
केंद्र सरकार के करीब 50 लाख कर्मचारियों और 69 लाख पेंशनधारकों की नजरें आठवें केंद्रीय वेतन आयोग पर टिकी हैं। 3 नवंबर 2025 को गठित इस आयोग ने अपनी रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया को तेज कर दिया है। जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाले आयोग ने अब देशभर में विभिन्न पक्षों के साथ बैठकें आयोजित करने का प्लान तैयार किया है। इन चर्चाओं से साफ है कि सिफारिशें अंतिम रूप लेने वाली हैं, जो 1 जनवरी 2026 से प्रभावी हो सकती हैं, हालांकि पूर्ण लागू होने में 2027-28 तक समय लग सकता है।
आयोग की प्रक्रिया में तेजी
आयोग ने कर्मचारी यूनियनों, संगठनों और स्टेकहोल्डर्स से सीधे सुझाव लेने की रणनीति अपनाई है। स्टाफ साइड JCM ने अपना मेमोरेंडम तैयार कर लिया है, जिसमें फिटमेंट फैक्टर को 2.86 या इससे अधिक करने की मांग प्रमुख है। MyGov पोर्टल पर जनता के सुझाव 16 मार्च 2026 तक आमंत्रित किए गए थे। अब फिजिकल मीटिंग्स का दौर शुरू हो रहा है, जो सिफारिशों को ज्यादा समावेशी बनाएगा। इन बैठकों से आयोग वेतन, पेंशन, भत्तों और महंगाई भत्ते (DA) में बदलावों पर ठोस दिशा तय करेगा।
शहरों में अहम बैठकें तय
शेड्यूल के मुताबिक, नई दिल्ली में 28, 29 और 30 अप्रैल को प्रमुख बैठकें होंगी। यहां यूनियनों और सरकारी प्रतिनिधियों से विस्तृत बातचीत होगी। उसके बाद पुणे में 4 और 5 मई को विभिन्न संगठनों के साथ चर्चा निर्धारित है। मुंबई समेत अन्य महानगरों में भी जल्द कार्यक्रम होंगे। इन मीटिंग्स का मकसद सभी क्षेत्रों से राय लेना है, ताकि सिफारिशें सिर्फ दिल्ली-केंद्रित न रहें।
कर्मचारी संगठन MACP (मॉडिफाइड अश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन) में सुधार और उच्च फिटमेंट फैक्टर की मांग मजबूती से उठा रहे हैं। वर्तमान फिटमेंट 1.96 से बढ़ाकर 2.0 या अधिक करने की संभावना है, जिससे न्यूनतम बेसिक पे 18,000 रुपये से 36,000-51,000 रुपये तक पहुंच सकता है। उच्च लेवल-10 पर यह 56,100 से 1.12 लाख रुपये हो सकता है।
कंसल्टेंट भर्ती से प्रक्रिया में रफ्तार
आयोग ने अपनी रिपोर्ट तैयार करने के लिए 20 कंसल्टेंट पदों पर भर्ती शुरू की है। फुल-टाइम कंसल्टेंट को अधिकतम 1.80 लाख रुपये महीने तक सैलरी मिलेगी, जबकि पार्ट-टाइम में 6-12 दिनों का काम कराने पर कम राशि। ये विशेषज्ञ सुझाव एकत्रण और विश्लेषण में मदद करेंगे। यह कदम दर्शाता है कि आयोग सिफारिशों को डेटा-आधारित बनाने को गंभीर है।
आयोग का आर्थिक महत्व
आठवां वेतन आयोग सिर्फ सैलरी संशोधन नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था का बड़ा इंजन है। इससे कर्मचारियों की खरीदारी क्षमता बढ़ेगी, जो खुदरा और रियल एस्टेट जैसे क्षेत्रों को गति देगी। यूनियंस 20-35 प्रतिशत औसत बढ़ोतरी की उम्मीद कर रही हैं। लेकिन अंतिम फैसला कैबिनेट लेगा। लाखों परिवारों के लिए यह बदलाव चमकदार किस्मत का वाहक बनेगा। आने वाले दिनों की मीटिंग्स पर सबकी निगाहें हैं।









