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ETF vs Mutual Fund: पैसा कहाँ बनेगा ज्यादा? निवेश से पहले समझ लें अपने फायदे की ये बात

ईटीएफ बनाम म्यूचुअल फंड: कम लागत वाले ईटीएफ लॉन्ग टर्म में ज्यादा रिटर्न दे सकते हैं (0.05% TER), जबकि म्यूचुअल फंड SIP की आसानी देते हैं लेकिन ऊंचे खर्च (1-2%) खाते हैं। आपका लक्ष्य और रिस्क तय करे - ईटीएफ पैसिव निवेशकों के लिए बेहतर। सही चुनाव से कॉर्पस दोगुना हो सकता है।

By Pinki Negi

etf or mutual funds find out which one is better for your financial goals

आज के दौर में लाखों भारतीय निवेशक म्यूचुअल फंड के जरिए अपनी बचत को बढ़ा रहे हैं। एसआईपी (सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान) ने निवेश को इतना आसान बना दिया है कि सैलरीड क्लास से लेकर रिटायर्ड लोग तक हर महीने हजारों रुपये लगा रहे हैं। लेकिन म्यूचुअल फंड इकोसिस्टम में दो मुख्य विकल्प हैं – एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ईटीएफ) और ट्रेडिशनल म्यूचुअल फंड। दोनों ही पूल्ड फंड्स हैं जो शेयर बाजार या डेट में निवेश करते हैं और सेबी (सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया) के सख्त रेगुलेशन के अधीन हैं।

सवाल वही पुराना है: आम निवेशक को वित्तीय लक्ष्यों – जैसे रिटायरमेंट, बच्चों की पढ़ाई या घर खरीदने – के लिए ईटीएफ चुनना चाहिए या म्यूचुअल फंड? पिछले दस सालों में ईटीएफ ने कम लागत और पैसिव इन्वेस्टिंग की लहर पर सवार होकर तेजी से जगह बनाई है, जबकि म्यूचुअल फंड अभी भी रिटेल पोर्टफोलियो में राज करते हैं। एसआईपी का AUM (एसेट्स अंडर मैनेजमेंट) 24 प्रतिशत बढ़कर 16.36 लाख करोड़ रुपये हो गया, जो कुल इक्विटी AUM का 28.2 प्रतिशत है।

दोनों स्कीम्स पर एक नजर

ईटीएफ स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्टेड होते हैं, जैसे बीएसई या एनएसई। इन्हें डीमैट और ट्रेडिंग अकाउंट से मार्केट घंटों (सुबह 9:15 से दोपहर 3:30) में खरीदा-बेचा जा सकता है। इनकी कीमत पूरे दिन बदलती रहती है, ठीक स्टॉक की तरह। दूसरी तरफ, ट्रेडिशनल म्यूचुअल फंड एक्सचेंज पर ट्रेड नहीं होते। इन्हें फंड हाउस की वेबसाइट, ऐप या डिस्ट्रीब्यूटर के जरिए खरीदें, और ट्रांजेक्शन दिन के अंत की नेट एसेट वैल्यू (एनएवी) पर सेटल होता है। इक्विटी स्कीम्स के लिए कट-ऑफ टाइम दोपहर 3 बजे है; उसके बाद अगले बिजनेस डे का एनएवी लागू हो जाता है।

एनएवी फंड के पोर्टफोलियो की प्रति यूनिट मार्केट वैल्यू है, जो रोज रात 11 बजे तक एएमएफआई और फंड हाउस की साइट पर अपडेट होती है। ईटीएफ पैसिव होते हैं (निफ्टी 50 या सेंसेक्स जैसे इंडेक्स ट्रैक करते हैं), जबकि म्यूचुअल फंड एक्टिव (फंड मैनेजर स्टॉक चुनते हैं) या पैसिव हो सकते हैं।

खर्च और रिटर्न: असली खेल यहीं है

ईटीएफ की सबसे बड़ी ताकत उनका कम एक्सपेंस रेशियो है। निफ्टी 50 ईटीएफ का टोटल एक्सपेंस रेशियो (टीईआर) महज 0.05-0.2 प्रतिशत होता है, जबकि एक्टिव लार्ज-कैप म्यूचुअल फंड में डायरेक्ट प्लान के लिए भी 0.5-1 प्रतिशत और रेगुलर प्लान में 1.5-2 प्रतिशत तक जा सकता है। ये 1 प्रतिशत का अंतर लंबे समय में कंपाउंडिंग के जादू से करोड़ों का फर्क डाल देता है। मान लीजिए आप 10,000 रुपये महीने 15 साल के लिए निवेश करते हैं 12 प्रतिशत रिटर्न पर।

ईटीएफ से कॉर्पस लगभग 50 लाख बढ़ सकता है, जबकि हाई टीईआर वाले फंड से 40 लाख ही। स्टडीज दिखाती हैं कि 80 प्रतिशत एक्टिव फंड इंडेक्स से पीछे रह जाते हैं। ईटीएफ में ब्रोकरेज और एसटीटी लगता है, लेकिन कोई एग्जिट लोड नहीं। टैक्स में भी फायदा: ईटीएफ की इन-काइंड रिडेम्प्शन से कैपिटल गेन कम ट्रिगर होता है। भारत में दोनों पर एलटीसीजी टैक्स 12.5 प्रतिशत (1 लाख से ऊपर) है।

एसआईपी की आसानी vs ईटीएफ की फ्लेक्सिबिलिटी

भारतीय परिवारों का पसंदीदा एसआईपी म्यूचुअल फंड की ताकत है। हर महीने ऑटो-डेबिट से पैसा चला जाता है, मार्केट टाइमिंग की टेंशन नहीं। ये डिसिप्लिन बनाता है और रुपी कॉस्ट एवरेजिंग से वोलेटाइल मार्केट में फायदा देता है। ईटीएफ में एसआईपी मुश्किल है क्योंकि हर बार ट्रेडिंग अकाउंट से मैन्युअल खरीदना पड़ता है, लेकिन अब कुछ ब्रोकर्स ‘ईटीएफ एसआईपी’ ऑफर कर रहे हैं। ईटीएफ ट्रांसपेरेंट हैं – पोर्टफोलियो रीयल-टाइम दिखता है – और इंट्राडे ट्रेडिंग से तुरंत लिक्विडिटी मिलती है। लेकिन नौसिखियों के लिए रिस्की, क्योंकि भावनाओं में दिन भर ट्रेड हो सकता है।

कब चुनें क्या? निवेशक के लिए गाइड

  • ईटीएफ चुनें अगर: आप लॉन्ग-टर्म (5-10 साल) पैसिव निवेश चाहते हैं, ट्रेडिंग अकाउंट है, कम फीस प्राथमिकता है। स्मार्टफोन यूजर्स के लिए परफेक्ट।
  • म्यूचुअल फंड चुनें अगर: एसआईपी से डिसिप्लिन्ड निवेश, एक्टिव मैनेजमेंट पर भरोसा, या डिस्ट्रीब्यूटर गाइडेंस चाहिए। शुरुआती निवेशकों के लिए आसान।

अंततः, ज्यादा पैसा ईटीएफ से बन सकता है अगर होल्डिंग लंबी हो, क्योंकि कम खर्च रिटर्न बढ़ाता है। लेकिन कोई गारंटी नहीं – दोनों मार्केट रिस्क के अधीन हैं। एक्सपर्ट सलाह: अपना रिस्क प्रोफाइल चेक करें, डायवर्सिफाई करें। सेबी की साइट या फाइनेंशियल एडवाइजर से कंसल्ट करें। सही चुनाव से आपका पैसा समय के साथ कई गुना बढ़ सकता है। 

Author
Pinki Negi
GyanOK में पिंकी नेगी बतौर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। पत्रकारिता में उन्हें 7 वर्षों से भी ज़्यादा का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में NVSHQ से की थी, जहाँ उन्होंने शुरुआत में एजुकेशन डेस्क संभाला। इस दौरान पत्रकारिता के क्षेत्र में नए-नए अनुभव लेने के बाद अमर उजाला में अपनी सेवाएं दी। बाद में, वे नेशनल ब्यूरो से जुड़ गईं और संसद से लेकर राजनीति और डिफेंस जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर रिपोर्टिंग की। पिंकी नेगी ने साल 2024 में GyanOK जॉइन किया और तब से GyanOK टीम का हिस्सा हैं।

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