
मध्य पूर्व में जारी जंग के बीच भारत सरकार ने रसोई गैस सुरक्षित रखने और एलपीजी पर निर्भरता घटाने के लिए पाइप्ड नैचुरल गैस (PNG) पर बड़ा दांव खेला है। नया आदेश सिर्फ टेक्निकल सुधार नहीं, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा और गैस‑आधारित अर्थव्यवस्था की तरफ निर्णायक मोड़ माना जा रहा है।
जंग, गैस की किल्लत और नया मोड़
पिछले 25 दिनों से मध्य पूर्व में जारी संघर्ष ने वैश्विक गैस सप्लाई चेन को झकझोर दिया है और इसका सीधा असर भारत की रसोई पर दिखने लगा है। भारत अपनी करीब 60 फीसदी LPG जरूरत आयात से पूरी करता है, जिसमें लगभग 90 फीसदी कार्गो ओमान और ईरान के बीच स्थित तकनीकी रूप से अहम समुद्री रास्ते ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़’ से होकर आते हैं। मौजूदा जंग के चलते इस रूट पर भारत के कई LPG कार्गो जहाज फंस गए हैं, जिससे आपूर्ति पर दबाव और मार्केट में अनिश्चितता बढ़ गई है।
इसी जोखिम ने सरकार को एक बार फिर यह एहसास कराया कि सिर्फ आयातित सिलेंडर‑आधारित LPG मॉडल पर टिके रहना आने वाले वर्षों में भारत के लिए बेहद महंगा साबित हो सकता है। इसी पृष्ठभूमि में PNG नेटवर्क को ‘सुपरफास्ट’ मोड पर डालने का फैसला सामने आया है।
नेचुरल गैस डिस्ट्रीब्यूशन ऑर्डर 2026: क्या बदला?
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत ‘नेचुरल गैस एंड पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स डिस्ट्रीब्यूशन ऑर्डर, 2026’ अधिसूचित किया है, जो तुरंत प्रभाव से लागू हो गया है। इस आदेश का मकसद देशभर में गैस पाइपलाइन और सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) नेटवर्क के विस्तार की रफ्तार को कई गुना बढ़ाना है।
- सख्त टाइम फ्रेम: पाइपलाइन बिछाने, नेटवर्क सेटअप और विस्तार के हर चरण के लिए सख्त टाइमलाइन तय की गई है, ताकि फाइलों में अटके प्रोजेक्ट समय पर जमीन पर उतर सकें।
- बाधाएं होंगी खत्म: रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA), हाउसिंग सोसायटी या स्थानीय निकायों द्वारा मनमाना चार्ज, जमीन तक पहुंच रोकने या नो‑ऑब्जेक्शन में देरी जैसी दिक्कतों को अब तय समय सीमा में हल करना अनिवार्य होगा, वरना डीम्ड क्लीयरेंस मानी जाएगी।
- निवेशकों के लिए आसान फ्रेमवर्क: नया ढांचा इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों को एक पारदर्शी, अनुमानित और निवेश‑अनुकूल माहौल देता है, जिससे निजी और सार्वजनिक दोनों सेक्टर के निवेश को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
मंत्रालय के मुताबिक, देश के गैस पाइपलाइन नेटवर्क में अगले चरण में हजारों किलोमीटर नई लाइनों की जोड़‑घट होनी है, जिससे मौजूदा नेटवर्क का कवरेज और गहराई दोनों बढ़ेंगे।
LPG से PNG की ओर: ‘रिलीज’ होगी सिलेंडरों की फौज
सरकार की रणनीति साफ है – जहां पाइपलाइन आर्थिक रूप से पहुंच सकती है, खासकर शहरों और घनी आबादी वाले इलाकों में, वहां PNG को प्राथमिक और व्यवहारिक रूप से अनिवार्य विकल्प बनाया जाएगा। इससे दो स्तर पर बदलाव होगा:
- शहरी और सेमी‑अर्बन क्षेत्रों में घरेलू रसोई PNG पर शिफ्ट होगी, जिससे एलपीजी सिलेंडर की खपत और लॉजिस्टिक बोझ घटेगा।
- यही सिलेंडर स्टॉक उन ग्रामीण और दूरदराज इलाकों के लिए ‘रिलीज’ होगा, जहां पाइपलाइन बिछाना अभी आर्थिक या भौगोलिक रूप से संभव नहीं है।
अधिकारियों के अनुसार, कई शहरों में PNG नेटवर्क मौजूद होने के बावजूद उपभोक्ता आदत, जानकारी की कमी या लोकल अड़चनों के कारण अभी भी LPG पर टिके हैं, जिन्हें नया आदेश बदलने की दिशा में अहम टूल साबित होगा।
ऊर्जा सुरक्षा और ‘गैस आधारित अर्थव्यवस्था’ की ओर कदम
पेट्रोलियम मंत्रालय का साफ संदेश है कि नया आदेश सिर्फ पाइपलाइन सुविधा बढ़ाने के लिए नहीं, बल्कि अंतिम मील कनेक्टिविटी बेहतर करने और कुकिंग, ट्रांसपोर्ट व उद्योगों के लिए स्वच्छ ईंधन के व्यापक उपयोग को बढ़ावा देने के लिए लाया गया है। यह कदम भारत को ‘गैस आधारित अर्थव्यवस्था’ की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकता है, जहां ऊर्जा बास्केट में गैस की हिस्सेदारी कहीं ज्यादा होगी।
मध्य पूर्व संकट के दौरान, जब खाड़ी क्षेत्र की गैस सुविधाओं और शिपमेंट पर सीधा खतरा दिख रहा है, भारत का अपने आंतरिक पाइपलाइन और CGD नेटवर्क को मजबूत करना एक दूरदर्शी और रणनीतिक चाल के रूप में देखा जा रहा है। इससे एक तरफ घरों में रसोई गैस की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित हो सकेगी, दूसरी तरफ आयातित LPG पर निर्भरता और उस पर होने वाला अरबों रुपये का विदेशी मुद्रा खर्च भी धीरे‑धीरे कम किया जा सकेगा।









