
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2026 के जरिए भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ कहे जाने वाले सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) के लिए एक ऐसा ‘रोडमैप’ पेश किया है, जो उन्हें केवल जीवित रहने (Survival) के बजाय विस्तार (Scale) करने में मदद करेगा। ₹10,000 करोड़ का ‘SME ग्रोथ फंड’ इस दिशा में सबसे साहसिक कदम माना जा रहा है।
1. SME ग्रोथ फंड
अब तक अधिकांश सरकारी योजनाएं ‘कर्ज’ (Debt) पर आधारित थीं, जिससे व्यवसायों पर ब्याज का बोझ बढ़ता था।
- बदलाव: ₹10,000 करोड़ का यह नया फंड ‘इक्विटी सपोर्ट’ प्रदान करेगा। यानी सरकार उन MSMEs में निवेश करेगी जिनमें ‘चैंपियन’ बनने की क्षमता है।
- असर: यह उन मध्यम स्तर की कंपनियों के लिए गेम-चेंजर होगा जो स्टॉक मार्केट में लिस्ट होना चाहती हैं या अपना ग्लोबल एक्सपोर्ट बढ़ाना चाहती हैं।
2. भुगतान की समस्या का ‘डिजिटल समाधान’
MSMEs के लिए सबसे बड़ी चुनौती समय पर भुगतान न मिलना है। सरकार ने TReDS (Trade Receivables Discounting System) को लेकर दो बड़े फैसले लिए हैं:
- अनिवार्य जुड़ाव: अब सभी केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (PSUs) के लिए TReDS प्लेटफॉर्म का उपयोग करना अनिवार्य होगा।
- GeM के साथ एकीकरण: गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM) को TReDS से जोड़ने से छोटे विक्रेताओं को माल सप्लाई करते ही तुरंत पैसा (Cash Flow) मिल सकेगा।
3. क्लस्टर-आधारित विकास
भारत के पारंपरिक औद्योगिक क्षेत्रों (जैसे कानपुर का चमड़ा उद्योग या लुधियाना का टेक्सटाइल) को पुनर्जीवित करने के लिए सरकार ने 200 ‘इंडस्ट्रियल क्लस्टर्स’ को अपग्रेड करने का प्रस्ताव दिया है।
- आत्मनिर्भर फंड: ₹4,000 करोड़ के शुरुआती निवेश के साथ यह फंड इन क्लस्टर्स में नई मशीनरी और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करेगा।
- ग्लोबल चेन: सरकार का लक्ष्य है कि ये क्लस्टर केवल घरेलू मांग पूरी न करें, बल्कि ग्लोबल सप्लाई चेन का हिस्सा बनें।
4. ‘कॉर्पोरेट मित्र’
छोटे उद्यमियों के लिए GST, इनकम टैक्स और ऑडिट के नियम अक्सर सिरदर्द बन जाते हैं।
- बजट में प्रोफेशनल संगठनों (ICAI, ICSI) के माध्यम से “कॉर्पोरेट मित्र” शुरू करने की घोषणा की गई है।
- ये मित्र सूक्ष्म उद्योगों को नियमों के पालन (Compliance) में मदद करेंगे, जिससे उद्यमी कागजों के बजाय अपने बिजनेस पर ध्यान दे सकेंगे।
विशेषज्ञों की नजर में बजट 2026
आर्थिक विश्लेषक सौरभ अग्रवाल के अनुसार, “यह बजट भारत को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की दिशा में ‘नट-बोल्ट कसने’ जैसा है।” जहाँ ₹10,000 करोड़ का फंड कंपनियों की बैलेंस शीट को मजबूत करेगा, वहीं ‘कॉर्पोरेट मित्र’ जैसे कदम ईज ऑफ डूइंग बिजनेस (Ease of Doing Business) को धरातल पर उतारेंगे।









