
केंद्र सरकार ने बजट 2026-27 में देश की ऊर्जा व्यवस्था को पूरी तरह बदलने का संकल्प लिया है। सरकार का मुख्य ध्यान अब कोयले या डीजल के बजाय सूरज की रोशनी (Solar Power) से बिजली बनाने पर है। इसके लिए वित्त मंत्री ने ‘नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय’ को कुल ₹32,915 करोड़ का बजट दिया है। इस बजट की सबसे खास बात यह है कि इसका 80 प्रतिशत से भी ज्यादा हिस्सा सीधे तौर पर आम जनता और किसानों की जेब में जाएगा।
पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना
इस बजट में सरकार ने ‘पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना’ के लिए ₹22,000 करोड़ आवंटित किए हैं। यह योजना उन परिवारों के लिए है जो बिजली के भारी बिलों से परेशान रहते हैं।
- लक्ष्य: सरकार का लक्ष्य अगले कुछ वर्षों में 1 करोड़ घरों की छतों पर सोलर पैनल लगाना है।
- फायदा: इससे इन परिवारों को हर महीने 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली मिल पाएगी।
- बचत: इस योजना से न केवल बिजली बिल शून्य हो जाएगा, बल्कि सोलर पैनल से पैदा हुई अतिरिक्त बिजली को आप सरकार को बेच भी सकेंगे, जिससे सालाना ₹15,000 से ₹18,000 की कमाई भी हो सकती है।
पीएम-कुसुम योजना
खेती-किसानी में सिंचाई के लिए बिजली या डीजल पंप का खर्च बहुत ज्यादा आता है। सरकार ने इस समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए ‘पीएम-कुसुम’ योजना के बजट में 92% की रिकॉर्ड बढ़ोतरी करते हुए इसे ₹5,000 करोड़ कर दिया है।
- सस्ते सोलर पंप: इस पैसे से किसानों को बहुत कम कीमत पर सोलर पंप दिए जाएंगे।
- बंजर जमीन से कमाई: किसान अपनी बंजर जमीन पर छोटे सोलर प्लांट लगाकर बिजली पैदा कर सकते हैं और उसे ग्रिड को बेचकर अपनी आय बढ़ा सकते हैं।
- ऊर्जा दाता: सरकार का विजन है कि अन्नदाता (किसान) अब ‘ऊर्जा दाता’ भी बने।
भारत बनेगा दुनिया का बड़ा सोलर हब
फिलहाल भारत में केवल 3 प्रतिशत घरों में सोलर पैनल लगे हैं, जबकि जर्मनी और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में यह संख्या बहुत ज्यादा है। लेकिन सरकार की इस नई पहल से यह तस्वीर बदलने वाली है।
- सस्ती तकनीक: बजट में सोलर पैनल और बैटरी बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाले सामान पर टैक्स कम किया गया है। इससे आने वाले समय में सोलर पैनल और इन्वर्टर सस्ते होंगे।
- बाजार में उछाल: अब तक 30 लाख से ज्यादा घर सौर ऊर्जा से जुड़ चुके हैं। इस बजट के बाद भारत दुनिया के सबसे बड़े सोलर बाजारों में से एक बन जाएगा।
नए स्टार्टअप और रोजगार के हजारों अवसर
जब 1 करोड़ घरों में सोलर पैनल लगेंगे, तो उन्हें लगाने और देखभाल करने के लिए लाखों लोगों की जरूरत होगी।
- स्किल डेवलपमेंट: सरकार ने युवाओं को सोलर तकनीक सिखाने के लिए नए ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरू करने का फैसला लिया है।
- सोलर सेंटर्स: जैसे कार या मोबाइल के सर्विस सेंटर होते हैं, वैसे ही अब शहरों में ‘सोलर एक्सपीरियंस सेंटर’ खुलेंगे। इससे न केवल रोजगार बढ़ेगा, बल्कि छोटे बिजनेस करने वालों को भी नए मौके मिलेंगे।
पर्यावरण और अर्थव्यवस्था दोनों को फायदा
सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने से न केवल प्रदूषण कम होगा, बल्कि सरकार पर तेल और कोयले के आयात (Import) का बोझ भी कम होगा। यह पैसा देश के बुनियादी ढांचे के विकास में काम आएगा। विशेषज्ञों का कहना है कि यह बजट भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में ‘आत्मनिर्भर’ बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।









