
BSNL को लेकर लगातार चल रही निजीकरण की अटकलों पर सरकार ने साफ‑साफ शब्दों में जवाब दे दिया है। केंद्रीय दूरसंचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि BSNL का निजीकरण करने की कोई योजना नहीं है, बल्कि सरकार इस सरकारी टेलीकॉम विंग को और मजबूत और आधुनिक बनाने पर फोकस कर रही है। मंत्री ने जोर देकर कहा कि BSNL भारत की जनता की है और जनता के लिए ही काम करती रहेगी, जिससे निजी ऑपरेटरों Jio, Airtel और Vi को सीधे प्रतिस्पर्धा का नया दौर देखना पड़ सकता है।
सिंधिया ने बताया कि BSNL अपने मोबाइल नेटवर्क को बढ़ाने के लिए अगले कुछ वर्षों में 50,000 से 60,000 नए मोबाइल टावर लगाएगी। अभी तक कंपनी ने लगभग 1 लाख मोबाइल टावर तैयार किए हैं, जिनमें से करीब 98,000 टावर पहले से ही 4G सिग्नल दे रहे हैं और यह पूरा नेटवर्क भारत में विकसित “आत्मनिर्भर” 4G‑स्टैक पर तैयार किया गया है। सरकार की प्लानिंग यह है कि पहले इसी 4G‑नेटवर्क को और गाढ़ा और तेज किया जाए और फिर तेजी से 5G में अपग्रेड किया जाए।
4G से 5G: सिर्फ ‘सॉफ्टवेयर‑अपग्रेड’ का दावा
सिंधिया ने नेटवर्क अपग्रेड को लेकर एक खास बात रखी है। उन्होंने कहा कि BSNL का नेटवर्क इस तरह डिजाइन किया गया है कि 4G से 5G में जाना ज्यादा मुश्किल नहीं होगा। इसके लिए मुख्य रूप से कुछ नए मोबाइल साइट्स जोड़ने और सिर्फ सॉफ्टवेयर अपग्रेड करने की जरूरत पड़ेगी। इस तरह, बिना पूरी तरह नया टावर‑जाल बिछाए BSNL आने वाले सालों में भारत के 5G‑रेस में सीधे प्रतिस्पर्धा में आ सकता है। इसी वजह से कई एनालिस्ट BSNL के 4G‑नेटवर्क को असल में “5G‑रेडी” इंफ्रास्ट्रक्चर” बता रहे हैं।
BSNL का कारोबारी माहौल
सरकार के इस “मास्टरस्ट्रोक” के पीछे एक और तथ्य अहम है: BSNL के यूजर‑आधार और वित्तीय स्थिति में निरंतर सुधार हो रहा है। जून 2024 में कंपनी के लगभग 8.55 करोड़ ग्राहक थे, आज यह संख्या बढ़कर 9.27 करोड़ हो चुकी है। यह बताता है कि ग्राहकों का भरोसा BSNL पर बढ़ रहा है, खासकर उन इलाकों में जहां निजी ऑपरेटरों की सेवा या तो महंगी है या कवरेज कमजोर है।
आर्थिक तस्वीर और भी दिलचस्प है। BSNL ने लगभग 18 साल बाद नेट मुनाफे का आंकड़ा लाया है। कंपनी ने हाल ही में एक तिमाही में करीब 262 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा दर्ज किया। EBITDA के आधार पर भी स्थिति साफ बेहतर हुई है: 2023‑24 में ऑपरेटिंग प्रॉफिट 2,395 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 2024‑25 में 5,100 करोड़ रुपये हो गया है, जबकि सरकार 2025‑26 तिमाहियों में इस आंकड़े को और ऊपर जाने की उम्मीद जता रही है।
‘समृद्ध ग्राम योजना’ और 6G का भविष्य‑दृष्टा
BSNL का 5G‑अपग्रेड अकेला टेलीकॉम फैसला नहीं, बल्कि सरकार की व्यापक डिजिटल रणनीति का हिस्सा है। सिंधिया ने “समृद्ध ग्राम योजना” का जिक्र करते हुए बताया कि 5G और AI की मदद से किसानों को मिट्टी की नमी, पोषक तत्व और सिंचाई से जुड़ी रीयल‑टाइम जानकारी मोबाइल पर दी जा रही है। इसका नतीजा यह रहा है कि गांवों के छोटे किसान भी डेटा‑आधारित फैसले ले सकते हैं, जिससे उत्पादन और लाभ दोनों बढ़ रहे हैं।
सरकार ने “समृद्धि केंद्र” भी शुरू किए हैं, जो “फिजिटल” मॉडल पर आधारित हैं – यानी एक ही जगह पर शारीरिक और डिजिटल दोनों सुविधाएं जुड़ी हैं। इन केंद्रों में हेल्थ, एजुकेशन, बैंकिंग और ई‑गवर्नेंस जैसी सेवाएं गांव के लोगों तक पहुंचाई जा रही हैं। मंत्री ने 6G को “भविष्य का बड़ा बदलाव” बताया और यह विचार रखा कि 6G‑नेटवर्क के ज़रिए रिमोट रोबोटिक सर्जरी, होलोग्राफिक क्लास और दूर-दराज के गांवों में सुपर फास्ट टेली‑कंसल्टेशन जैसी सुविधाएं संभव होंगी।
टेलीकॉम सेक्टर पर एक नजर
सिंधिया ने भारत के टेलीकॉम सेक्टर की तेज ग्रोथ पर भी गर्व जताया। उनके अनुसार डेटा की कीमत वहां से जहां 290 रुपये प्रति GB थी, वह अब लगभग 8 रुपये प्रति GB रह गई है। मोबाइल टावरों पर लगने वाले Base Transceiver Stations (BTS) की संख्या 2014 के 6 लाख से बढ़कर अब लगभग 32 लाख हो चुकी है, जबकि 5G नेटवर्क ने सिर्फ 22 महीनों में 99.9% जिलों तक अपनी पहुंच बना ली है।
सरकार ने यह भी बताया कि टेलीकॉम सेक्टर के लिए नई PLI (Production Linked Incentive) स्कीम पर भी काम चल रहा है, ताकि भारत दुनिया के सबसे बड़े टेलीकॉम मार्केट्स में न सिर्फ मजबूत बना रहे, बल्कि टेक्नोलॉजी निर्माण और इंफ्रास्ट्रक्चर निर्यात की दिशा में भी बढ़ सके। इस पृष्ठभूमि में BSNL का नया मास्टरप्लान- 50-60 हज़ार नए टावर, 4G‑to‑5G अपग्रेड और ग्रामीण इंडिया पर फोकस -न सिर्फ Jio‑Airtel की नींद उड़ाने की बात कर रहा है, बल्कि यह भी दिखा रहा है कि देश का डिजिटल भविष्य गांवों से शुरू हो रहा है।









