
आजकल शॉपिंग का तरीका पूरी तरह बदल चुका है। पहले महंगी चीजें खरीदने के लिए महीनों पैसे जोड़ने पड़ते थे, फिर क्रेडिट कार्ड का दौर आया। लेकिन अब एक नया चलन तेजी से बढ़ा है – डेबिट कार्ड EMI। फ्लिपकार्ट हो या अमेज़न, या फिर आपके शहर का कोई बड़ा इलेक्ट्रॉनिक्स स्टोर, हर जगह ‘डेबिट कार्ड पर आसान किस्त’ के विज्ञापन दिख जाते हैं। सुनने में यह बहुत लुभावना लगता है कि आपके पास क्रेडिट कार्ड नहीं है, फिर भी आप किस्तों पर सामान ले सकते हैं।
लेकिन क्या यह वाकई उतना ही सरल है जितना दिखता है? वास्तविकता में यह सुविधा कई छिपे खतरे छिपाए हुए है, जो बिना सोचे-समझे इस्तेमाल करने पर आपको अनजाने कर्ज के जाल में फंसा सकती है।
डेबिट कार्ड EMI कैसे काम करती है?
यह सुविधा आखिर काम कैसे करती है, यह समझना बेहद जरूरी है। अक्सर लोग समझते हैं कि चूंकि पैसा उनके अपने बैंक खाते से कट रहा है, तो यह कोई कर्ज नहीं है। लेकिन यह एक बड़ी गलतफहमी है। असल में, जब आप डेबिट कार्ड पर EMI का विकल्प चुनते हैं, तो बैंक आपको उस खरीदारी के लिए एक शॉर्ट-टर्म लोन (कम अवधि का ऋण) देता है। बैंक दुकानदार को पूरा भुगतान तुरंत कर देता है और फिर आपसे वह राशि किस्तों में वसूलता है। तकनीकी रूप से, यह आपके बैंक खाते से जुड़ा एक अनसिक्योर्ड लोन ही है।
HDFC, SBI, Axis और ICICI जैसी प्रमुख बैंकों ने यह सुविधा शुरू की है। आप मोबाइल फोन, टीवी, लैपटॉप या होम अप्लायंसेज जैसी चीजें 3 से 36 महीनों तक की किस्तों में खरीद सकते हैं। बैंक आपकी सेविंग्स अकाउंट बैलेंस, ट्रांजेक्शन हिस्ट्री और खाते की औसत बैलेंस के आधार पर एक लिमिट तय करते हैं। उदाहरण के लिए, अगर आपकी लिमिट 50,000 रुपये है, तो आप उससे कम कीमत का सामान ही EMI पर ले सकते हैं। हर महीने तय EMI राशि सीधे आपके खाते से ऑटो-डेबिट हो जाती है। लेकिन अगर ‘नो-कॉस्ट EMI’ का दावा किया जाता है, तो भी वास्तव में मर्चेंट या बैंक ब्याज को मूल्य में जोड़ देता है।
CIBIL स्कोर पर गहरा असर
सबसे महत्वपूर्ण बात जो ग्राहकों को समझनी चाहिए, वह है इसका आपके क्रेडिट इतिहास पर प्रभाव। जैसे ही आप डेबिट EMI का लाभ उठाते हैं, बैंक इसकी जानकारी CIBIL जैसे क्रेडिट ब्यूरो को देता है। यह आपकी क्रेडिट प्रोफाइल में एक ‘कंज्यूमर ड्यूरेबल लोन’ के रूप में दर्ज हो जाता है। समय पर भुगतान के फायदे साफ हैं – यदि आप अपनी किस्तें समय पर चुकाते हैं, तो यह आपके क्रेडिट स्कोर को बेहतर बनाने में मदद करता है। यह उन युवाओं के लिए खासतौर पर अच्छा हो सकता है जिनका कोई पिछला क्रेडिट इतिहास नहीं है, क्योंकि इससे एक सकारात्मक पेमेंट हिस्ट्री बनती है।
लेकिन एक चूक और बड़ा नुकसान हो जाता है। यदि किसी महीने आपके खाते में पर्याप्त बैलेंस नहीं है और EMI बाउंस हो जाती है, तो आपका क्रेडिट स्कोर बुरी तरह गिर सकता है। बैंक इसे लेट पेमेंट या मिस्ड EMI के रूप में रिपोर्ट करता है, जो CIBIL स्कोर पर ‘रेड फ्लैग’ की तरह काम करता है। एक छोटी सी गलती से स्कोर 100-200 पॉइंट्स तक लुढ़क सकता है, और यह प्रभाव लंबे समय तक रहता है। याद रखें, डेबिट EMI की एक भी चूक भविष्य में आपको होम लोन, कार लोन या पर्सनल लोन मिलने में बड़ी बाधा बन सकती है। अगर बार-बार बाउंस होता है, तो बैंक की आंतरिक रेटिंग भी खराब हो जाती है, जिससे अन्य सेवाओं पर असर पड़ता है।
छिपी फीस और ब्याज के जाल
ट्रांजैक्शन से पहले इन बातों का खास ख्याल रखना जरूरी है। डेबिट कार्ड EMI का बटन दबाने से पहले खुद से कुछ सवाल जरूर पूछें। सबसे पहले, छिपी हुई फीस की जांच करें। क्या बैंक इस पर प्रोसेसिंग फीस ले रहा है? HDFC में यह 199 रुपये + GST हो सकती है, ICICI में 99 रुपये + GST, जबकि SBI में 3 महीने तक कभी-कभी निल होती है। कई बार ‘नो-कॉस्ट EMI’ के नाम पर भी प्रोसेसिंग फीस या फाइलिंग चार्ज के रूप में मोटी रकम वसूल ली जाती है।
दूसरा, ब्याज दर पर गौर करें। यदि यह ‘नो-कॉस्ट’ नहीं है, तो ब्याज की दर क्या है? अक्सर डेबिट कार्ड लोन पर ब्याज दरें 14% से 17% सालाना तक होती हैं, जो पर्सनल लोन के बराबर या अधिक हो सकती हैं। उदाहरणस्वरूप, SBI में 14.70%, Kotak में 17.1% तक। लंबी अवधि चुनने पर कुल ब्याज बहुत ज्यादा जुड़ जाता है। तीसरा, ऑटो-डेबिट की तैयारी करें। हमेशा सुनिश्चित करें कि किस्त की तारीख से दो दिन पहले आपके खाते में पर्याप्त फंड मौजूद हो, क्योंकि बाउंस पर अतिरिक्त पेनल्टी लगती है।
पात्रता जांचने के लिए HDFC में ‘MYHDFC’ SMS 5676712 पर भेजें या बैंक ऐप चेक करें। Bank of Baroda में ‘DCEMI’ 8422009988 पर। हर बैंक के नियम अलग हैं, इसलिए खरीदारी से पहले कन्फर्म करें।
जिम्मेदारी से इस्तेमाल करें
डेबिट कार्ड EMI उन लोगों के लिए एक वरदान है जो जिम्मेदारी से अपने खर्चों का प्रबंधन कर सकते हैं। यह आपको बिना भारी बचत के अपनी जरूरतें पूरी करने की आजादी देता है। लेकिन इसे ‘मुफ्त की सुविधा’ समझने की गलती न करें। यह एक वित्तीय जिम्मेदारी है, जिसे निभाने में हुई छोटी सी लापरवाही आपकी भविष्य की वित्तीय सेहत बिगाड़ सकती है।
हमेशा मासिक बजट का 30% से ज्यादा EMI पर न खर्च करें, नियम और शर्तें (Terms and Conditions) ध्यान से पढ़ें, और छोटी खरीदारी पर इसका इस्तेमाल न करें। कार्डलेस EMI या UPI जैसे विकल्प भी आज उपलब्ध हैं। समझदारी इसी में है कि लुभावने विज्ञापनों के पीछे न भागें, बल्कि वित्तीय साक्षरता अपनाएं।









