उम्र प्रमाण | 10वीं मार्कशीट/जन्म प्रमाण पत्र |
| निवास प्रमाण | राशन कार्ड/बैंक स्टेटमेंट |
| सहमति पत्र | माता-पिता का सत्यापित फॉर्म |
| फोटो | 3 पासपोर्ट साइज |
भविष्य की संभावनाएं
2026 में कोई बड़ा बदलाव नहीं, लेकिन यूपी जैसे राज्य 16 साल के लिए हल्के वाहनों पर विचाररत हैं। डिजिटल लाइसेंस और AI-आधारित टेस्ट नई सुविधाएं हैं। किशोरों से अपील: सुरक्षा पहले, नियमों का पालन करें। अधिक जानकारी के लिए parivahan.gov.in देखें। यह प्रावधान जिम्मेदारी सिखाता है, न कि आजादी।









