
पहली बार घर खरीदना हर किसी का सपना होता है, लेकिन होम लोन लेते समय की गई छोटी-बड़ी गलतियां इस सपने को कर्ज के बोझ में बदल सकती हैं। देशभर में लाखों लोग हर साल होम लोन के चक्कर में फंस जाते हैं, क्योंकि वे जल्दबाजी में फैसले लेते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, सही प्लानिंग के अभाव में न सिर्फ EMI का बोझ बढ़ जाता है, बल्कि घर नीलामी जैसी नौबत भी आ सकती है। इस रिपोर्ट में हम उन प्रमुख गलतियों पर विस्तार से नजर डालेंगे, जो आपकी वित्तीय सेहत को चोट पहुंचा सकती हैं।
क्षमता से ज्यादा लोन लेना घातक
घर खरीदने की होड़ में लोग अक्सर अपनी मासिक आय से कहीं ज्यादा का लोन ले लेते हैं। उदाहरण के लिए, अगर आपकी सैलरी 1 लाख रुपये है, तो 40-50 हजार रुपये की EMI लेना आम बात हो गई है। इससे निपटने के लिए लोग बचत खत्म कर देते हैं और अन्य जरूरी खर्चों पर असर पड़ता है। परिणामस्वरूप, EMI समय पर न चुकाने पर क्रेडिट स्कोर खराब होता है, जिससे आगे लोन लेना मुश्किल हो जाता है।
ऊपर की चर्चा से भी साफ है कि बैंक FOIR (Fixed Obligations to Income Ratio) के आधार पर लोन देते हैं, जो आपकी कुल आय का 50-60% तक सीमित रखते हैं। अगर पहले से पर्सनल लोन या क्रेडिट कार्ड का बकाया है, तो यह सीमा और सिकुड़ जाती है। सलाह यही है कि लोन राशि अपनी आय के 40% से ज्यादा न रखें, ताकि अप्रत्याशित खर्चों का सामना कर सकें।
ब्याज दरों और प्रकार की तुलना न करना
सबसे पहली और आम गलती सही होम लोन न चुनना है। लोग जल्दी लोन मिलने के चक्कर में फिक्स्ड या फ्लोटिंग रेट का फर्क नहीं समझते। फिक्स्ड रेट में EMI स्थिर रहती है, जो बजट प्लानिंग के लिए अच्छा है, लेकिन फ्लोटिंग रेट RBI की पॉलिसी के साथ बदलती है – कभी कम, कभी ज्यादा। अगर ब्याज दरें बढ़ें, तो फ्लोटिंग रेट वाला लोन महंगा साबित हो सकता है।
एक ही बैंक से लोन ले लेना भी भूल है; अलग-अलग लेंडर्स जैसे SBI, HDFC या PNB की दरें चेक करें। वर्तमान में फ्लोटिंग रेट 8.5-9.5% के बीच है, लेकिन तुलना न करने से 0.5% का अंतर भी लाखों का नुकसान करा सकता है। ऑनलाइन EMI कैलकुलेटर इस्तेमाल कर सही विकल्प चुनें।
छिपे चार्जेस को नजरअंदाज करना
होम लोन की दूसरी बड़ी गलती छिपे खर्चों को अनदेखा करना है। प्रोसेसिंग फीस तो सब जानते हैं (लोन राशि का 0.5-1%), लेकिन टेक्निकल वैल्यूएशन, लीगल चार्जेस, मॉर्गेज डीड रजिस्ट्रेशन (MODT) और इंश्योरेंस जैसे खर्च कुल लागत का 1-2% जोड़ देते हैं। उदाहरणस्वरूप, 50 लाख के लोन पर ये 50-1 लाख रुपये तक बन सकते हैं। लोन एग्रीमेंट साइन करने से पहले सभी क्लॉज पढ़ें- फोरक्लोजर चार्जेस या स्टैंप ड्यूटी जैसे छिपे जाल से बचें। विशेषज्ञ कहते हैं कि कुल लागत EMI के अलावा 10-15% अतिरिक्त हो सकती है, इसलिए वकील से सलाह लें।
लोन अवधि का गलत चुनाव
लोन की अवधि चुनते समय भी लोग भटक जाते हैं। छोटी टेन्योर (10-15 साल) में EMI ज्यादा होती है, लेकिन कुल ब्याज कम लगता है – जैसे 50 लाख के लोन पर 20 साल की बजाय 15 साल में 10-15 लाख की बचत। वहीं, लंबी अवधि (25-30 साल) में EMI कम लगती है, लेकिन ब्याज डबल हो जाता है। अपनी रिटायरमेंट आय और खर्चों को ध्यान में रखें। अगर 40 साल की उम्र में लोन ले रहे हैं, तो 20 साल से ज्यादा न बढ़ाएं, वरना रिटायरमेंट के बाद बोझ बनेगा।
क्रेडिट स्कोर और अन्य कर्जों की अनदेखी
खराब या औसत क्रेडिट स्कोर (CIBIL 750 से कम) के साथ आवेदन करना महंगा पड़ता है। कम स्कोर पर ब्याज दर 1% ज्यादा लग सकती है, जो लाखों का अतिरिक्त बोझ है। साथ ही, पुराने लोन या क्रेडिट कार्ड बकाया लोन एलिजिबिलिटी घटाते हैं। सलाह है कि आवेदन से 6 महीने पहले स्कोर चेक करें, बकाया क्लियर करें और समय पर बिल पेमेंट करें। अच्छा स्कोर न सिर्फ कम ब्याज दिलाता है, बल्कि लोन अप्रूवल भी आसान बनाता है।
डाउन पेमेंट की कमी और जल्दबाजी
डाउन पेमेंट सिर्फ 10-20% रखना भी गलती है। ज्यादा लोन राशि से EMI बोझ बढ़ता है। RBI के नियमों के तहत बैंक 90% तक देते हैं, लेकिन बचत से 20-30% डाउन पेमेंट करें। प्रॉपर्टी वैल्यूएशन और लोकेशन भी चेक करें, वरना ओवरप्राइस्ड घर पर लोन फंस सकता है। इन गलतियों से बचने के लिए वित्तीय सलाहकार से बात करें और ऑनलाइन टूल्स का इस्तेमाल करें। घर खरीदना सपना है, लेकिन स्मार्ट प्लानिंग से इसे हकीकत बनाएं बिना नुकसान के।









