
दिल्ली- देहरादून एक्सप्रेसवे के चालू होने के साथ ही प्रशासन और ट्रैफिक विभाग यातायात नियमों को लेकर पूरी तरह सख्त हो गया है। मंत्रिमंडल, NHAI और राज्य परिवहन विभाग साफ कर चुके हैं कि यह सिर्फ एक तेज़ रफ्तार का रास्ता नहीं, बल्कि एक उच्च सुरक्षा-मानकों वाला आधुनिक कॉरिडोर है, जिस पर लापरवाही दिखाने वाले चालकों को तुरंत भारी चालान और कड़ी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।
बाइक-ऑटो-ट्रैक्टर पर सख्त रोक और 20,000 रुपये तक जुर्माना
NHAI ने दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के एलिवेटेड सेक्शन- खासकर गीता कॉलोनी से बागपत (खेकड़ा) तक लगभग 26 किलोमीटर लंबे ऊंचे रास्ते पर धीमी गति के वाहनों के प्रवेश पर रोक लगा दी है। यहां अब बाइक, स्कूटर, ऑटो- रिक्शा, ई-रिक्शा, ट्रैक्टर और अन्य गैर- मोटर या स्लो व्हीकल के लिए एंट्री व्यावहारिक रूप से पूरी तरह बंद मानी जा रही है।
राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम 2002 की धारा 35 के तहत लिए गए इस फैसले के तहत नियम तोड़ने पर मोटर व्हीकल एक्ट के तहत भारी जुर्माना लगाया जा सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स और स्थानीय ट्रैफिक पुलिस की जानकारी के अनुसार, बाइक या स्कूटर जैसे दोपहिया वाहन इस एलिवेटेड हिस्से पर चलाते हुए पकड़ा गया तो चालान की राशि 20 हजार रुपये तक तक जा सकती है, साथ ही वाहन जब्ती या अन्य दंडात्मक कार्रवाई का भी प्रावधान है।
इस तरह की सख्ती का मकसद साफ है: यह एक्सप्रेसवे हाई-स्पीड कार, SUV और भारी वाहनों के लिए डिज़ाइन किया गया है; ऐसे में ऑटो, ट्रैक्टर या बाइक जैसे धीमी गति के वाहन न सिर्फ लेन फ्लो बिगाड़ते हैं, बल्कि टक्कर और घातक एक्सीडेंट का सबसे बड़ा निशाना भी बन जाते हैं।
‘नो हॉर्न’ जोन और वन्यजीव कॉरिडोर की सुरक्षा
एक्सप्रेसवे का एक महत्वपूर्ण हिस्सा उत्तराखंड के राजाजी नेशनल पार्क के पास से गुजरता है, जहां यह वन्यजीव कॉरिडोर के रूप में श्रेणीबद्ध है। इस लगभग 12 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड सेगमेंट में “नो हॉर्न जोन” का दर्जा दिया गया है, जहां हॉर्न बजाना पूरी तरह प्रतिबंधित है।
वन विभाग और परिवहन विभाग ने सख्त निर्देश जारी किए हैं कि इस क्षेत्र में जानवरों को ध्वनि-प्रदूषण के झटके से बचाने के लिए किसी भी गैर-आवश्यक शोर की अनुमति नहीं होगी। यहां से गुजरते समय चालकों को लो-बीम लाइट का भी प्रयोग करना चाहिए, ताकि जानवरों को अचानक चमक से घबराहट न हो और दुर्घटना जैसी घटनाएं कम से कम हों।
इस जोन में नियम तोड़ने पर चालान के साथ-साथ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत अतिरिक्त कार्रवाई का डर भी है, इसलिए ड्राइवरों को खास तौर पर सावधान रहना होगा।
स्पीड लिमिट, गाड़ी रोकना और U-turn पर पूरी तरह रोक
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर विभिन्न वाहनों के लिए अलग-अलग स्पीड लिमिट तय की गई है। सामान्य रूप से कारों के लिए अधिकतम अनुमत गति 100 किमी प्रति घंटा और भारी वाहनों (ट्रक, बस आदि) के लिए 80 किमी प्रति घंटा रखी गई है। ये सीमाएं एक्सप्रेसवे के टनल या अन्य तकनीकी-संवेदनशील हिस्सों में और भी कड़ी हो सकती हैं।
ओवरस्पीडिंग, गलत लेन या गलत दिशा में ड्राइविंग के लिए एक्सप्रेसवे पर जगह-जगह ANPR और ITMS कैमरे लगाए गए हैं, जो वाहन की स्पीड, नंबर प्लेट और दिशा रियल टाइम में निगरानी करते हैं। उल्लंघन करने पर चालान ऑटोमैटिक तरीके से जनरेट हो जाता है और यह मोबाइल ऐप या SMS के जरिए चालक को पहुंच सकता है। इसके अलावा, बीच रास्ते में गाड़ी रोकना, यू-टर्न लेना या कहीं भी बिना अनुमति वाहन मोड़ना पूरी तरह मना है। यात्रियों को यह फैसला पहले से कर लेना ज़रूरी है कि वे किस इंटरचेंज से प्रवेश करेंगे और किस से बाहर निकलेंगे, क्योंकि बीच रास्ते में रुककर चढ़ना या उतरना अनुमत नहीं है।
देहरादून प्रवेश, इंधन जांच और यात्रा पहले की तैयारी
देहरादून की तरफ आते समय आशारोड़ी के पास एक तीव्र ढलान आती है, जहां वाहन की गति को खास तौर पर धीमा और नियंत्रित रखना ज़रूरी है। अति तेज़ रफ्तार या ब्रेक-फेलियर वाली स्थिति में वाहन आसानी से अनियंत्रित हो सकता है, जिससे गहरी घाटियों में गिरने का खतरा बढ़ जाता है।
इसके अलावा अधिकारियों और ऑटो-एक्सपर्ट ग्रुप दोनों ही यह चेतावनी दे रहे हैं कि यह एक्सप्रेसवे अभी नया है और रास्ते में पेट्रोल-डीजल पंप, मरम्मत या टायर-सर्विस की सुविधाएं पूरी तरह विकसित नहीं हुई हैं। इसलिए यात्रा शुरू करने से पहले ईंधन टैंक को पूरी तरह भर लेना, टायर-प्रेशर चेक कराना और वाहन की बेसिक मेंटेनेंस करवाना एक जिम्मेदार चालक की पहली ज़िम्मेदारी होनी चाहिए।
इस तरह दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे न सिर्फ सफर को आधा से ज़्यादा समय तक कम करता है, बल्कि एक नए तरह के ट्रैफिक-डिसिप्लिन और डिजिटल चालान सिस्टम का भी नमूना बनकर उभर रहा है, जहां लापरवाही का चालान अब टोल-बूथ या पुलिस-चौकी से ज़्यादा कैमरे और सॉफ्टवेयर से जुड़ा है।









