
बैंक लॉकर में रखे आपके गहने, प्रॉपर्टी दस्तावेज या अन्य कीमती सामान पर बैंक की कोई नजर नहीं है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को लोकसभा में साफ किया कि बैंक न तो लॉकर खोल सकते हैं और न ही उसके कंटेंट का रिकॉर्ड रख सकते हैं। कांग्रेस सांसद किरण नामदेव के पूरक प्रश्न के जवाब में वित्त मंत्री ने कहा, “ग्राहक के लॉकर में रखे सामान पर नजर रखना बैंकिंग नियमों का उल्लंघन है। बैंक ऐसा नहीं करेंगे।”
लोकसभा प्रश्नकाल में खुलासा
लोकसभा के प्रश्नकाल में यह जानकारी देते हुए सीतारमण ने जोर दिया कि लॉकर पूरी तरह ग्राहक की निजी संपत्ति है। बैंक को लॉकर के अंदर क्या रखा है, इसका कोई पता नहीं चल सकता। इसलिए, अलग-अलग मूल्य के आधार पर बीमा कवरेज की व्यवस्था व्यावहारिक नहीं। नुकसान की स्थिति में मानक मुआवजा लॉकर के सालाना किराए का 100 गुना ही दिया जाता है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा, “लॉकर टूटने या सामान क्षतिग्रस्त होने पर यही कवरेज लागू होता है। हर लॉकर के लिए अलग बीमा संभव नहीं, क्योंकि जांच या आकलन का अधिकार बैंक के पास नहीं।”
RBI दिशानिर्देशों का पालन जरूरी
RBI के दिशानिर्देशों के मुताबिक, बैंक लॉकर सुविधा एक किराये का एग्रीमेंट है। बैंक की जिम्मेदारी केवल परिसर की सुरक्षा सुनिश्चित करना है, जैसे सीसीटीवी, गार्ड और मजबूत ताले। चोरी, आग या बैंक की लापरवाही साबित होने पर ही मुआवजा मिलता है। हाल के वर्षों में RBI ने नॉमिनेशन प्रक्रिया सरल की है। मृत्यु के बाद नॉमिनी को प्रायॉरिटी लिस्ट के साथ लॉकर एक्सेस मिलता है। किराया आकार पर निर्भर करता है – छोटे लॉकर के लिए ₹500 से ₹10,000 सालाना तक।
अर्थव्यवस्था पर वित्त मंत्री का भरोसा
वित्त मंत्री ने अर्थव्यवस्था पर भी भरोसा जताया। उन्होंने कहा, “भारत की इकोनॉमी मजबूत और स्थिर है। घरेलू LPG उत्पादन 25% बढ़ाया जा रहा है, जो आत्मनिर्भर भारत को मजबूत करेगा।” हॉर्मुज स्ट्रेट की सप्लाई दिक्कतों के बीच नॉन-फॉसिल एनर्जी पर फोकस बढ़ा है। कैपेक्स खर्च से मोमेंटम मिलेगा।
ग्राहकों के लिए महत्वपूर्ण सलाह
ग्राहकों को सलाह है कि नॉमिनी अपडेट रखें, नियमित चेक करें और अवैध चीजें जैसे नकदी न रखें। RBI सुझाव देता है कि संवेदनशील दस्तावेज डिजिटल रखें। यह नियम ग्राहक गोपनीयता की रक्षा करता है, लेकिन जागरूकता जरूरी।









