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LPG पर बड़ा फैसला: देशभर में ‘ECA’ लागू होने से क्या बदल जाएगा? जानें क्या होता है एस्मा

वैश्विक तनाव के बीच भारत में LPG किल्लत रोकने सरकार ने 'आवश्यक वस्तु अधिनियम' (ECA) लागू किया। रिफाइनरियों को औद्योगिक उपयोग की जगह सीधे घरेलू गैस उत्पादन के आदेश दिए गए। जमाखोरी रोकने के लिए सिलिंडर डिलीवरी अवधि 15 से बढ़ाकर 21 दिन कर दी गई है।

By Pinki Negi

LPG पर बड़ा फैसला: देशभर में 'ECA' लागू होने से क्या बदल जाएगा? जानें क्या होता है एस्मा

मध्य पूर्व में ईरान और अमेरिका-इजरायल गठबंधन के बीच बढ़ते तनाव के बाद वैश्विक स्तर पर ऊर्जा संकट के आसार गहरा गए हैं। दुनिया भर में गैस, पेट्रोल और डीजल की कमी देखी जा रही है, जिसका असर भारत में भी स्पष्ट हो रहा है। इस गंभीर स्थिति से निपटने और देश में रसोई गैस (LPG) की किल्लत, जमाखोरी तथा कालाबाजारी को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने सख्त रवैया अपनाते हुए ‘आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955’ (Essential Commodities Act – ECA) लागू कर दिया है। साथ ही, घरेलू आपूर्ति को प्राथमिकता देने के लिए सिलिंडर बुकिंग और डिलीवरी के नियमों में भी महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं।

वैश्विक तनाव के बीच भारत का सख्त कदम

पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक उठापटक के कारण कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित होने का खतरा मंडरा रहा है। कई देशों के ईंधन भंडारों में कमी दर्ज की गई है, जिससे बाजार में अस्थिरता बढ़ी है। इसी पृष्ठभूमि में भारत सरकार ने यह सुनिश्चित करने के लिए कि आम नागरिकों को रसोई गैस की कमी न हो, ईसीए का सहारा लिया है।

सरकार के नए आदेश के अनुसार, अब देश की सभी रिफाइनरियां और पेट्रोकेमिकल प्लांट प्रोपेन और ब्यूटेन जैसी गैसों का उपयोग पेट्रोकेमिकल उत्पादों या अन्य औद्योगिक कार्यों के लिए नहीं कर सकेंगे। इन गैसों को सीधे LPG पूल में भेजा जाएगा ताकि घरेलू सिलिंडरों का उत्पादन बढ़ाया जा सके। यह कदम सीधे तौर पर उद्योगों पर गैस की आपूर्ति को प्रतिबंधित करके घरों में रसोई गैस की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।

क्या है आवश्यक वस्तु अधिनियम (ECA)?

आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 एक शक्तिशाली कानून है जो सरकार को युद्ध, बाढ़, दुष्काल या किसी भी आपातकालीन स्थिति में जरूरी वस्तुओं के उत्पादन, आपूर्ति, वितरण और कीमतों को नियंत्रित करने की छूट देता है। इस कानून का मुख्य उद्देश्य बाजार में जमाखोरी और कालाबाजारी को रोकना और कीमतों को स्थिर रखना है। इसके तहत सरकार किसी भी वस्तु पर स्टॉक सीमा तय कर सकती है।

इस अधिनियम का उल्लंघन करने वालों के लिए सजा का प्रावधान बेहद कठोर है। दोषी पाए जाने पर अपराधी को 3 महीने से लेकर 7 साल तक की कैद, जुर्माना या दोनों सजाएं हो सकती हैं। विशेष रूप से खाद्य पदार्थों और जरूरी ईंधन से जुड़े अपराधों में कम से कम 3 महीने की अनिवार्य सजा का प्रावधान है, जो इस बात का संकेत है कि सरकार इस संकट को कितनी गंभीरता से ले रही है। अक्सर लोग इसे ‘एसेंशियल सर्विसेज मेंटेनेंस एक्ट’ (ESMA) से भ्रमित करते हैं, जो हड़ताल रोकने के लिए है, जबकि ECA सीधे वस्तुओं की उपलब्धता से जुड़ा है।

अब 21 दिन बाद ही होगी डिलीवरी

सरकार ने केवल उत्पादन पर ही नहीं, बल्कि वितरण व्यवस्था पर भी अंकुश लगाया है। अस्थिर वैश्विक हालात को देखते हुए और भंडारण को संतुलित रखने के लिए घरेलू गैस सिलिंडर की आपूर्ति अवधि में बदलाव कर दिया गया है। पहले जहां एक सब्सिडी वाला सिलिंडर बुक करने के 15 दिन बाद दूसरा सिलिंडर लिया जा सकता था, अब इस अवधि को बढ़ाकर 21 दिन कर दिया गया है।

इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOCL), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) ने अपनी गैस एजेंसियों के सॉफ्टवेयर सिस्टम में इस बदलाव को लागू कर दिया है। गैस एजेंसी संचालकों का कहना है कि उपभोक्ता सिलिंडर खाली होने के तुरंत बाद बुकिंग तो करा सकते हैं, लेकिन डिलीवरी पिछली आपूर्ति के 21वें दिन ही होगी। इसका मतलब यह है कि भले ही आप आज बुकिंग करा लें, अगर आपके पिछले सिलिंडर को 21 दिन नहीं हुए हैं, तो नया सिलिंडर नहीं मिलेगा। हालांकि, वर्ष भर में मिलने वाले सब्सिडी वाले 12 सिलिंडर और गैर-सब्सिडी वाले 3 अतिरिक्त सिलिंडर की सीमा में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

उद्योग पर असर, आम आदमी को राहत

इस फैसले का सीधा असर पेट्रोकेमिकल उद्योग पर पड़ेगा, जिन्हें अब कच्चे माल की कमी का सामना करना पड़ सकता है। प्लास्टिक, रबर और अन्य रासायनिक उत्पाद बनाने वाले कारखानों को गैस की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। लेकिन सरकार का स्पष्ट स्टैंड है कि इस संकट की घड़ी में घरेलू उपभोक्ताओं की रसोई सबसे पहले सुरक्षित रहनी चाहिए। सरकार का यह कदम एक ‘रोकथाम उपाय’ (Preventive Measure) है ताकि भविष्य में वैश्विक संकट गहराने पर भी भारत में गैस की कालाबाजारी न हो पाए और आम नागरिकों को राहत मिल सके।

Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

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