
कल्पना कीजिए, सुबह उठते ही मोबाइल पर बैंक अलर्ट आता है- ट्रांजेक्शन फेल। आप उत्सुक होकर ऐप खोलते हैं, तो पता चलता है कि आपका पूरा बैंक अकाउंट फ्रीज हो चुका है। घबराहट में बैंक ब्रांच दौड़ते हैं, लेकिन कर्मचारी साफ कहते हैं, “यह साइबर पुलिस का आदेश है, हमारा हाथ नहीं।” चौंकाने वाली बात? यह सिर्फ ₹100 के एक संदिग्ध क्रेडिट की वजह से हुआ। बैंकिंग भाषा में इसे ‘lien’ कहते हैं, जहां बिना पूर्व सूचना के डेबिट फ्रीज लग जाता है।
ऐसी घटनाएं अब आम हो रही हैं। साइबर फ्रॉड के शिकार लोग बढ़ रहे हैं, और निर्दोष खाताधारक फंस रहे हैं। रेडिट पर एक यूजर ने शेयर किया कि दो साल पुराने ₹70 के ट्रांजेक्शन से उनका SBI अकाउंट फ्रीज हो गया। ट्रेडिंग प्रॉफिट ट्रांसफर करने की कोशिश की, तो सब रुक गया। बैंक ने कहा, “साइबर सेल से संपर्क करें।”
क्यों फंसते हैं बेगुनाह?
साइबर क्राइम की जांच में पुलिस ‘मनी ट्रेल’ ट्रैक करती है- फ्रॉड का पैसा कहां-कहां गया। अपराधी बड़ी रकम को छोटे-छोटे हिस्सों (₹1 से ₹100) में सैकड़ों अकाउंट्स में बांट देते हैं, ताकि ट्रेसिंग मुश्किल हो। अगर UPI से अनजान ट्रांसफर आपके खाते में आ जाए, तो पुलिस इसे संदिग्ध मान लेती है। RBI के AML/CFT नियमों के तहत बैंक तुरंत फ्रीज कर देते हैं।
यह मिसयूज भी हो रहा है। दुश्मनी में कोई ₹10 भेजकर फर्जी शिकायत कर देता है, और आपका अकाउंट ब्लॉक। जयपुर के कचौड़ी व्यापारी पदमचंद का केस इसका उदाहरण है- तेलंगाना साइबर पुलिस के आदेश पर ₹5000 के 6 ट्रांजेक्शन से पूरा बिजनेस अकाउंट फ्रीज। केरल हाईकोर्ट ने भी कहा, बैंक बिना नोटिस फ्रीज कर सकते हैं, लेकिन RBI को SOP बनाने का निर्देश दिया।
राजस्थान HC का ऐतिहासिक फैसला
घबराएं नहीं, कानून आपका साथ देगा। राजस्थान हाईकोर्ट ने ‘सय्यद सरफराज बनाम RBI’ (27 नवंबर 2025) में मील का पत्थर रुख किया। जस्टिस नूपुर भाटी ने कहा, पूरा अकाउंट फ्रीज करना असंवैधानिक है। पुलिस/बैंक को सिर्फ संदिग्ध राशि (जैसे ₹100) ही होल्ड करनी चाहिए, बाकी बैलेंस से ट्रांजेक्शन की इजाजत हो।
कोर्ट ने गाइडलाइंस दिए: बैंक को जांच अधिकारी (IO) से 7 दिनों में विवादित राशि की डिटेल मांगनी होगी। IO जवाब न दे तो मूल राशि ही फ्रीज रहे। यह निर्दोषों को राहत देगा, जांच को प्रभावित नहीं करेगा।
अनफ्रीज की स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रिया
- बैंक जाएं: FIR नंबर, IO का नाम, साइबर सेल डिटेल लें। बैंक को 7 दिनों में यह जानकारी पुलिस से लेनी है।
- साइबर सेल संपर्क: ईमेल/व्यक्तिगत आवेदन दें – ID प्रूफ, बैंक स्टेटमेंट, ट्रांजेक्शन डिटेल संलग्न। NOC मांगें।
- नोटिस या कोर्ट: सहयोग न मिले तो वकील से कानूनी नोटिस भेजें। CrPC 451/457 के तहत मजिस्ट्रेट कोर्ट में पिटीशन दायर करें। 15 दिनों में अकाउंट खुल जाता है।
- बैंक को NOC दें: क्लियरेंस मिलते ही अकाउंट एक्टिव।
बचाव के जरुरी टिप्स
- रोजाना स्टेटमेंट चेक करें; अज्ञात क्रेडिट पर तुरंत बैंक बताएं।
- UPI/ट्रांजेक्शन के लिए अलग ‘ट्रांजेक्शन अकाउंट’ रखें, सेविंग्स अलग।
- अनजान लिंक/ऐप्स से बचें; फ्रॉड पर 1930 कॉल करें।
RBI गाइडलाइंस सख्त हैं, लेकिन HC फैसले से संतुलन आया है। लाखों अकाउंट्स प्रभावित हो चुके – जागरूक रहें!









