
भारत की रेल यात्रा में अब तक की सबसे बड़ी क्रांति की शुरुआत हो गई है। दिल्ली-वाराणसी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर परियोजना, जिसे अब ‘नमो भारत’ परियोजना के तहत आगे बढ़ाया जा रहा है, देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश के 10 से अधिक शहरों को जोड़ने वाला है। इस परियोजना के पूरा होते ही दिल्ली से वाराणसी की यात्रा केवल 4 घंटे में पूरी होगी, जो कि अब तक की सबसे बड़ी उपलब्धियां में से एक होगी।
नया ट्रांसपोर्ट हब: सराई काले खां
दिल्ली के सराई काले खां में एक नए मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट हब का निर्माण हो रहा है, जो न केवल एक रेलवे स्टेशन बल्कि एक पूरे ट्रांसपोर्ट हब के रूप में विकसित हो रहा है। यह हब दिल्ली मेट्रो, रैपिड रेल, अंतर्राज्यीय बस अड्डे और भविष्य की हाई-स्पीड रेल को जोड़ने वाला है। यह हब पूरे भारत में एक महत्वपूर्ण परिवहन केंद्र के रूप में उभर सकता है।
प्राथमिकता और योजना
भले ही केंद्र सरकार ने 7 नए हाई-स्पीड कॉरिडोर की घोषणा की है, लेकिन दिल्ली-वाराणसी कॉरिडोर को सबसे अधिक प्राथमिकता दी गई है। इस परियोजना में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, मथुरा, आगरा, फिरोजाबाद, इटावा, कन्नौज, लखनऊ, अयोध्या, रायबरेली, प्रयागराज और भदोही जैसे प्रमुख शहरों को जोड़ने की योजना है।
भूमि अधिग्रहण और समयरेखा
रेलवे ने फरवरी 2026 में इस परियोजना के लिए ‘फास्ट ट्रैक’ नीति लागू की है, ताकि पर्यावरण मंजूरी और भूमि अधिग्रहण को त्वरित पूरा किया जा सके। अनुमान है कि 2026 के अंत या 2027 की शुरुआत में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।
तकनीकी नवाचार और भविष्य की दिशा
इस परियोजना के साथ ही भारतीय रेलवे ने ‘रेल टेक पोर्टल’ और ‘e-RCT’ जैसे डिजिटल मंचों को भी लॉन्च किया है, जो रेलवे के सभी कार्यों को डिजिटल बनाने में मदद करेगा। इन सुधारों के साथ ही रेलवे ने तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देने के लिए स्टार्टअप्स और निवेशकों को भी आमंत्रित किया है।









